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पीबीएम अस्पताल में बवाल: प्रसूता की मौत के बाद मोर्चरी के बाहर मृतका के पति ने छिड़का पेट्रोल, मचा हड़कंप
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बीकानेर
Published by: बीकानेर ब्यूरो
Updated Wed, 24 Jun 2026 08:10 AM IST
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सार
बीकानेर के पीबीएम अस्पताल में प्रसूता शारदा नायक की मौत के बाद विवाद गहरा गया। पोस्टमार्टम को लेकर चल रहे विवाद के बीच मृतका के पति मुकेश नायक ने मोर्चरी के बाहर खुद पर पेट्रोल छिड़क लिया। लोगों की सतर्कता से बड़ा हादसा टल गया। मामला अब राजनीतिक रंग भी ले चुका है।
मृतका के पति ने छिड़का पेट्रोल
- फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
बीकानेर के पीबीएम अस्पताल में प्रसूता शारदा नायक की मौत के बाद शुरू हुआ विवाद मंगलवार को उस समय और गहरा गया, जब मृतका के पति ने मोर्चरी के बाहर खुद पर पेट्रोल छिड़क लिया। अचानक हुई इस घटना से मौके पर मौजूद लोगों और पुलिसकर्मियों में हड़कंप मच गया। हालांकि आसपास मौजूद लोगों की सतर्कता के चलते समय रहते उसके हाथ से पेट्रोल की बोतल छीन ली गई और एक बड़ा हादसा टल गया।
जानकारी के अनुसार, प्रसूता शारदा नायक की मौत के बाद परिजन लगातार कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। इसी बीच मोर्चरी के बाहर मौजूद मृतका के पति मुकेश नायक ने आरोप लगाया कि प्रशासन और पुलिस उस पर पोस्टमार्टम के लिए सहमति देने का दबाव बना रहे हैं।
पुलिस ने जबरन कराए हस्ताक्षर
मुकेश नायक का कहना है कि उसके माता-पिता को पुलिस अपने साथ ले गई और उस पर जबरन हस्ताक्षर करवाने की कोशिश की गई। उसने कुछ अधिकारियों पर भी मानसिक दबाव बनाने के आरोप लगाए। इन आरोपों के बीच उसने विरोध स्वरूप अपने ऊपर पेट्रोल छिड़क लिया, जिससे मौके पर अफरा-तफरी मच गई।
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मोर्चुरी परिसर में तनावपूर्ण माहौल हुआ
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी सक्रिय हुए। अधिकारियों ने मुकेश को समझाकर शांत कराया और स्थिति को नियंत्रण में लिया। इस दौरान मोर्चरी परिसर में तनावपूर्ण माहौल बना रहा। मामले ने राजनीतिक रंग भी ले लिया है। देहात कांग्रेस अध्यक्ष बिशनाराम सियाग ने आरोप लगाया कि परिवार पर लगातार दबाव बनाया जा रहा है ताकि पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी कराई जा सके। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की।
ये भी पढ़ें- Jaipur News: जयपुर में फिर बड़ा बुलडोजर एक्शन! नंदपुरी-जगतपुरा कॉरिडोर के लिए JDA का सर्वे शुरू
बुजुर्गों की सहमति से आवश्यक सहयोग किया जा रहा
वहीं, परिवार के ही सदस्य राजेश नायक ने अलग पक्ष रखते हुए कहा कि नवजात शिशु की तबीयत खराब है और उसका इलाज प्राथमिकता है। उन्होंने दावा किया कि प्रशासन किसी प्रकार का दबाव नहीं बना रहा, बल्कि परिवार के बुजुर्गों की सहमति से आवश्यक सहयोग किया जा रहा है।
गौरतलब, है कि पीबीएम अस्पताल में भर्ती शारदा नायक की 21 जून को मौत हो गई थी। इससे पहले 18 जून को प्रीति नायक नामक एक अन्य प्रसूता की भी मृत्यु हुई थी। प्रीति के परिजन पोस्टमार्टम के बाद अंतिम संस्कार कर चुके हैं, जबकि शारदा का शव तीन दिन बाद भी मोर्चरी में रखा हुआ है। परिजन कार्रवाई की मांग पर अड़े हुए हैं, जिसके चलते मामला लगातार चर्चा और विवाद का विषय बना हुआ है।
धरना समाप्त
इधर शारदा नायक की मौत को लेकर पिछले चार दिनों से जारी विरोध-प्रदर्शन आखिरकार समाप्त हो गया। जिला प्रशासन, परिजनों और कांग्रेस नेताओं के बीच हुई बातचीत के बाद सहमति बनी, जिसके चलते शव का पोस्टमार्टम कराने का रास्ता साफ हो गया है। प्रशासन की ओर से परिजनों को तत्काल राहत देने के लिए जनसहयोग से 25 लाख रुपए जुटाने का भरोसा दिया गया है। साथ ही राज्य सरकार को 50 लाख रुपए की अतिरिक्त आर्थिक सहायता स्वीकृत करने के लिए प्रस्ताव भेजने पर भी सहमति बनी है। परिवार के एक सदस्य को संविदा आधारित रोजगार उपलब्ध कराने का आश्वासन भी दिया गया है।
अतिरिक्त जिला कलेक्टर उम्मेददान रतनू ने बताया कि यदि परिजन लिखित शिकायत देते हैं तो पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी। जांच में किसी डॉक्टर, नर्सिंगकर्मी या अन्य कर्मचारी की लापरवाही सामने आने पर संबंधित के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। समझौते के बाद शारदा नायक के पोस्टमार्टम की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। पोस्टमार्टम के बाद अंतिम संस्कार किया जाएगा।
जानकारी के अनुसार, प्रसूता शारदा नायक की मौत के बाद परिजन लगातार कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। इसी बीच मोर्चरी के बाहर मौजूद मृतका के पति मुकेश नायक ने आरोप लगाया कि प्रशासन और पुलिस उस पर पोस्टमार्टम के लिए सहमति देने का दबाव बना रहे हैं।
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पुलिस ने जबरन कराए हस्ताक्षर
मुकेश नायक का कहना है कि उसके माता-पिता को पुलिस अपने साथ ले गई और उस पर जबरन हस्ताक्षर करवाने की कोशिश की गई। उसने कुछ अधिकारियों पर भी मानसिक दबाव बनाने के आरोप लगाए। इन आरोपों के बीच उसने विरोध स्वरूप अपने ऊपर पेट्रोल छिड़क लिया, जिससे मौके पर अफरा-तफरी मच गई।
मोर्चुरी परिसर में तनावपूर्ण माहौल हुआ
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी सक्रिय हुए। अधिकारियों ने मुकेश को समझाकर शांत कराया और स्थिति को नियंत्रण में लिया। इस दौरान मोर्चरी परिसर में तनावपूर्ण माहौल बना रहा। मामले ने राजनीतिक रंग भी ले लिया है। देहात कांग्रेस अध्यक्ष बिशनाराम सियाग ने आरोप लगाया कि परिवार पर लगातार दबाव बनाया जा रहा है ताकि पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी कराई जा सके। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की।
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बुजुर्गों की सहमति से आवश्यक सहयोग किया जा रहा
वहीं, परिवार के ही सदस्य राजेश नायक ने अलग पक्ष रखते हुए कहा कि नवजात शिशु की तबीयत खराब है और उसका इलाज प्राथमिकता है। उन्होंने दावा किया कि प्रशासन किसी प्रकार का दबाव नहीं बना रहा, बल्कि परिवार के बुजुर्गों की सहमति से आवश्यक सहयोग किया जा रहा है।
गौरतलब, है कि पीबीएम अस्पताल में भर्ती शारदा नायक की 21 जून को मौत हो गई थी। इससे पहले 18 जून को प्रीति नायक नामक एक अन्य प्रसूता की भी मृत्यु हुई थी। प्रीति के परिजन पोस्टमार्टम के बाद अंतिम संस्कार कर चुके हैं, जबकि शारदा का शव तीन दिन बाद भी मोर्चरी में रखा हुआ है। परिजन कार्रवाई की मांग पर अड़े हुए हैं, जिसके चलते मामला लगातार चर्चा और विवाद का विषय बना हुआ है।
धरना समाप्त
इधर शारदा नायक की मौत को लेकर पिछले चार दिनों से जारी विरोध-प्रदर्शन आखिरकार समाप्त हो गया। जिला प्रशासन, परिजनों और कांग्रेस नेताओं के बीच हुई बातचीत के बाद सहमति बनी, जिसके चलते शव का पोस्टमार्टम कराने का रास्ता साफ हो गया है। प्रशासन की ओर से परिजनों को तत्काल राहत देने के लिए जनसहयोग से 25 लाख रुपए जुटाने का भरोसा दिया गया है। साथ ही राज्य सरकार को 50 लाख रुपए की अतिरिक्त आर्थिक सहायता स्वीकृत करने के लिए प्रस्ताव भेजने पर भी सहमति बनी है। परिवार के एक सदस्य को संविदा आधारित रोजगार उपलब्ध कराने का आश्वासन भी दिया गया है।
अतिरिक्त जिला कलेक्टर उम्मेददान रतनू ने बताया कि यदि परिजन लिखित शिकायत देते हैं तो पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी। जांच में किसी डॉक्टर, नर्सिंगकर्मी या अन्य कर्मचारी की लापरवाही सामने आने पर संबंधित के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। समझौते के बाद शारदा नायक के पोस्टमार्टम की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। पोस्टमार्टम के बाद अंतिम संस्कार किया जाएगा।