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Barmer News: कलेक्टर टीना डाबी को सांसद उम्मेदाराम की हिदायत- बड़ी कंपनियों के मुनीम न बनें एसडीएम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बाड़मेर
Published by: प्रिया वर्मा
Updated Tue, 20 May 2025 02:12 PM IST
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सार
प्रशासन और ग्रामीणों के बीच सोलर और विंड एनर्जी कंपनियों को लेकर चल रही नाराजगी के बीच सांसद उम्मेदाराम बेनीवाल ने जिला कलेक्टर टीना डाबी के पास शिकायत दर्ज कराई।
राजस्थान
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
जिले में सोलर और विंड एनर्जी कंपनियों की बढ़ती गतिविधियों के बीच स्थानीय ग्रामीणों की नाराजगी अब खुलकर सामने आने लगी है। जिला मुख्यालय पर आयोजित एक बैठक के दौरान सांसद उम्मेदाराम बेनीवाल ने जिला कलेक्टर टीना डाबी से इस मुद्दे पर शिकायत दर्ज कराई।
बेनीवाल ने कहा कि इन कंपनियों के साथ कई रिटायर्ड अधिकारी जुड़े हुए हैं, जो ग्रामीणों पर धौंस जमाते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कंपनियां प्रभावितों को उचित मुआवजा नहीं दे रही हैं, जबकि उपखंड अधिकारी जैसे प्रशासनिक अधिकारी कंपनियों का पक्ष ले रहे हैं और कंपनी के मुनीम की तरह व्यवहार कर रहे हैं। उन्होंने मांग की कि ऐसे अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए ताकि आम जनता के साथ अन्याय न हो।
सांसद के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए कलेक्टर टीना डाबी ने स्पष्ट किया कि प्रशासन की ओर से किसी भी प्रकार का पक्षपात नहीं किया गया है। हालांकि बैठक के दौरान कुछ ग्रामीणों ने भी अपनी आवाज उठाई और अधिकारियों पर सरकारी जमीन खाली नहीं करवाने और ग्रामीणों पर रौब झाड़ने का आरोप लगाया।
ये भी पढ़ें: Ajmer News: दरगाह क्षेत्र में बुर्का पहनकर घूम रहा था युवक, लोगों ने पकड़कर पुलिस को सौंपा, जांच जारी
गौरतलब है कि बाड़मेर और जैसलमेर जिलों में कई सौर और पवन ऊर्जा कंपनियां सक्रिय हैं। इन कंपनियों पर पहले भी आरोप लगते रहे हैं कि वे समय पर उचित मुआवजा नहीं देतीं और प्रशासनिक समर्थन के बल पर मनमाने ढंग से जमीन अधिग्रहण करती हैं। यह मुद्दा तब और गरमा गया जब 17 मई को शिव क्षेत्र के मनिहारी गांव का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। वीडियो में ग्रामीणों और पुलिस के बीच झड़प देखी गई, जिसमें एक महिला को हिरासत में लेते हुए दिखाया गया। इसके विरोध में शिव विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने थाने का घेराव किया और बड़ी संख्या में ग्रामीणों के साथ धरने पर बैठ गए।
बताया जा रहा है कि पुलिस ने हाईटेंशन लाइन के खंभे लगाने में बाधा डालने के आरोप में कुछ ग्रामीणों, जिनमें महिलाएं भी शामिल थीं, को हिरासत में लिया था। विधायक भाटी ने पुलिस पर निजी कंपनियों की मिलीभगत से किसानों के साथ दुर्व्यवहार करने और मुआवजा दिए बिना जमीन पर कब्जा करने का गंभीर आरोप लगाया।
ग्रामीणों की प्रमुख मांग है कि निजी कंपनियों की गतिविधियों को नियंत्रित किया जाए, सभी प्रभावितों को समय पर उचित मुआवजा मिले और प्रशासन पूरी तरह निष्पक्ष रूप से कार्य करे। अब यह देखना अहम होगा कि जिला प्रशासन इस विवाद को सुलझाने के लिए क्या ठोस कदम उठाता है।
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बेनीवाल ने कहा कि इन कंपनियों के साथ कई रिटायर्ड अधिकारी जुड़े हुए हैं, जो ग्रामीणों पर धौंस जमाते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कंपनियां प्रभावितों को उचित मुआवजा नहीं दे रही हैं, जबकि उपखंड अधिकारी जैसे प्रशासनिक अधिकारी कंपनियों का पक्ष ले रहे हैं और कंपनी के मुनीम की तरह व्यवहार कर रहे हैं। उन्होंने मांग की कि ऐसे अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए ताकि आम जनता के साथ अन्याय न हो।
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सांसद के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए कलेक्टर टीना डाबी ने स्पष्ट किया कि प्रशासन की ओर से किसी भी प्रकार का पक्षपात नहीं किया गया है। हालांकि बैठक के दौरान कुछ ग्रामीणों ने भी अपनी आवाज उठाई और अधिकारियों पर सरकारी जमीन खाली नहीं करवाने और ग्रामीणों पर रौब झाड़ने का आरोप लगाया।
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गौरतलब है कि बाड़मेर और जैसलमेर जिलों में कई सौर और पवन ऊर्जा कंपनियां सक्रिय हैं। इन कंपनियों पर पहले भी आरोप लगते रहे हैं कि वे समय पर उचित मुआवजा नहीं देतीं और प्रशासनिक समर्थन के बल पर मनमाने ढंग से जमीन अधिग्रहण करती हैं। यह मुद्दा तब और गरमा गया जब 17 मई को शिव क्षेत्र के मनिहारी गांव का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। वीडियो में ग्रामीणों और पुलिस के बीच झड़प देखी गई, जिसमें एक महिला को हिरासत में लेते हुए दिखाया गया। इसके विरोध में शिव विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने थाने का घेराव किया और बड़ी संख्या में ग्रामीणों के साथ धरने पर बैठ गए।
बताया जा रहा है कि पुलिस ने हाईटेंशन लाइन के खंभे लगाने में बाधा डालने के आरोप में कुछ ग्रामीणों, जिनमें महिलाएं भी शामिल थीं, को हिरासत में लिया था। विधायक भाटी ने पुलिस पर निजी कंपनियों की मिलीभगत से किसानों के साथ दुर्व्यवहार करने और मुआवजा दिए बिना जमीन पर कब्जा करने का गंभीर आरोप लगाया।
ग्रामीणों की प्रमुख मांग है कि निजी कंपनियों की गतिविधियों को नियंत्रित किया जाए, सभी प्रभावितों को समय पर उचित मुआवजा मिले और प्रशासन पूरी तरह निष्पक्ष रूप से कार्य करे। अब यह देखना अहम होगा कि जिला प्रशासन इस विवाद को सुलझाने के लिए क्या ठोस कदम उठाता है।