Rajasthan Assembly: विधानसभा कार्यक्रम में राज्यपाल के सियासी तंज, टीकाराम जूली को लेकर कही मजाकिया बात
राजस्थान विधानसभा के कार्यक्रम में राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े ने नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली पर हल्के अंदाज में सियासी तंज कसा। उन्होंने विश्वविद्यालयों की स्थिति और युवाओं में यूपीएससी-आरपीएससी जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रति घटती रुचि पर भी चिंता जताई।
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राजस्थान विधानसभा में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े ने अपने संबोधन में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली को लेकर हल्के-फुल्के अंदाज में राजनीतिक टिप्पणी की। राज्यपाल की टिप्पणी पर सदन में मौजूद विधायक ठहाके लगाते नजर आए।
राज्यपाल ने राजस्थान के पहले निर्वाचित मुख्यमंत्री टीकाराम पालीवाल का जिक्र करते हुए कहा कि जब उन्होंने “टीकाराम” नाम सुना तो उन्हें लगा नहीं था कि बात नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली की हो रही है, क्योंकि उनकी उम्र अभी कम है। उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा कि “टीकाराम पालीवाल मुख्यमंत्री रहे थे, बाद में दूसरे टीकाराम होंगे या नहीं, यह मुझे नहीं मालूम। आगे बहुत नंबर हैं, इनका नंबर कब आएगा, पता नहीं। मुख्यमंत्री बनने वाले लगते भी नहीं हैं।”
हालांकि, अपनी टिप्पणी के बाद राज्यपाल ने यह भी स्पष्ट किया कि वह टीकाराम जूली के बारे में व्यक्तिगत टिप्पणी नहीं कर रहे, बल्कि सामान्य राजनीतिक संदर्भ दे रहे हैं।
“प्रतिपक्ष का भरोसा नहीं रहता”
राज्यपाल बागड़े ने महाराष्ट्र विधानसभा अध्यक्ष रहते हुए अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि राजनीति में प्रतिपक्ष का भरोसा भी स्थायी नहीं होता। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में उनके कार्यकाल के दौरान दो नेता प्रतिपक्ष इस्तीफा देकर सत्ताधारी दल में शामिल हो गए और बाद में मंत्री भी बने। इस टिप्पणी पर भी सदन में मौजूद जनप्रतिनिधियों के बीच हंसी का माहौल बन गया।
“विधानसभा अध्यक्ष का सबसे बड़ा काम- नीचे बैठ जाओ कहना”
कार्यक्रम के दौरान राज्यपाल ने विधानसभा अध्यक्ष की भूमिका पर भी रोचक अंदाज में टिप्पणी की। उन्होंने बताया कि जब वह महाराष्ट्र विधानसभा अध्यक्ष बने और अपने गांव गए तो दोस्तों ने उनसे पूछा कि अध्यक्ष का सबसे महत्वपूर्ण काम क्या होता है। इस पर उन्होंने जवाब दिया कि “सबसे बड़ा काम विधायकों को नीचे बैठने के लिए कहना होता है।”
विश्वविद्यालयों की स्थिति पर जताई चिंता
राज्यपाल ने अपने संबोधन में राजस्थान के विश्वविद्यालयों की स्थिति को लेकर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि राज्य में कई विश्वविद्यालय केवल नाम मात्र के रह गए हैं, जहां वर्षों से एक भी छात्र का प्रवेश नहीं हुआ। इसके बावजूद वहां कुलपति, रजिस्ट्रार और प्रशासनिक ढांचा बना हुआ है।
उन्होंने कहा कि एक विश्वविद्यालय को विभाजित कर कई नए विश्वविद्यालय बना दिए गए, जिससे संसाधन और आय बंट गई। इसका असर विश्वविद्यालयों के प्रबंधन और वित्तीय स्थिति पर पड़ा है।
“गोल्ड मेडलिस्ट भी प्रतियोगी परीक्षाओं से दूरी बना रहे”
राज्यपाल ने उच्च शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि कई दीक्षांत समारोहों में गोल्ड मेडलिस्ट और टॉपर छात्रों से जब उन्होंने यूपीएससी और आरपीएससी जैसी परीक्षाओं के बारे में पूछा तो अधिकांश छात्रों ने रुचि नहीं दिखाई। उनके मुताबिक छात्रों को लगता है कि वे इन परीक्षाओं में सफल नहीं हो पाएंगे, जिसका मुख्य कारण शिक्षा की बुनियादी गुणवत्ता का कमजोर होना है।