Rajasthan News: आग लगने से पहले बताएगी खतरा, IIT जोधपुर विकसित कर रहा भविष्य की स्मार्ट फायर सेफ्टी तकनीक
आईआईटी जोधपुर ने एआई, डिजिटल ट्विन और बीआईएम आधारित फायर सेफ्टी तकनीक विकसित की है, जो आग के दौरान और बाद में इमारतों की सुरक्षा का वैज्ञानिक आकलन करेगी।
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देश में अस्पतालों, कोचिंग संस्थानों, व्यावसायिक परिसरों, ऊंची आवासीय इमारतों और औद्योगिक इकाइयों में आग लगने की बढ़ती घटनाओं के बीच भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) जोधपुर भविष्य की ऐसी फायर सेफ्टी तकनीक विकसित कर रहा है, जो आग लगने से पहले संभावित जोखिम का आकलन करने के साथ-साथ आग के बाद इमारत की बनावट की मजबूती का भी वैज्ञानिक विश्लेषण कर सकेगी।
आईआईटी जोधपुर के सिविल एंड इंफ्रास्ट्रक्चर इंजीनियरिंग विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ. पी. रवि प्रकाश के नेतृत्व में शोधकर्ताओं की टीम अत्याधुनिक कम्प्यूटेशनल तकनीक विकसित कर रही है। इसका उद्देश्य इमारतों को आग से अधिक सुरक्षित बनाना, आग के बाद होने वाले नुकसान का सटीक आकलन करना और भविष्य में ऐसी घटनाओं से होने वाले जोखिम को कम करना है।
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केवल आग बुझाना नहीं, इमारत की मजबूती भी होगी जांच का हिस्सा
शोधकर्ताओं के अनुसार वर्तमान फायर सेफ्टी सिस्टम का मुख्य उद्देश्य आग का पता लगाना और उसे बुझाना होता है, लेकिन आग के बाद इमारत कितनी सुरक्षित बची है, इस पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जाता। आईआईटी जोधपुर के शोधकर्ताओं ने ऐसी आधुनिक कंप्यूटर तकनीक विकसित की है, जो यह दिखा सकती है कि किसी इमारत में आग कैसे फैलेगी, आग लगने पर इमारत के अलग-अलग हिस्से कैसे प्रभावित होंगे और आग बुझने के बाद इमारत को कितना नुकसान हुआ है।
इससे इंजीनियर पहले ही यह आकलन कर सकेंगे कि इमारत कितनी सुरक्षित है और उसमें मरम्मत की जरूरत है या नहीं। शोध में यह भी सामने आया है कि कई बार इमारतों में सबसे गंभीर संरचनात्मक नुकसान आग बुझने के बाद कूलिंग फेज के दौरान होता है, जबकि सामान्य जांच में इस चरण को अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है।
एआई देगा पहले से चेतावनी
शोध दल ने एआई आधारित ऐसी प्रणाली भी विकसित की है, जो सेंसर डेटा के आधार पर आग के दौरान इमारत के बुनियादी ढांचे की स्थिति का अनुमान लगा सकती है। इसे शुरुआती चेतावनी प्रणाली (Early Warning System) के साथ जोड़ा गया है, जिससे राहत एवं बचाव एजेंसियों को समय रहते निर्णय लेने में मदद मिलेगी। इस तकनीक का उपयोग आपदा प्रबंधन एजेंसियों, दमकल विभाग, संरचनात्मक इंजीनियरों, बीमा कंपनियों और शहरी नियोजन संस्थाओं के लिए भी उपयोगी साबित हो सकता है।
इनका कहना है-
डॉ. पी. रवि प्रकाश ने कहा कि हर बड़ी आग की घटना यह याद दिलाती है कि केवल आग बुझाना पर्याप्त नहीं है। यह समझना भी जरूरी है कि आग से पहले, आग के दौरान और उसके बाद इमारत का व्यवहार कैसा होता है। उनका कहना है कि भविष्य की इमारतें केवल डिजिटल तरीके से डिजाइन नहीं होंगी, बल्कि उनके पूरे जीवनकाल में बुद्धिमत्तापूर्ण ढंग से प्रबंधित भी की जाएंगी। AI, BIM और डिजिटल ट्विन जैसी तकनीकें सुरक्षित, स्मार्ट और टिकाऊ शहरों के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।