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Rajasthan: कम है बेरोजगारी भत्ता, कम से कम 8 हजार करे सरकार; योजना विभाग की सरकारी मूल्यांकन रिपोर्ट में सुझाव

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर Published by: शबाहत हुसैन Updated Tue, 24 Jun 2025 09:07 PM IST
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सार

Rajasthan: बेरोजगार होने से छात्र-छात्राएं मानसिक तौर से अधिक तनावग्रस्त रहते हैं। इसलिए मुख्यमंत्री सुवा संबल योजना के तहत दिया जाने वाला बेरोजागरी भत्ता दोगुना किया जाए। मांग योजना का सरकार की ओर से कराए गए मूल्यांकन में सामने आई है।
 

A suggestion igovernment evaluation report of the Planning Department to increase the unemployment allowance
सांकेतिक - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

राजस्थान में मुख्यमंत्री सुवा संबल योजना के तहत प्रदेश में बेरोजगारों को दिया जाने वाला भत्ता बेरोजगारों की जरूरत पूरी नहीं कर पा रहा है। बेरोजगारी से छात्र-छात्राएं मानसिक तौर पर तनावग्रस्त रहते हैं। इसलिए मुख्यमंत्री सुवा संबल योजना के तहत दिया जाने वाला बेरोजागरी भत्ता दोगुना किया जाए। प्रदेश के बेरोजगारों की यह मांग योजना के सरकार की ओर से कराए गए मूल्यांकन में सामने आई है।

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कम से कम 8 हजार हो बेरोजगारी भत्ता
सरकारी मूल्यांकन रिपोर्ट में यह भी सुझाव दिया गया है कि बेरोजगारी भत्ते की राशि कम से कम आठ हजार रूपए की जानी चाहिए। सरकार के योजना विभाग के तहत आने वाले मूल्यांकन संगठन ने हाल में मुख्यमंत्री युवा सम्बल योजना के मूल्यांकन की यह रिपोर्ट सरकार को भेजी है। रिपोर्ट में योजना के क्रियान्वयन में सामने आ रही कई कमियों की ओर इशारा भी किया गया है और सरकार को सुझाव भी दिए गए हैं। 
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रिपोर्ट में कहा गया है - बेरोजगार होने से छात्र-छात्राएं मानसिक तौर से अधिक तनावग्रस्त रहते है। इस योजना द्वारा छात्र-छात्राओं को आत्म सम्बल मिला है। योजनान्तर्गत पुरुष को 4000 रुपये एवं महिला को 4500 रुपये राशि उपलब्ध करवाई जा रही है। मूल्यांकन रिपोर्ट लाभार्थियों के साक्षातकार पर आधारित है। इसमें यह बात सामने आई है कि बेरोजगारी भत्ता राशि पर्याप्त नहीं है क्योंकि वर्तमान स्थिति में प्रतियोगी पुस्तकें एवं आवागमन में व्यय पूर्व की तुलना में काफी अधिक हो गया है। प्राप्त भत्ते की अधिकांष राशि इंटर्नशिप के दौरान आवागमन में ही खर्च हो जाती है। ऐसे में सुझाव है कि राशि को बढ़ाकर 8000 एवं महिलाओं के लिए 8500 रुपए किया जाए। 

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इंटर्नशिप पर भी सवाल
इस योजना के तहत सरकार में इंटर्नशिप करने वालों को बेरोजगारी भत्ता दिया जाता है, लेकिन रिपोर्ट में इस व्यवस्था को लेकर भी सवाल खडे किए गए हैं और इसे वैकल्पिक किए जाने का सुझाव दिया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि इंटर्नशिप के कारण लाभार्थी नियमित रूप से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी नहीं कर पाता है एवं 2 वर्ष पश्चात् पुन: बेरोजगार हो जाता है। ऐसे में इंटर्नशिप को वैकल्पिक बनाया जाए और जो लाभार्थी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने के इच्छुक हैं उनका बेरोजगारी भत्ता कम कर दिया जाए।

वहीं इंटर्नषिप करने वाले लाभार्थियों का अधिक भत्ता दिया जाए। इसके साथ ही रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि आरएसएलडीसी से मिलने वाले प्रशिक्षण और इंटर्नशिप में कराए जाने वाले काम में एकरूपता नहीं है। दोनों की प्रकृति एकदम भिन्न है। इसलिए इंटर्नशिप करने वालों को प्रशिक्षण में ऑफिस में कराए जाने वालों का प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए। 

पारिवारिक आय की सीमा बढ़ाने का सुझाव भी
योजनान्तर्गत पारिवारिक आय 2 लाख रुपये एवं किसी अन्य योजना में छात्रवृत्ति प्राप्त करने की जांच या निरीक्षण की कोई व्यवस्था नहीं है। इसलिए पारिवारिक आय सीमा बढ़ाकर 5 लाख रूपये किया जाना चाहिए और इस जांच की व्यवस्था होनी चाहिए कि लाभार्थी को कहीं ओर से छात्रवृत्ति तो नहीं मिल रही।  लाभार्थी को 2 वर्ष कार्य करने के पश्चात भी इंटर्नशिप प्रमाण पत्र प्रदान नहीं किया जाता है जो जरूर दिया जानाा चाहिए । इस प्रमाण पत्र को राजकीय/निजी/संविदा भर्तियों में वरीयता दी जानी चाहिए।

बजट के अभाव में समय पर नहीं होता भुगतान
बजट के अभाव में समय पर बेरोजगारी भत्ते का भुगतान नहीं हो पाता।  जिला कार्यालयों में स्टाफ की बहुत कमी है तथा योजना के सफल, प्रभावी संचालन के लिए मानव संसाधन की जरूरत पूरी नहीं हो पा रही है।  विभाग द्वारा योजना की उचित मॉनिटरिंग नहीं की जा रही है। विभाग द्वारा स्वीकृत आवेदकों को सरकारी कार्यालय के लिए कार्यालय आदेश निकालने के बाद निरीक्षण नहीं किया जाता है जिससे वे निरंतर कार्यालय में उपस्थित हो रहे है या नहीं यह पता नहीं चलता। 

बेरोजगारी भत्ता रहता है बड़ा मुद्दा
गौरतलब है कि प्रदेश में बीस लाख से ज्यादा पंजीकृत बेरोजगार हैं और बेरोजगारी भत्ता सरकार की ओर से प्रतिवर्ष सिर्फ दो लाख बेरोजगगारों को दिया जाता  है। इसमें भी पात्रता के नियम काफी कडे हैं और इसके चलते आवेदन करने वाले सभी बेरोजगारों को भत्ता नहीं मिल पाता। विधानसभा में इसे लेकर कई विधायक सवाल उठाते हैं और यह एक बडा मुद्दा बनता है।

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