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रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व: टेरिटरी के संघर्ष में मारा गया एक बाघ, 27 दिन पहले ही एंक्लोजर से बाहर निकाला था

न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, बूंदी Published by: बूँदी ब्यूरो Updated Fri, 31 Jan 2025 07:28 PM IST
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सार

रामगढ़ टाइगर रिजर्व में बाघ आरवीटी-4 की मौत ने एक बार फिर पर्यटन विकास के आस को गहरा आघात पहुंचाया है। रणथंभौर से लाए बाघ से हुई वर्चस्व की लड़ाई में जान जाना माना जा रहा है।

Ramgarh Vishdhari Tiger Reserve tiger killed territorial conflict was taken out of enclosure only 27 days ago
बाघ - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

बूंदी के रामगढ़ वन्य जीव अभ्यारण्य क्षेत्र में टाइगर आरटीवी-4 की संदिग्ध अवस्था में मौत से एक बार फिर बूंदी के पर्यटन विकास की आस को गहरा झटका लगा है। रणथंभौर से लाए टाइगर व सरिस्का से आए टाइगर के बीच हुई फाइटिंग में मौत होना माना जा रहा है। वहीं, आरटीवी की मौत से वन्य जीव एवं पर्यटन प्रेमियों सहित स्थानीय जनप्रतिनिधियों में गहरा रोष है। 

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उपवन संरक्षक वन्य जीव अरविंद झा ने बताया कि बूंदी के रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व में सरिस्का से लाए गए बाघ आरवीटी-4 की मौत की खबर है।विभाग की टीम को बाघ का शव जंगल में पड़ा मिला। इस बाघ को सरिस्का टाइगर रिजर्व से 11 नवंबर को रामगढ़ टाइगर रिजर्व लाया गया था। 27 दिन पहले उसे एनक्लोजर से निकालकर जंगल में छोड़ा गया। बाघ आरवीटी-4 तीन साल का युवा नर बाघ था, काफी तंदरुस्त था। अभी बाघ की मौत के कारणों का खुलासा नहीं हो पाया है, पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही बाघ की मौत के कारणों का पता लग पाएगा।
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जनप्रतिनिधियों ने जताया रोष
बूंदी भाजपा अध्यक्ष राजकुमार श्रृंगी ने उपवन संरक्षक वन्य जीव अरविंद झा से दूरभाष पर वार्ता कर रोष जाहिर किया। शहर अध्यक्ष श्रृंगी ने कहा कि टाइगर की निरंतर दूसरी मौत बूंदी के पर्यटन की प्रगति में लगे पंखों में अवरोध पैदा होगा। गंभीरता से इस घटना को लेते हुए शहर अध्यक्ष ने कहा कि इस संबंध में गहनता से जांच कराई जाकर संबंधित के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाना चाहिए श्रृंगी ने कहा कि वन्य जीव अभ्यारण्य क्षेत्र में सैकड़ों वन कर्मी वन्यजीवों के ट्रैकिंग एवं सुरक्षा हेतु नियुक्त होने के बावजूद इस प्रकार की घटना होना वन विभाग की कार्यशैली को संदेह के घेरे में है साथ ही सरकार की पर्यटन को बढ़ावा देने की योजना अवरुद्ध होती है।

वार्ता के दौरान वन संरक्षक ने उनसे पूछने पर बताया कि बूंदी अभयारण्य क्षेत्र में विचरण कर रहे टाइगर्स में से केवल एकमात्र टाइगर जिसकी मौत हो गई। उसी के गले में कॉलर माइक लगा हुआ था शेष में लगा हुआ नहीं है। इस पर भी शहर अध्यक्ष ने रोष जाहिर किया और कहा कि जब राज्य सरकार और वन एवं पर्यावरण मंत्रालय के नियमानुसार सभी टाइगर्स के कॉलर माइक लगा होना चाहिए। इसके बावजूद अन्य टाइगर्स के कॉलर माइक क्यों नहीं लगा हुआ है और इसी कारण टाइगर्स की  मायन्यूट ट्रैकिंग नहीं हो पा रही है, जिसके कारण आने वाले समय में भी इस प्रकार की दुखद घटनाओं की संभावनाओं से इनकार नहीं किया जा सकता। शहर अध्यक्ष ने यह भी कहा कि यह क्षेत्र माननीय लोकसभा अध्यक्ष का है और वह पर्यटन को गतिमान बढ़ावा देना चाहते हैं, जिसमें इस प्रकार के अवरोध को बर्दाश्त नहीं किया जा सकेगा।

रणथम्भौर से आए बाघ से वर्चस्व की लड़ाई में गई जान
रामगढ़ टाइगर रिजर्व में बाघ की मौत के पीछे वर्चस्व की लड़ाई को कारण माना जा रहा है। बताया जा रहा है कि बाघ आरवीटी-4 की रणथम्भौर टाइगर रिजर्व से चलकर आए बाघ से भिड़ंत हुई। रणथम्भौर से आया बाघ भी रामगढ़ टाइगर रिजर्व में टेरिटरी बना रहा है, वहीं आरवीटी4 भी टेरिटोरियल बना रहा था। इसी दौरान क्षेत्राधिकार के वर्चस्व को लेकर दोनों के बीच फाइट हो गई, जिसमें आरवीटी-4 की मौत हो गई।

छह महीने में हुई दो बाघों की मौत
रामगढ़ टाइगर रिजर्व में पिछले छह महीने बाघ की मौत का यह दूसरा मामला है। इससे पहले 15 सितंबर को जंगल में बाघिन आरवीटी-2 का शव मिला था। बाद में बताया गया कि बाघिन की नेचुरली डेथ हुई। मगर अब फिर से रामगढ़ टाइगर रिजर्व में बाघ की मौत हुई है। जिसके बाद रामगढ़ टाइगर रिजर्व में बाघों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठ रहे हैं। वन्यजीव प्रेमी भी बाघ की मौत पर दुख जताते हुए बाघों की सुरक्षा को और पुख्ता करने की बात कह रहे हैं।

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