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Bharatpur: हीरा या कांच का टुकड़ा? बिहारीजी मंदिर के चढ़ावे पर बढ़ा विवाद, दानदाता परिवार ने लगाए गंभीर आरोप

Wed, 15 Jul 2026 03:57 PM IST
भरतपुर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भरतपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भरतपुर Published by: भरतपुर ब्यूरो Updated Wed, 15 Jul 2026 03:57 PM IST
सार

श्री बिहारीजी मंदिर में चढ़ाए गए 3.64 लाख रुपये के हीरे के गायब होने का आरोप लगाते हुए दानदाता परिवार ने जांच की मांग की है। परिवार का आरोप है कि प्रतिमा पर लगाया गया असली हीरा गायब है और उसकी जगह कांच का टुकड़ा लगा दिया गया है।

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Bharatpur Temple Row Dispute Erupts Over Donation Offering at Shri Bihari Ji Temple Rajasthan
श्री बांके बिहारी जी मंदिर, भरतपुर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

भरतपुर के प्रसिद्ध श्री बिहारीजी मंदिर में भगवान को चढ़ाए गए लाखों रुपये मूल्य के हीरे को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। शहर के एक ऑयल मिल व्यापारी परिवार ने आरोप लगाया है कि दिसंबर 2024 में भगवान बिहारीजी की प्रतिमा पर चढ़ाया गया 3.64 लाख रुपये का हीरा अब मूर्ति पर दिखाई नहीं दे रहा। परिवार का दावा है कि उसकी जगह कांच का टुकड़ा लगा हुआ है। वहीं देवस्थान विभाग का कहना है कि विशेषज्ञ जांच के बिना यह नहीं कहा जा सकता कि प्रतिमा पर लगा पत्थर हीरा है या कांच।

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परिवार का दावा- हीरे की चमक बदली
मामले में रंजीत नगर निवासी कृपाली बंसल ने बताया कि उनकी सास मीरा बंसल भगवान बिहारीजी की अनन्य श्रद्धालु हैं। उनकी इच्छा पर दिसंबर 2024 में दिल्ली के करोल बाग स्थित एक ज्वेलर्स से 3 लाख 64 हजार रुपये का हीरा खरीदा गया। इसके बाद तत्कालीन पुजारी मनोज भारद्वाज को हीरा सौंपा गया, जिसे भगवान बिहारीजी की प्रतिमा पर नाक के नीचे लौंग के रूप में जड़वाया गया।
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कृपाली के अनुसार करीब छह महीने बाद श्रद्धालुओं और परिचितों ने बताया कि प्रतिमा पर लगा हीरा पहले जैसी चमक नहीं दे रहा। जब परिवार ने स्वयं जाकर देखा तो उन्हें संदेह हुआ कि प्रतिमा पर लगा पत्थर उनका चढ़ाया गया हीरा नहीं है।
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दान की रसीद नहीं मिलने का आरोप
परिवार का आरोप है कि हीरा दान करने के बाद उन्होंने कई बार देवस्थान विभाग से दान की रसीद मांगी लेकिन आज तक उन्हें कोई रसीद उपलब्ध नहीं कराई गई। इसके बाद विभागीय अधिकारियों से भी संपर्क किया गया लेकिन संतोषजनक जवाब नहीं मिला। मामले की निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर परिवार ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, भरतपुर विधायक सुभाष गर्ग और देवस्थान विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को लिखित शिकायत भेजी है। परिवार का कहना है कि उनके पास हीरे का खरीद बिल, प्रमाण पत्र और यूनिक आईडी नंबर मौजूद है, इसलिए प्रतिमा पर लगे पत्थर की विशेषज्ञों से जांच कराई जानी चाहिए।

कृपाली बंसल का आरोप है कि शिकायत के बाद देवस्थान विभाग के दो कर्मचारी उनके घर पहुंचे और मामले को शांत करने का प्रयास किया। परिवार का कहना है कि उन्होंने केवल हीरे की जांच कराने की मांग की थी लेकिन अब विभाग की ओर से यह कहा जा रहा है कि संभव है उन्होंने हीरा नहीं, बल्कि कांच का टुकड़ा चढ़ाया हो। परिवार का कहना है कि यदि विभाग को दान किए गए पत्थर पर संदेह था तो दान स्वीकार करते समय उसकी जांच करानी चाहिए थी। बिना किसी जांच के उसे कांच बताना उचित नहीं है।

परिवार ने इस मामले को लेकर अभी तक पुलिस में कोई शिकायत दर्ज नहीं कराई है। उनका कहना है कि उनका उद्देश्य किसी पर आरोप लगाना नहीं, बल्कि प्रतिमा पर लगे पत्थर की वैज्ञानिक जांच कराकर सच्चाई सामने लाना है।


देवस्थान विभाग ने क्या कहा?
देवस्थान विभाग के आयुक्त मुकेश मीणा ने कहा कि जब हीरा दान किया गया था, उस समय उनकी वहां तैनाती नहीं थी। इसलिए उस समय की प्रक्रिया और दान रसीद के संबंध में वे टिप्पणी नहीं कर सकते।

उन्होंने बताया कि विभागीय रिकॉर्ड में हीरा दान किए जाने की तारीख 15 नवंबर 2024 दर्ज है, जबकि परिवार 10 दिसंबर 2024 को हीरा चढ़ाने का दावा कर रहा है। आयुक्त ने कहा कि फिलहाल यह सत्यापित नहीं हुआ है कि प्रतिमा पर लगा पत्थर हीरा है या कांच। मामले की जांच के लिए समिति गठित की गई है और जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी।

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