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किडनी फेल होने से एक और मौत: कोटा में नहीं थम रहा प्रसूता की मौतों का सिलसिला; अब तक पांच हुई मौत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोटा
Published by: कोटा ब्यूरो
Updated Sun, 17 May 2026 07:00 PM IST
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सार
कोटा के न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल में छह माह की गर्भवती महिला शिरीन की किडनी फेलियर और संक्रमण के कारण मौत हो गई। परिजनों ने अस्पताल पर लापरवाही का आरोप लगाया है। यह हाल के दिनों में प्रसूताओं की पांचवीं मौत है, जिससे स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।
न्यू मेडिकल में एक और प्रसूता की हुई मौत
- फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
कोटा जिले में प्रसूताओं की मौत का सिलसिला थमता नजर नहीं आ रहा है। न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल में रविवार को एक और गर्भवती महिला की इलाज के दौरान मौत हो गई। मृतका की पहचान शिवपुर निवासी शिरीन के रूप में हुई है, जो करीब छह माह की गर्भवती थी। किडनी फेलियर और संक्रमण फैलने के कारण उसकी हालत लगातार गंभीर बनी हुई थी। इस मौत के बाद अब न्यू मेडिकल कॉलेज में प्रसूताओं की मौत का आंकड़ा पांच तक पहुंच गया है, जिससे चिकित्सा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं।
निजी अस्पताल से मेडिकल कॉलेज किया गया था रेफर
परिजनों के अनुसार शिरीन को 5 मई को तबीयत बिगड़ने पर न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती कराया गया था। जांच के दौरान चिकित्सकों ने बच्चेदानी का मुंह खुला पाया, जिसके बाद टांके लगाए गए और उसे वार्ड में भर्ती कर लिया गया। परिवार का आरोप है कि सात मई को अचानक उसकी तबीयत ज्यादा खराब होने लगी। शरीर से लगातार रक्तस्राव हो रहा था, लेकिन अस्पताल स्टाफ ने स्थिति को गंभीरता से नहीं लिया। धीरे-धीरे उसका ब्लड प्रेशर और प्लेटलेट्स गिरने लगे।
डायलिसिस के बाद भी नहीं बच सकी जान
हालत बिगड़ने पर परिजन उसे 7 मई को निजी अस्पताल लेकर गए, जहां 8 मई को उसका डायलिसिस किया गया। हालांकि संक्रमण तेजी से शरीर में फैलता गया। इसके बाद 16 मई को उसे दोबारा न्यू मेडिकल कॉलेज के नेफ्रोलॉजी विभाग में रेफर किया गया। इलाज के दौरान रविवार को शिरीन ने दम तोड़ दिया। परिजनों ने शव का पोस्टमार्टम कराने से इनकार कर दिया। घटना के बाद परिवार में शोक का माहौल है।
परिजनों ने लगाए लापरवाही के आरोप
मृतका के परिजनों ने अस्पताल प्रशासन पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि यदि समय रहते उचित इलाज और निगरानी मिल जाती, तो शिरीन की जान बचाई जा सकती थी। परिवार का आरोप है कि शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज किया गया, जिसके कारण संक्रमण बढ़ता चला गया और आखिरकार उसकी किडनी फेल हो गई।
ये भी पढ़ें- रात को पत्नी से झगड़े के बाद घर से निकले भाजपा नेता; सुबह पेड़ से लटका मिला शव, शरीर पर मिले चोट के निशान
लगातार मौतों से बढ़ी चिंता
न्यू मेडिकल कॉलेज में लगातार प्रसूताओं की मौत के मामलों ने चिकित्सा विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। हाल के दिनों में यह पांचवीं प्रसूता की मौत है, जिसके बाद अस्पताल प्रबंधन और स्वास्थ्य विभाग की व्यवस्थाओं को लेकर लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। फिलहाल प्रशासन की ओर से मामले को लेकर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन लगातार सामने आ रहे मामलों ने अस्पताल की व्यवस्थाओं पर गंभीर बहस छेड़ दी है।
निजी अस्पताल से मेडिकल कॉलेज किया गया था रेफर
परिजनों के अनुसार शिरीन को 5 मई को तबीयत बिगड़ने पर न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती कराया गया था। जांच के दौरान चिकित्सकों ने बच्चेदानी का मुंह खुला पाया, जिसके बाद टांके लगाए गए और उसे वार्ड में भर्ती कर लिया गया। परिवार का आरोप है कि सात मई को अचानक उसकी तबीयत ज्यादा खराब होने लगी। शरीर से लगातार रक्तस्राव हो रहा था, लेकिन अस्पताल स्टाफ ने स्थिति को गंभीरता से नहीं लिया। धीरे-धीरे उसका ब्लड प्रेशर और प्लेटलेट्स गिरने लगे।
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डायलिसिस के बाद भी नहीं बच सकी जान
हालत बिगड़ने पर परिजन उसे 7 मई को निजी अस्पताल लेकर गए, जहां 8 मई को उसका डायलिसिस किया गया। हालांकि संक्रमण तेजी से शरीर में फैलता गया। इसके बाद 16 मई को उसे दोबारा न्यू मेडिकल कॉलेज के नेफ्रोलॉजी विभाग में रेफर किया गया। इलाज के दौरान रविवार को शिरीन ने दम तोड़ दिया। परिजनों ने शव का पोस्टमार्टम कराने से इनकार कर दिया। घटना के बाद परिवार में शोक का माहौल है।
परिजनों ने लगाए लापरवाही के आरोप
मृतका के परिजनों ने अस्पताल प्रशासन पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि यदि समय रहते उचित इलाज और निगरानी मिल जाती, तो शिरीन की जान बचाई जा सकती थी। परिवार का आरोप है कि शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज किया गया, जिसके कारण संक्रमण बढ़ता चला गया और आखिरकार उसकी किडनी फेल हो गई।
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लगातार मौतों से बढ़ी चिंता
न्यू मेडिकल कॉलेज में लगातार प्रसूताओं की मौत के मामलों ने चिकित्सा विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। हाल के दिनों में यह पांचवीं प्रसूता की मौत है, जिसके बाद अस्पताल प्रबंधन और स्वास्थ्य विभाग की व्यवस्थाओं को लेकर लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। फिलहाल प्रशासन की ओर से मामले को लेकर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन लगातार सामने आ रहे मामलों ने अस्पताल की व्यवस्थाओं पर गंभीर बहस छेड़ दी है।