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राजस्थान भर्ती घोटाला: चार नंबर वाले को मिले 165 अंक, दो नंबर वाला चयन सूची में पहुंचा; एसओजी ने किया खुलासा

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर Published by: जयपुर ब्यूरो Updated Wed, 24 Jun 2026 10:50 AM IST
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सार

प्रयोगशाला सहायक भर्ती परीक्षा-2018 में OMR शीट स्कैनिंग के दौरान की गई कथित धांधली ने भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जांच में सामने आया कि कुछ अभ्यर्थियों के अंकों में असामान्य बढ़ोतरी कर उन्हें चयन सूची में शामिल कराया गया।

Rajasthan Exam Fraud Candidates with Just two and four Marks Awarded 165 Points SOG Arrests Two
आरोपी देवेन्द्र सिंह गुर्जर,आरोपी महेंद्र कुमार मीना - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार

राजस्थान पुलिस की स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) ने प्रयोगशाला सहायक सीधी भर्ती परीक्षा-2018 में ओएमआर शीट स्कैनिंग के दौरान हुए बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा करते हुए दो अभ्यर्थियों को गिरफ्तार किया है। अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस (एसओजी) विशाल बंसल ने बताया कि इस संबंध में एसओजी थाना में दर्ज प्रकरण संख्या 8/2025 की जांच के दौरान गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं।


ओएमआर शीट में कांट-छांट के जरिए अनुचित लाभ पहुंचाया
जांच में पाया गया कि परीक्षा की ओएमआर शीट स्कैनिंग का कार्य करने वाली एजेंसी राभव लिमिटेड के कर्मचारियों विनोद कुमार गौड़ और शादान खान ने कुछ अभ्यर्थियों के साथ मिलीभगत कर उनकी ओएमआर शीट में कांट-छांट और तकनीकी हेरफेर की। इसके जरिए उन्हें अनुचित लाभ पहुंचाया गया। इस फर्जीवाड़े के माध्यम से कुल 27 अभ्यर्थियों का अनंतिम चयन कराया गया था।
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कंपनी के कार्यकारी निदेशक पहले ही हो चुके हैं गिरफ्तार
एसओजी के अनुसार, आरोपियों ने स्कैनिंग प्रक्रिया के दौरान अभ्यर्थियों के वास्तविक अंकों में बदलाव कर परीक्षा परिणामों को प्रभावित किया। मामले में राभव लिमिटेड के कर्मचारी विनोद कुमार गौड़, शादान खान तथा कंपनी के कार्यकारी निदेशक रामप्रवेश सिंह को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है।
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ओएमआर स्कैनिंग में दर्शाए 165 अंक
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि आरोपी महेंद्र कुमार मीना के वास्तविक अंक केवल 4 थे, लेकिन ओएमआर स्कैनिंग के दौरान उन्हें 165 अंक दर्शाए गए। इसी प्रकार, देवेन्द्र सिंह गुर्जर के वास्तविक अंक मात्र 2 थे, जबकि स्कैनिंग रिकॉर्ड में उन्हें 191 अंक प्राप्त होना दर्शाया गया। कर्मचारी चयन बोर्ड द्वारा दोबारा कराई गई ओएमआर शीट स्कैनिंग में इस हेरफेर का खुलासा हुआ। प्रकरण में वांछित आरोपियों की लगातार तलाश की जा रही थी। इसी क्रम में एसओजी ने महेंद्र कुमार मीना निवासी नांगललाट, थाना टोडाभीम, जिला करौली तथा देवेन्द्र सिंह गुर्जर निवासी नादना, थाना मंडावर, जिला दौसा को गिरफ्तार कर लिया। दोनों आरोपियों से पूछताछ की जा रही है। साथ ही मामले में अन्य संभावित लाभार्थियों एवं संलिप्त व्यक्तियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।

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एसओजी का कहना है कि भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता बनाए रखने और युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी। मामले की जांच अभी जारी है और आने वाले दिनों में अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी की भी संभावना जताई जा रही है।
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