सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Rajasthan ›   Kota News ›   Nearly 10 days after the death of pregnant women in the hospital, the Health Minister reached Kota.

Kota News: चार प्रसूताओं की मौत व किडनी फेल के मामले ने पकड़ा तूल, दस दिन बाद चिकित्सा मंत्री पहुंचे अस्पताल

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोटा Published by: कोटा ब्यूरो Updated Thu, 14 May 2026 07:35 PM IST
विज्ञापन
सार

कोटा के न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल में चार प्रसूताओं की मौत और कुछ महिलाओं के किडनी फेल होने के मामले ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना के 10 दिन बाद चिकित्सा मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर अस्पताल पहुंचे और पूरे मामले की जांच का भरोसा दिलाया।

Nearly 10 days after the death of pregnant women in the hospital, the Health Minister reached Kota.
चिकित्सा मंत्री ने किया न्यू मेडिकल कॉलेज का निरीक्षण।
विज्ञापन

विस्तार

कोटा के न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल में चार प्रसूताओं की मौत और कुछ अन्य प्रसूताओं के किडनी फेल होने के मामले ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना के करीब 10 दिन बाद गुरुवार को चिकित्सा मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर अचानक कोटा पहुंचे और अस्पताल का निरीक्षण किया।

निरीक्षण के दौरान मंत्री ने वार्ड में भर्ती प्रसूताओं के परिजनों से मुलाकात कर उनका हाल जाना। साथ ही चिकित्सा विभाग के अधिकारियों से भी मामले की जानकारी ली। हालांकि, कुछ परिजनों ने आरोप लगाया कि मंत्री ने उनकी बात पूरी तरह नहीं सुनी।

विज्ञापन
विज्ञापन

'जो भी दोषी पाया जाएगा, उसे बख्शा नहीं जाएगा'
मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने कहा कि प्रदेश सरकार इस घटना से बेहद दुखी है और मृत प्रसूताओं को श्रद्धांजलि अर्पित करती है। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री के निर्देश पर मामले में लापरवाही बरतने वाले चिकित्सकों और नर्सिंग स्टाफ के खिलाफ कार्रवाई की गई है। उन्होंने कहा कि जांच अभी जारी है और जो भी दोषी पाया जाएगा, उसे बख्शा नहीं जाएगा।

विज्ञापन

मंत्री ने बताया कि एक प्रसूता की हालत अधिक गंभीर होने पर उसे एयर एंबुलेंस से दूसरे अस्पताल भेजने की तैयारी भी की गई थी, लेकिन परिजनों ने इसके लिए सहमति नहीं दी। घटना के तुरंत बाद विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम कोटा भेजी गई थी, जिसने मामले की प्रारंभिक जांच की है।

सिजेरियन के बाद मौत की वजह पर जांच
मंत्री खींवसर ने कहा कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जा रही है। उन्होंने कहा कि विभाग के कर्मचारियों को घबराने की जरूरत नहीं है। कुछ कर्मचारियों को कार्रवाई का डर है, लेकिन सरकार निष्पक्ष तरीके से जांच कर रही है।

उन्होंने बताया कि सरकारी अस्पतालों में सप्लाई होने वाली लगभग 80 प्रतिशत दवाइयों की सैंपलिंग के बाद ही उन्हें उपयोग में लिया जाता है, जबकि बाहर से ली जा रही 20 प्रतिशत दवाओं की भी जांच कराई जा रही है। मंत्री ने कहा कि सबसे बड़ा सवाल यह है कि प्रसूताओं की सिजेरियन डिलीवरी के बाद मौत क्यों हुई। सरकार इसी बिंदु पर गंभीरता से जांच कर रही है।

ये भी पढ़ें- Rajasthan: पाकिस्तानी आतंकी नेटवर्क पर एटीएस का बड़ा एक्शन, 20 जिलों में छापेमारी; 60 संदिग्धों से की पूछताछ

एम्स की टीम करेगी जांच
मंत्री ने कहा कि इस घटना को लेकर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने भी चिंता जताई है। वे स्वयं अस्पताल पहुंचकर स्थिति का जायजा ले चुके हैं। अब एक-दो दिन में एम्स की विशेषज्ञ टीम भी कोटा पहुंचेगी। यह टीम पूरे मामले की अलग से जांच करेगी। यह पता लगाने का प्रयास करेगी कि प्रसूताओं की मौत के पीछे वास्तविक कारण क्या थे। उन्होंने कहा कि विस्तृत रिपोर्ट आने के बाद ही जांच सही दिशा में आगे बढ़ पाएगी।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

एप में पढ़ें

Followed