बांसवाड़ा जिले के घाटोल उपखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत बड़लिया स्थित राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय नोका में गुरुवार को बड़ा हादसा टल गया। विद्यालय भवन के बरामदे की छत का प्लास्टर अचानक उखड़कर नीचे गिर गया। गनीमत रही कि घटना के समय वहां कोई भी छात्र मौजूद नहीं था, जिससे किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई।
प्राप्त जानकारी के अनुसार विद्यालय भवन काफी पुराना और जर्जर अवस्था में है, जिससे हर समय दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। विद्यालय के तीन कमरों के सामने बने बरामदे का प्लास्टर अचानक भरभराकर गिर पड़ा। जिन कमरों के सामने यह हादसा हुआ, उनकी दीवारों पर पहले से ही भवन जर्जर होने के संकेत अंकित किए जा चुके हैं, इसके बावजूद उन्हीं कमरों में नियमित रूप से कक्षाओं का संचालन किया जा रहा है।
पिछले वर्ष चार कमरे किए गए थे ध्वस्त
उल्लेखनीय है कि गत वर्ष झालावाड़ जिले में विद्यालय भवन गिरने से बच्चों की मौत के बाद पूरे राजस्थान में जर्जर स्कूल भवनों का सर्वे किया गया था। उसी दौरान इस विद्यालय के चार कमरों को अत्यधिक जर्जर मानते हुए ध्वस्त कर दिया गया था। वर्तमान में विद्यालय में कुल पांच कमरे शेष हैं, जिनमें से एक में कार्यालय संचालित है। शेष चार में से तीन कमरों को उपयोग योग्य मानते हुए कक्षाएं लगाई जा रही हैं, जबकि एक कमरा बंद रखा गया है। इन तीन कमरों की आयु भी करीब 20 वर्ष से अधिक है और बारिश के दौरान इनमें पानी टपकने की समस्या बनी रहती है।
पढ़ें; लिव-इन बना सामाजिक अपराध: जालोर में परिवार पर 31 लाख का फरमान, हुक्का-पानी बंद; हाईकोर्ट का आदेश भी बेअसर
कमरों की कमी, पेड़ के नीचे पढ़ने को मजबूर बच्चे
राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय नोका में कक्षा पहली से आठवीं तक की पढ़ाई होती है। विद्यालय में कुल 145 विद्यार्थी और 9 शिक्षक-शिक्षिकाओं का स्टाफ है। पर्याप्त कक्ष कक्षों के अभाव में पहली से तीसरी कक्षा के बच्चों को पेड़ के नीचे बैठाकर पढ़ाया जाता है, जबकि तीसरी-चौथी तथा छठी-सातवीं कक्षाओं के विद्यार्थियों को एक साथ बिठाकर शिक्षण कार्य कराया जा रहा है। केवल आठवीं कक्षा के लिए अलग कमरा उपलब्ध है। इसके अलावा विद्यालय में संस्था प्रधान का पद भी पिछले सवा वर्ष से रिक्त पड़ा है।
पांच नए कमरों की आवश्यकता
ग्राम पंचायत बड़लिया के प्रशासक रमेश भगोरा ने बताया कि विद्यालय में कम से कम पांच नए कमरों की तत्काल आवश्यकता है। इस संबंध में प्रस्ताव तैयार कर शिक्षा विभाग के अधिकारियों को अवगत कराया जा चुका है, लेकिन अब तक नए कमरों के निर्माण को लेकर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।