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Rajasthan : केंद्रीय कैबिनेट में पेपर लीक बिल मंजूर, राजस्थान में 4 साल पहले से है आजीवन कारावास का प्रावधान

Fri, 24 Jul 2026 04:41 PM IST
Sourabh Bhatt न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर Published by: Sourabh Bhatt Updated Fri, 24 Jul 2026 04:41 PM IST
सार

केंद्रीय कैबिनेट ने पेपर लीक संशोधन विधेयक को दी मंजूरी दे दी है। अब यह बिल सोमवार को संसद में पेश होगा। लेकिन राजस्थान में तीन साल पहले ही पेपर लीक पर कानून लाया जा चुका है। इसमें अब तक 163 केस, 569 गिरफ्तारियां भी हो चुकी हैं।

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Centre Clears Paper Leak Bill; Rajasthan's Tough Anti-Cheating Law Already in Force
राजस्थान विधानसभा - फोटो : अमर उजाला

विस्तार


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देशभर में प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक पर लगाम लगाने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में शुक्रवार को हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में पेपर लीक संशोधन विधेयक (Paper Leak Amendment Bill) को मंजूरी दे दी गई। इसे 27 जुलाई से शुरू होने वाले संसद सत्र में पेश किए जाने की संभावना है। इस बीच राजस्थान पहले ही देश के सबसे सख्त एंटी-पेपर लीक कानूनों में से एक लागू कर चुका है।

इस फैसले से एक दिन पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने छात्रों के नाम वीडियो संदेश जारी कर भरोसा दिलाया था कि पेपर लीक के मामलों से निपटने के लिए केंद्र सरकार कड़ा कानून बनाएगी। उन्होंने ऐसे मामलों की सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट गठित करने की भी घोषणा की थी।
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राजस्थान में पहले से लागू है सख्त कानून

राजस्थान में वर्ष 2022 के REET पेपर लीक विवाद के बाद तत्कालीन अशोक गहलोत सरकार ने राजस्थान सार्वजनिक भर्ती परीक्षाओं में अनुचित साधनों की रोकथाम (संशोधन) अधिनियम, 2023 लागू किया था। इस कानून के तहत पेपर लीक और भर्ती परीक्षा में संगठित धोखाधड़ी जैसे अपराधों के लिए अधिकतम सजा आजीवन कारावास तक का प्रावधान किया गया।
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कानून के अनुसार, परीक्षा में अनुचित साधनों का इस्तेमाल करने वाले अभ्यर्थी को तीन साल तक की सजा और कम से कम एक लाख रुपये जुर्माना हो सकता है। वहीं, प्रश्नपत्र लीक करने, लीक की साजिश रचने, फर्जी अभ्यर्थी बैठाने, अवैध तरीके से प्रश्नपत्र हासिल करने या हल कराने जैसे मामलों में पांच साल से लेकर आजीवन कारावास तथा 10 लाख से 10 करोड़ रुपये तक जुर्माने का प्रावधान है। दोषी अभ्यर्थियों को दो वर्ष तक किसी भी सरकारी परीक्षा में बैठने से भी प्रतिबंधित किया जा सकता है। सभी अपराध संज्ञेय, गैर-जमानती और गैर-समझौतायोग्य हैं।

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तीन साल में 163 एफआईआर, 569 आरोपी गिरफ्तार

राज्य सरकार के अनुसार, पिछले तीन वर्षों में भारतीय न्याय संहिता (BNS) और राजस्थान के एंटी-पेपर लीक कानून के तहत 163 एफआईआर दर्ज की गई हैं। इन मामलों में अब तक 569 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। सब-इंस्पेक्टर (SI) भर्ती परीक्षा अनियमितता मामले में ही 150 लोगों की गिरफ्तारी हुई है। इनमें 71 कार्यरत सब-इंस्पेक्टर भी शामिल हैं, जिन पर भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं में शामिल होने के आरोप हैं।

केंद्र के नए विधेयक और राजस्थान में पहले से लागू सख्त कानून के बीच अब यह चर्चा तेज हो गई है कि भर्ती परीक्षाओं में नकल और पेपर लीक पर अंकुश लगाने के लिए राज्यों और केंद्र की कानूनी व्यवस्थाएं किस तरह प्रभावी साबित होती हैं।
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