कांग्रेस में गहलोत-डोटासरा विवाद पर क्या बोले मालवीय? खुद को बताया 'छोटा नेता', कहा- सभी बड़े नेता बराबर
कांग्रेस में गहलोत-डोटासरा के बीच बढ़ी सियासी तल्खी पर पूर्व मंत्री महेंद्रजीत मालवीय ने दूरी बनाई। बोले- हम जैसे छोटे नेताओं के लिए सभी बड़े नेता बराबर हैं, किसने क्या कहा, इस पर टिप्पणी नहीं करूंगा।
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कांग्रेस मुख्यालय की जगह पूर्व सीएम अशोक गहलोत के बंगले पर बीएपी कार्यकर्ताओं को पार्टी जॉइन कराने की खबरों को लेकर कांग्रेस में घमासान मच गया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने इस मुद्दे को लेकर सीधे अशोक गहलोत को निशाना बना दिया। हालांकि राजस्थान कांग्रेस में गहलोत और डोटासरा के मतभेद पहले भी सामने आते रहे हैं। लेकिन इतनी तीखी टिप्पणी डोटासरा की तरफ से पहली बार सुनने को मिली है।
हालांकि गहलोत कैंप और प्रदेश नेतृत्व के बीच उभरे सियासी विवाद पर पूर्व मंत्री महेंद्रजीत सिंह मालवीय ने खुद को अलग रखने की कोशिश की है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के सरकारी आवास पर जॉइनिंग कार्यक्रम और वहां 'चौथी बार गहलोत सरकार' के नारों के बाद प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा की टिप्पणी से शुरू हुई सियासी चर्चा पर मालवीय ने कहा कि "हम जैसे छोटे नेताओं के लिए तो सभी बड़े नेता बराबर हैं। किसने क्या कहा और क्यों कहा, इस पर मैं क्या कह सकता हूं। मेरे लिए तो सब एक समान हैं।"
मालवीय का यह बयान ऐसे समय आया है, जब कांग्रेस के भीतर जॉइनिंग कार्यक्रम के आयोजन और व्यक्तिवाद को लेकर नई बहस छिड़ी हुई है। दरअसल, बीएपी से आए कार्यकर्ताओं को पहले अशोक गहलोत के आवास पर कांग्रेस की सदस्यता दिलाई गई, जहां कार्यकर्ताओं ने गहलोत को चौथी बार मुख्यमंत्री बनाने के नारे लगाए। इसके बाद मालवीय उन्हीं कार्यकर्ताओं को लेकर प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय पहुंचे।
गहलोत के लिए क्या बोल गए डोटासरा
प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में जब मालवीय संबोधित करने के लिए खड़े हुए तो डोटासरा ने बीच में माइक लेकर कार्यकर्ताओं से कहा कि "यहां मुख्यमंत्री वाले नारे मत लगाना, व्यक्ति विशेष की बात मत करना, नहीं तो पहले जैसी स्थिति हो जाएगी।" इसके बाद डोटासरा ने मीडिया से बातचीत में बिना नाम लिए कहा कि "कोई व्यक्ति अपनी ब्रांडिंग के लिए काम करे तो वह उनको मुबारक हो, मैं कांग्रेस के लिए काम करता हूं।"
इस पूरे घटनाक्रम के बाद मालवीय ने किसी भी गुटबाजी या विवाद पर टिप्पणी करने से परहेज किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस में सभी वरिष्ठ नेताओं का अपना सम्मान है और उनके लिए सभी बड़े नेता समान हैं। उन्होंने दोहराया कि वह किसी के बयान पर प्रतिक्रिया नहीं देना चाहते।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि मालवीय का यह रुख कांग्रेस में वापसी के बाद संतुलन बनाए रखने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। एक ओर उन्होंने गहलोत के आवास से अपने समर्थकों की जॉइनिंग कराई, वहीं दूसरी ओर प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय पहुंचकर संगठन के साथ भी अपनी प्रतिबद्धता जताई। ऐसे में उन्होंने सार्वजनिक तौर पर किसी भी नेता के पक्ष या विपक्ष में बयान देने से दूरी बनाए रखी।
गौरतलब है कि महेंद्रजीत सिंह मालवीय हाल ही में भाजपा छोड़कर दोबारा कांग्रेस में लौटे हैं। उनकी अगुवाई में बांसवाड़ा-डूंगरपुर क्षेत्र के बीएपी से जुड़े कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण की, लेकिन इस जॉइनिंग कार्यक्रम ने कांग्रेस के भीतर नेतृत्व और संगठन की भूमिका को लेकर नई राजनीतिक चर्चा भी छेड़ दी।