कुचामन हादसे के बाद डॉक्टरों की सलाह: मोतियाबिंद ऑपरेशन के बाद ये लक्षण दिखें तो बिल्कुल इंतजार न करें
कुचामन अस्पताल में मोतियाबिंद ऑपरेशन के 24 घंटे भीतर कई मरीजों की आंखों में संक्रमण हो गया। पांच मरीज एसएमएस अस्पताल में भर्ती हैं, सैंपल जांच के लिए लैब भेजे गए।
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मोतियाबिंद का ऑपरेशन आमतौर पर सुरक्षित माना जाता है, लेकिन राजस्थान के कुचामन में सामने आए एक मामले ने मरीजों और उनके परिजनों की चिंता बढ़ा दी है। राजकीय अस्पताल में ऑपरेशन के करीब 24 घंटे के भीतर कई मरीजों की आंखों में गंभीर संक्रमण हो गया। हालत बिगड़ने पर पांच मरीजों को जयपुर के एसएमएस अस्पताल और दो को अजमेर रेफर करना पड़ा। अब संक्रमण की असली वजह जानने के लिए मरीजों के सैंपल माइक्रोबायोलॉजी लैब भेजे गए हैं।
एसएमएस अस्पताल के नेत्र रोग विभागाध्यक्ष डॉ. नगेंद्र सिंह शेखावत ने बताया कि फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि संक्रमण किस कारण हुआ। मरीजों के साथ-साथ ऑपरेशन थिएटर और अस्पताल से भी सैंपल लिए जा रहे हैं। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगा कि संक्रमण बैक्टीरिया, उपकरणों, दवाओं या किसी अन्य वजह से हुआ।
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मामले की गंभीरता को देखते हुए एसएमएस अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टरों का मेडिकल बोर्ड गठित किया गया है। सभी मरीजों का इलाज वरिष्ठ चिकित्सकों की निगरानी में चल रहा है। आंख के अंदर संक्रमण फैलने की आशंका को देखते हुए प्रभावित मरीजों की विट्रेक्टॉमी सर्जरी भी की गई है, ताकि संक्रमण को नियंत्रित किया जा सके और आंख की रोशनी बचाई जा सके।
चिकित्सा मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने भी एसएमएस अस्पताल पहुंचकर मरीजों की स्थिति की जानकारी ली। उन्होंने कुचामन अस्पताल में विशेषज्ञ टीम भेजकर ऑपरेशन थिएटर और अन्य स्थानों की जांच कराने के निर्देश दिए हैं, ताकि संक्रमण के स्रोत का पता लगाया जा सके।
मानसून में क्यों बढ़ जाता है खतरा?
विशेषज्ञों के अनुसार बारिश के मौसम में वातावरण में नमी अधिक होने से बैक्टीरिया और फंगस तेजी से सक्रिय हो जाते हैं। इसी कारण सर्जरी के बाद संक्रमण का खतरा सामान्य दिनों की तुलना में बढ़ सकता है। हालांकि डॉक्टरों का कहना है कि इस मामले को सीधे मानसून से जोड़ना सही नहीं होगा। वास्तविक कारण लैब रिपोर्ट आने के बाद ही सामने आएगा।
ऑपरेशन के बाद ये संकेत मिलें तो बिल्कुल इंतजार न करें
नेत्र विशेषज्ञों का कहना है कि मोतियाबिंद ऑपरेशन के बाद यदि आंख में तेज दर्द, अचानक धुंधला दिखाई देना, लालिमा बढ़ना, सूजन, मवाद या पानी आना, रोशनी कम महसूस होना या देखने की क्षमता तेजी से घटने लगे तो तुरंत अस्पताल पहुंचना चाहिए। ऐसे मामलों में देरी आंख की रोशनी के लिए गंभीर खतरा बन सकती है।
फिलहाल एसएमएस अस्पताल में भर्ती सभी मरीजों का इलाज जारी है और स्वास्थ्य विभाग जांच रिपोर्ट का इंतजार कर रहा है। रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि संक्रमण की वजह क्या थी और कहीं अस्पताल की प्रक्रिया में कोई चूक तो नहीं हुई।
क्या बोले अशोक गहलोत?
गहलोत ने कहा कि डीडवाना-कुचामन के कुचामन सिटी राजकीय आई हॉस्पिटल में मोतियाबिंद ऑपरेशन के बाद 7 मरीजों की हालत गंभीर होना और आंखों की रोशनी जाने का खतरा पैदा होना बेहद चिंताजनक है। सरकारी अस्पताल में मरीज ठीक होने गया था, वहां से नई बीमारी लेकर लौटा। प्रसूताओं की मौतें, किडनी फेलियर के मामले और अब यह हादसा, भाजपा सरकार में स्वास्थ्य तंत्र किस कदर चरमरा चुका है, यह इसका जीता-जागता उदाहरण है। हमारी कांग्रेस सरकार में निःशुल्क दवा-जांच योजना, चिरंजीवी स्वास्थ्य बीमा योजना एवं RGHS से आमजन को भरोसेमंद इलाज मिलता था। आज वह भरोसा टूट चुका है। सवाल बहुत हैं, पर सरकारी जवाबदेही किसी की नहीं। सरकार तुरंत जांच कराए और दोषियों पर सख्त कार्रवाई करे।