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Rajasthan: प्रसूताओं की पीड़ा पर स्वास्थ्य मंत्री के बिगड़े बोल, बोले- 'पैदल नाचते हुए आई थीं या बीमार होकर?'
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बीकानेर
Published by: बीकानेर ब्यूरो
Updated Thu, 11 Jun 2026 08:28 PM IST
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सार
बीकानेर के पीबीएम अस्पताल में प्रसूताओं की किडनी प्रभावित होने के मामले पर सफाई देने पहुंचे चिकित्सा मंत्री गजेन्द्र सिंह खींवसर का एक बयान विवादों के घेरे में आ गया है। महिलाओं की हालत को लेकर पूछे गए सवाल पर उनकी टिप्पणी ने हलचल मचा दी है।
स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर के बिगड़े बोल
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
पीबीएम अस्पताल में प्रसूताओं की किडनी प्रभावित होने के मामले को लेकर उठ रहे सवालों के बीच चिकित्सा एवं जिला प्रभारी मंत्री गजेन्द्र सिंह खींवसर के एक विवादित बयान ने हलचल मचा दी है। अस्पताल में भर्ती महिलाओं की हालत और उपचार व्यवस्था को लेकर पूछे गए सवाल के जवाब में मंत्री की टिप्पणी ने नए विवाद को जन्म दे दिया।
मंगलवार को पीबीएम अस्पताल पहुंचे मंत्री खींवसर ने अस्पताल प्रशासन और चिकित्सकों से पूरे मामले की जानकारी ली। इसके बाद आयोजित पत्रकार वार्ता में जब मीडिया ने एक साथ कई प्रसूताओं की तबीयत बिगड़ने और संभावित लापरवाही को लेकर सवाल किया, तो मंत्री ने सीधे जवाब देने के बजाय मेडिकल कॉलेज प्राचार्य डॉ. सुरेन्द्र वर्मा की ओर देखते हुए कहा- बताइए प्रिंसिपल साहब, गर्भवती महिलाएं गंभीर हालत में आई थीं या नाचते हुए आई थीं।
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मंत्री की इस टिप्पणी के बाद प्रेस वार्ता का माहौल बदल गया। प्रसव पीड़ा और गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रही महिलाओं को लेकर दिए गए इस बयान को लेकर सवाल उठने लगे। पत्रकारों ने जब मंत्री से इस टिप्पणी पर स्पष्टीकरण मांगा तो उन्होंने मामले की विस्तृत जानकारी देने की जिम्मेदारी मेडिकल कॉलेज प्रशासन पर छोड़ दी।
प्रेस वार्ता के दौरान मंत्री ने कहा कि संबंधित महिलाएं पहले से गंभीर स्थिति में विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रों से रैफर होकर पीबीएम अस्पताल पहुंची थीं। उन्होंने दावा किया कि अस्पताल में समय पर उपचार मिलने के कारण उनकी जान बचाई जा सकी। हालांकि लगातार पूछे गए सवालों के बीच मंत्री कुछ असहज नजर आए और थोड़ी देर बाद पत्रकार वार्ता समाप्त कर रवाना हो गए।
गौरतलब है कि पीबीएम अस्पताल के जनाना विभाग में सिजेरियन डिलीवरी के बाद कई प्रसूताओं की किडनी प्रभावित होने का मामला सामने आने के बाद प्रदेशभर में चिंता बढ़ गई थी। सभी महिलाओं का उपचार आईसीयू में किया जा रहा है और कुछ मरीजों को डायलिसिस पर भी रखा गया है। मामले की जांच के लिए विशेषज्ञ टीम गठित की गई है। फिलहाल जांच रिपोर्ट का इंतजार है, लेकिन चिकित्सा व्यवस्था से जुड़े इस संवेदनशील मामले में मंत्री की टिप्पणी अब राजनीतिक और सामाजिक चर्चा का विषय बन गई है।
मंगलवार को पीबीएम अस्पताल पहुंचे मंत्री खींवसर ने अस्पताल प्रशासन और चिकित्सकों से पूरे मामले की जानकारी ली। इसके बाद आयोजित पत्रकार वार्ता में जब मीडिया ने एक साथ कई प्रसूताओं की तबीयत बिगड़ने और संभावित लापरवाही को लेकर सवाल किया, तो मंत्री ने सीधे जवाब देने के बजाय मेडिकल कॉलेज प्राचार्य डॉ. सुरेन्द्र वर्मा की ओर देखते हुए कहा- बताइए प्रिंसिपल साहब, गर्भवती महिलाएं गंभीर हालत में आई थीं या नाचते हुए आई थीं।
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मंत्री की इस टिप्पणी के बाद प्रेस वार्ता का माहौल बदल गया। प्रसव पीड़ा और गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रही महिलाओं को लेकर दिए गए इस बयान को लेकर सवाल उठने लगे। पत्रकारों ने जब मंत्री से इस टिप्पणी पर स्पष्टीकरण मांगा तो उन्होंने मामले की विस्तृत जानकारी देने की जिम्मेदारी मेडिकल कॉलेज प्रशासन पर छोड़ दी।
प्रेस वार्ता के दौरान मंत्री ने कहा कि संबंधित महिलाएं पहले से गंभीर स्थिति में विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रों से रैफर होकर पीबीएम अस्पताल पहुंची थीं। उन्होंने दावा किया कि अस्पताल में समय पर उपचार मिलने के कारण उनकी जान बचाई जा सकी। हालांकि लगातार पूछे गए सवालों के बीच मंत्री कुछ असहज नजर आए और थोड़ी देर बाद पत्रकार वार्ता समाप्त कर रवाना हो गए।
गौरतलब है कि पीबीएम अस्पताल के जनाना विभाग में सिजेरियन डिलीवरी के बाद कई प्रसूताओं की किडनी प्रभावित होने का मामला सामने आने के बाद प्रदेशभर में चिंता बढ़ गई थी। सभी महिलाओं का उपचार आईसीयू में किया जा रहा है और कुछ मरीजों को डायलिसिस पर भी रखा गया है। मामले की जांच के लिए विशेषज्ञ टीम गठित की गई है। फिलहाल जांच रिपोर्ट का इंतजार है, लेकिन चिकित्सा व्यवस्था से जुड़े इस संवेदनशील मामले में मंत्री की टिप्पणी अब राजनीतिक और सामाजिक चर्चा का विषय बन गई है।