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Banswara: 20 लाख रिश्वत के बाद अब फर्जी डिग्री की जांच, विधायक जयकृष्ण पटेल पर क्यों कसा शिकंजा?
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बांसवाड़ा
Published by: बांसवाड़ा ब्यूरो
Updated Fri, 16 Jan 2026 05:25 PM IST
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सार
Banswara: बागीदौरा विधायक जयकृष्ण पटेल के खिलाफ एसओजी ने शैक्षिक डिग्रियों की जांच शुरू कर दी है। बता दें कि हाल ही में भाजपा छोड़ कांग्रेस में शामिल होने वाले पूर्व मंत्री महेंद्रजीत सिंह मालवीया की शिकायत पर यह जांच हो रही है।
बागीदौरा विधायक जयकृष्ण पटेल
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
बांसवाड़ा: विधानसभा में प्रश्न पूछने के एवज में 20 लाख रुपये की रिश्वत लेने के मामले में घिरे बांसवाड़ा जिले की बागीदौरा विधानसभा सीट से विधायक जयकृष्ण पटेल की मुश्किलें कम होती नजर नहीं आ रही हैं। अब राज्य सरकार की स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) ने उनकी शैक्षिक डिग्रियों की जांच शुरू करते हुए संबंधित रिकॉर्ड तलब किया है।
SOG ने कौन से दस्तावेज मांगे?
एसओजी उदयपुर इकाई ने डूंगरपुर जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी को पत्र भेजकर वर्ष 2017 में तृतीय श्रेणी शिक्षक के रूप में विधायक जयकृष्ण पटेल की नियुक्ति से संबंधित रिकॉर्ड मांगा है। यह नियुक्ति चिखली ब्लॉक के राजकीय प्राथमिक विद्यालय गुंदलारा छोटाफला में हुई थी। इसके बाद जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी हनुमान सिंह राठौड़ ने जिला शिक्षा अधिकारी (प्रारंभिक) को निर्देश दिए हैं कि पटेल की नियुक्ति से लेकर त्यागपत्र देने तक के सभी दस्तावेज एसओजी को भेजे जाएं।
कब हुई थी शिक्षक पद पर विधायक की नियुक्ति?
जानकारी के अनुसार, जयकृष्ण पटेल ने वर्ष 2014 में महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय, अजमेर से बीएड की डिग्री प्राप्त की थी। इसके बाद 2017 में उनकी नियुक्ति डूंगरपुर जिले में तृतीय श्रेणी अध्यापक के पद पर हुई। वर्ष 2023 में विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए उन्होंने सरकारी सेवा से त्यागपत्र दे दिया था। हालांकि 2023 के विधानसभा चुनाव में उन्हें सफलता नहीं मिली, लेकिन उसी सीट पर हुए उपचुनाव में वे विधायक चुने गए।
विधायक पहले क्यों हुए थे गिरफ्तार?
गत वर्ष विधानसभा में प्रश्न पूछने के एवज में रिश्वत मांगने के आरोप में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने विधायक जयकृष्ण पटेल को गिरफ्तार किया था। वह काफी समय तक जेल में रहे और फिलहाल जमानत पर हैं। इस मामले को लेकर विधानसभा की सदाचार समिति ने भी उन्हें पक्ष रखने के लिए तलब किया था, लेकिन अब तक उनकी विधायकी को लेकर कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है।
पूर्व मंत्री ने क्या की थी शिकायत?
विधायक के खिलाफ पूर्व मंत्री महेंद्रजीत सिंह मालवीया ने 9 दिसंबर 2025 को मुख्यमंत्री को शिकायत पत्र सौंपा था। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि जयकृष्ण पटेल ने फर्जी शैक्षिक डिग्रियों के आधार पर सरकारी नौकरी हासिल की। शिकायत के अनुसार, पटेल ने 2007 में मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय, उदयपुर से स्नातक प्रथम वर्ष की परीक्षा उत्तीर्ण की थी, लेकिन 2008 में अनुत्तीर्ण रहे। वर्ष 2009 में पूरक परीक्षा और 2010 में तृतीय वर्ष की परीक्षा में भी वे अनुत्तीर्ण बताए गए हैं।
ये भी पढ़ें: वरिष्ठ अध्यापक भर्ती 2022 में डमी अभ्यर्थी प्रकरण, दो साल से फरार आरोपी गिरफ्तार
सरकार क्यों करा रही जांच?
इसी अवधि में पटेल द्वारा सिक्किम स्थित इंटर इंस्टीट्यूशन फॉर इंटीग्रेटेड लर्निंग इन मैनेजमेंट यूनिवर्सिटी से 2009 से 2011 के बीच स्नातक परीक्षा उत्तीर्ण करने तथा गुजरात की एक विश्वविद्यालय से 2010 से 2012 के बीच बीए करने का दावा किया गया है। शिकायत के आधार पर सरकार ने शिक्षा विभाग के निदेशक और एसओजी को अलग-अलग जांच सौंपी थी, जिसके तहत अब विधायक की शैक्षिक डिग्रियों से संबंधित रिकॉर्ड मंगाया गया है।
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SOG ने कौन से दस्तावेज मांगे?
एसओजी उदयपुर इकाई ने डूंगरपुर जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी को पत्र भेजकर वर्ष 2017 में तृतीय श्रेणी शिक्षक के रूप में विधायक जयकृष्ण पटेल की नियुक्ति से संबंधित रिकॉर्ड मांगा है। यह नियुक्ति चिखली ब्लॉक के राजकीय प्राथमिक विद्यालय गुंदलारा छोटाफला में हुई थी। इसके बाद जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी हनुमान सिंह राठौड़ ने जिला शिक्षा अधिकारी (प्रारंभिक) को निर्देश दिए हैं कि पटेल की नियुक्ति से लेकर त्यागपत्र देने तक के सभी दस्तावेज एसओजी को भेजे जाएं।
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कब हुई थी शिक्षक पद पर विधायक की नियुक्ति?
जानकारी के अनुसार, जयकृष्ण पटेल ने वर्ष 2014 में महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय, अजमेर से बीएड की डिग्री प्राप्त की थी। इसके बाद 2017 में उनकी नियुक्ति डूंगरपुर जिले में तृतीय श्रेणी अध्यापक के पद पर हुई। वर्ष 2023 में विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए उन्होंने सरकारी सेवा से त्यागपत्र दे दिया था। हालांकि 2023 के विधानसभा चुनाव में उन्हें सफलता नहीं मिली, लेकिन उसी सीट पर हुए उपचुनाव में वे विधायक चुने गए।
विधायक पहले क्यों हुए थे गिरफ्तार?
गत वर्ष विधानसभा में प्रश्न पूछने के एवज में रिश्वत मांगने के आरोप में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने विधायक जयकृष्ण पटेल को गिरफ्तार किया था। वह काफी समय तक जेल में रहे और फिलहाल जमानत पर हैं। इस मामले को लेकर विधानसभा की सदाचार समिति ने भी उन्हें पक्ष रखने के लिए तलब किया था, लेकिन अब तक उनकी विधायकी को लेकर कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है।
पूर्व मंत्री ने क्या की थी शिकायत?
विधायक के खिलाफ पूर्व मंत्री महेंद्रजीत सिंह मालवीया ने 9 दिसंबर 2025 को मुख्यमंत्री को शिकायत पत्र सौंपा था। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि जयकृष्ण पटेल ने फर्जी शैक्षिक डिग्रियों के आधार पर सरकारी नौकरी हासिल की। शिकायत के अनुसार, पटेल ने 2007 में मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय, उदयपुर से स्नातक प्रथम वर्ष की परीक्षा उत्तीर्ण की थी, लेकिन 2008 में अनुत्तीर्ण रहे। वर्ष 2009 में पूरक परीक्षा और 2010 में तृतीय वर्ष की परीक्षा में भी वे अनुत्तीर्ण बताए गए हैं।
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सरकार क्यों करा रही जांच?
इसी अवधि में पटेल द्वारा सिक्किम स्थित इंटर इंस्टीट्यूशन फॉर इंटीग्रेटेड लर्निंग इन मैनेजमेंट यूनिवर्सिटी से 2009 से 2011 के बीच स्नातक परीक्षा उत्तीर्ण करने तथा गुजरात की एक विश्वविद्यालय से 2010 से 2012 के बीच बीए करने का दावा किया गया है। शिकायत के आधार पर सरकार ने शिक्षा विभाग के निदेशक और एसओजी को अलग-अलग जांच सौंपी थी, जिसके तहत अब विधायक की शैक्षिक डिग्रियों से संबंधित रिकॉर्ड मंगाया गया है।