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Kota News: प्रसूताओं की मौत के मामले में जांच तेज, एम्स टीम ने खंगाले रिकॉर्ड, लेबर रूम और वार्डों का निरीक्षण
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोटा
Published by: कोटा ब्यूरो
Updated Sat, 16 May 2026 06:20 PM IST
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सार
कोटा मेडिकल कॉलेज में प्रसूताओं की मौत के बाद एम्स की सात सदस्यीय टीम ने अस्पताल पहुंचकर जांच शुरू कर दी है। टीम ने अस्पताल के लेबर रूम और अन्य वार्डों का निरीक्षण कर रिकॉर्ड खंगाले।
एम्स की टीम ने अस्पताल का दौरा किया
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
जिले में न्यू मेडिकल कॉलेज में चार प्रसूताओं की मौत के मामले में अब जांच तेज हो गई है। मामले की जांच के लिए दिल्ली और जोधपुर एम्स की सात सदस्यीय टीम शुक्रवार को कोटा पहुंची। एम्स की गायनिक विशेषज्ञ डॉ. रीता माहे के नेतृत्व में टीम ने जेके लोन अस्पताल के लेबर रूम और अन्य वार्डों का बारीकी से निरीक्षण किया। इस दौरान अस्पताल अधीक्षक डॉ. निर्मला शर्मा सहित अन्य चिकित्सक भी मौजूद रहे। हालांकि जांच टीम ने मीडिया से दूरी बनाए रखी और कहा कि जांच रिपोर्ट वरिष्ठ अधिकारियों को सौंपी जाएगी।
जेके लोन अस्पताल की अधीक्षक डॉ. निर्मला शर्मा ने बताया कि टीम ने लेबर रूम सहित अन्य वार्डों का निरीक्षण किया और नर्सिंग रिकॉर्ड की जांच की। टीम कई रिकॉर्ड अपने साथ भी लेकर गई है, जिनकी विस्तृत जांच के बाद रिपोर्ट तैयार की जाएगी।
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उन्होंने बताया कि जिन महिला मरीजों की हालत पहले गंभीर थी, उनमें अब काफी सुधार है। टीम ने मरीजों की अस्पताल में एंट्री से लेकर डिस्चार्ज तक के सभी रिकॉर्ड और उपचार प्रक्रिया की जानकारी ली। साथ ही विभिन्न विभागों से मरीजों की स्वास्थ्य स्थिति को लेकर भी चर्चा की गई।
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अस्पताल प्रशासन ने टीम को बताया कि जिन प्रसूताओं की मौत हुई, उनकी हालत अस्पताल पहुंचने के समय से ही गंभीर थी और चिकित्सकों ने उन्हें बचाने का पूरा प्रयास किया था, वहीं अन्य भर्ती प्रसूताओं की स्थिति में अब लगातार सुधार हो रहा है।
घटना के बाद सिजेरियन डिलीवरी में आई कमी
अस्पताल अधीक्षक ने बताया कि घटना के बाद प्रसूताओं और उनके परिजनों में डर का माहौल बन गया था। ऐसे में अस्पताल की टीम लगातार मरीजों और परिजनों को समझाने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि घटना के बाद भी कई प्रसूताओं की सामान्य डिलीवरी सफलतापूर्वक कराई गई है। हमारा प्रयास है कि अस्पताल आने वाली हर महिला पूरी तरह स्वस्थ होकर घर लौटे।
डॉ. निर्मला शर्मा ने यह भी स्वीकार किया कि पहले की तुलना में सिजेरियन डिलीवरी में करीब 50 प्रतिशत की कमी आई है। इसके साथ ही अस्पताल के आउटडोर में आने वाली महिला मरीजों की संख्या में भी गिरावट दर्ज की गई है। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि मरीजों को बेहतर उपचार देने और उनके मन में बनी भ्रांतियों को दूर करने के प्रयास लगातार जारी हैं।