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Banswara: पद संभालने के 7वें दिन सागवाड़ा नगर पालिका अध्यक्ष फिर निलंबित, स्वायत्त शासन विभाग से आदेश जारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बांसवाड़ा
Published by: बांसवाड़ा ब्यूरो
Updated Tue, 20 Jan 2026 07:32 PM IST
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सार
Banswara: कोर्ट के आदेश के बाद दूसरी बार सागवाड़ा नगरपालिका अध्यक्ष की कुर्सी संभालने वाले कांग्रेस नेता को राजस्थान सरकार ने मंगलवार को फिर से निलंबित कर दिया। निलंबित अध्यक्ष पर पद पर रहते हुए भ्रष्टाचार का आरोप है।
कांग्रेस नेता नरेंद्र खोड़निया
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
सागवाड़ा नगरपालिका में अध्यक्ष पद को लेकर राजनीतिक घटनाक्रम ने नया मोड़ ले लिया है। 14 जनवरी को कोर्ट के स्थगन आदेश के तहत अध्यक्ष पद संभालने वाले कांग्रेस पार्षद नरेंद्र खोड़निया को मंगलवार को स्वायत्त शासन विभाग ने फिर से निलंबित कर दिया है। विभाग के निदेशक जे.पी. चंद्रशेखर ने खोड़निया के निलंबन का आदेश जारी किया है। उनके आदेश में कहा गया है कि अध्यक्ष पद का दुरुपयोग कर खोड़निया ने कई अनियमितताएं की हैं। इसमें क्षेत्रीय उप निदेशक, उदयपुर द्वारा कराई गई जांच रिपोर्ट का हवाला दिया गया है।
निलंबन का आधार
जांच रिपोर्ट के अनुसार, खोड़निया ने खुद की अध्यक्षता में गठित एम्पावर्ड कमेटी में स्वयं के नाम का पट्टा (69ए) जारी कर दिया। अतिरिक्त शुल्क लिए बिना पट्टे जारी किए गए। नरेश कुमार पाठक, अखिलेश पाठक, मोतीलाल पटेल और अन्य को अनैतिक लाभ पहुंचाने के लिए कंकू, मीना, राधा सहित अन्य व्यक्तियों की जमीन, ग्रीन बेल्ट और नाले की जमीन पर कोर्ट के आदेशों की अवहेलना कर आवासीय पट्टे जारी किए गए।
भाई और भतीजे के नाम से पट्टे जारी
सागवाड़ा में अलग-अलग खसरों की कुल 2.06 बिस्वा (4462 वर्गगज) जमीन को 90बी के तहत प्लान किया गया था। इसके अलावा 2 अन्य खसरों में 7275 वर्गगज जमीन का भी प्लान सत्यापित किया गया। खोड़निया ने इस जमीन को कूटरचना कर अपने भाई संतोष कुमार खोड़निया और बेटे सुमित खोड़निया के नाम से पट्टे जारी कर दिए। उन्होंने पद का दुरुपयोग कर मूल सत्यापित प्लान में 30 फीट सड़क को शामिल कर भाई और भतीजे को अनैतिक लाभ पहुँचाया।
अध्यक्ष पद के लिए दो कुर्सियां
15 जनवरी को सागवाड़ा नगर पालिका कार्यालय में कांग्रेस के खोड़निया और भाजपा के आशीष गांधी के लिए अध्यक्ष कार्यालय में पास-पास कुर्सियां लगाई गईं। दोनों ने खुद को अध्यक्ष बताया। कार्यालय में लगी अध्यक्ष के कार्यकाल की सूची में 14 जनवरी से खोड़निया का नाम अंकित था और उनके कमरे के बाहर नेमप्लेट भी लगाई गई थी।
ये भी पढ़ें: जोधपुर-जैसलमेर नेशनल हाईवे पर टैंकर से टकराई बस, बाइक सावर को बचाने में 4 की मौत, 20 से ज्यादा घायल
पद से पहले भी निलंबित
नरेंद्र खोड़निया को नौ माह पहले भी निलंबित किया गया था। 2 मई 2025 को राज्य सरकार ने भाजपा पार्षद आशीष गांधी को सागवाड़ा नगरपालिका का अध्यक्ष मनोनीत किया था। 14 जनवरी को निलंबित अध्यक्ष खोड़निया ने हाईकोर्ट से स्टे आदेश मिलने के बाद खुद को अध्यक्ष घोषित कर कुर्सी पर बैठ गए। आशीष गांधी ने कहा कि राज्य सरकार से आदेश मिलने तक वे ही अध्यक्ष के रूप में मान्य हैं।
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निलंबन का आधार
जांच रिपोर्ट के अनुसार, खोड़निया ने खुद की अध्यक्षता में गठित एम्पावर्ड कमेटी में स्वयं के नाम का पट्टा (69ए) जारी कर दिया। अतिरिक्त शुल्क लिए बिना पट्टे जारी किए गए। नरेश कुमार पाठक, अखिलेश पाठक, मोतीलाल पटेल और अन्य को अनैतिक लाभ पहुंचाने के लिए कंकू, मीना, राधा सहित अन्य व्यक्तियों की जमीन, ग्रीन बेल्ट और नाले की जमीन पर कोर्ट के आदेशों की अवहेलना कर आवासीय पट्टे जारी किए गए।
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भाई और भतीजे के नाम से पट्टे जारी
सागवाड़ा में अलग-अलग खसरों की कुल 2.06 बिस्वा (4462 वर्गगज) जमीन को 90बी के तहत प्लान किया गया था। इसके अलावा 2 अन्य खसरों में 7275 वर्गगज जमीन का भी प्लान सत्यापित किया गया। खोड़निया ने इस जमीन को कूटरचना कर अपने भाई संतोष कुमार खोड़निया और बेटे सुमित खोड़निया के नाम से पट्टे जारी कर दिए। उन्होंने पद का दुरुपयोग कर मूल सत्यापित प्लान में 30 फीट सड़क को शामिल कर भाई और भतीजे को अनैतिक लाभ पहुँचाया।
अध्यक्ष पद के लिए दो कुर्सियां
15 जनवरी को सागवाड़ा नगर पालिका कार्यालय में कांग्रेस के खोड़निया और भाजपा के आशीष गांधी के लिए अध्यक्ष कार्यालय में पास-पास कुर्सियां लगाई गईं। दोनों ने खुद को अध्यक्ष बताया। कार्यालय में लगी अध्यक्ष के कार्यकाल की सूची में 14 जनवरी से खोड़निया का नाम अंकित था और उनके कमरे के बाहर नेमप्लेट भी लगाई गई थी।
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पद से पहले भी निलंबित
नरेंद्र खोड़निया को नौ माह पहले भी निलंबित किया गया था। 2 मई 2025 को राज्य सरकार ने भाजपा पार्षद आशीष गांधी को सागवाड़ा नगरपालिका का अध्यक्ष मनोनीत किया था। 14 जनवरी को निलंबित अध्यक्ष खोड़निया ने हाईकोर्ट से स्टे आदेश मिलने के बाद खुद को अध्यक्ष घोषित कर कुर्सी पर बैठ गए। आशीष गांधी ने कहा कि राज्य सरकार से आदेश मिलने तक वे ही अध्यक्ष के रूप में मान्य हैं।