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पूर्वी राजस्थान में बारिश बनी किसानों के लिए वरदान, चार दिन में 7 लाख हेक्टेयर बढ़ी खरीफ की बुवाई

Fri, 07 Aug 2026 02:57 PM IST
Sourabh Bhatt न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर Published by: Sourabh Bhatt Updated Fri, 07 Aug 2026 02:57 PM IST
सार

पूर्वी और दक्षिणी राजस्थान में बारिश से खरीफ बुवाई ने रफ्तार पकड़ ली। चार दिन में 7 लाख हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में बुवाई बढ़कर 145.03 लाख हेक्टेयर पहुंच गई, जिससे किसानों को बड़ी राहत मिली।

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Eastern Rajasthan Rains Revive Kharif Crops, Over 700,000 Hectares Brought Under Sowing in Four Days
खरीफ फसल - फोटो : screengrab

विस्तार

 पूर्वी और दक्षिणी राजस्थान में लगातार हो रही मानसूनी बारिश ने खरीफ सीजन को नई रफ्तार दे दी है। लंबे सूखे अंतराल के बाद हुई अच्छी बारिश से न केवल खेतों में नमी लौटी है, बल्कि बुवाई का रकबा भी तेजी से बढ़ा है। महज चार दिनों में प्रदेश में खरीफ फसलों की बुवाई 7 लाख हेक्टेयर से अधिक बढ़ गई है। इससे किसानों को राहत मिली है और इस साल बेहतर उत्पादन की उम्मीद मजबूत हुई है।

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भरतपुर, डीग, करौली, धौलपुर और आसपास के जिलों में लगातार दूसरे दिन हुई बारिश से बाजरा, ज्वार, ग्वार और तिलहन जैसी फसलों को नया जीवन मिला है। इन जिलों में खेती मुख्य रूप से मानसून पर निर्भर है, इसलिए समय पर हुई बारिश किसानों के लिए किसी संजीवनी से कम नहीं मानी जा रही।

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किसानों का कहना है कि लंबे समय से बारिश नहीं होने के कारण फसलें सूखने लगी थीं, लेकिन दो दिन की लगातार बारिश से खेतों में पर्याप्त नमी आ गई है। यदि अगले कुछ दिनों तक बारिश का यही क्रम बना रहा तो खरीफ उत्पादन में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हो सकती है।

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चार दिन में 7 लाख हेक्टेयर बढ़ी बुवाई

कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार 30 जुलाई तक प्रदेश में 138 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में खरीफ फसलों की बुवाई हुई थी। इसके बाद पूर्वी और दक्षिणी राजस्थान में मानसून सक्रिय होने से 4 अगस्त तक बुवाई बढ़कर 145.03 लाख हेक्टेयर पहुंच गई। यानी सिर्फ चार दिनों में 7 लाख हेक्टेयर से अधिक अतिरिक्त क्षेत्र में बुवाई हुई। इस वर्ष राज्य सरकार ने खरीफ बुवाई का 165 लाख हेक्टेयर लक्ष्य रखा है, जिसमें अब तक करीब 88 प्रतिशत लक्ष्य हासिल किया जा चुका है।

मोटे अनाज और दलहन की बुवाई में बढ़ोतरी

कृषि विभाग के मुताबिक इस बार मोटे अनाजों की बुवाई में अच्छी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। बाजरे का रकबा 39.09 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 39.52 लाख हेक्टेयर, ज्वार 4.98 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 6.31 लाख हेक्टेयर और मक्का 8.88 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 9.67 लाख हेक्टेयर हो गया है। हालांकि धान की बुवाई पिछले वर्ष की तुलना में कुछ कम रही है।

दलहन फसलों का कुल रकबा भी 35.54 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 35.95 लाख हेक्टेयर पहुंच गया है। उड़द और मोठ की बुवाई बढ़ी है, जबकि मूंग और चोला (लोबिया) के रकबे में हल्की कमी दर्ज की गई है।

पूर्वी राजस्थान में सबसे ज्यादा राहत

प्रभावित जिलों में खरीफ फसलों का रकबा काफी बड़ा है। भरतपुर में 1.22 लाख हेक्टेयर में बाजरा, 15,860 हेक्टेयर में ज्वार और 580 हेक्टेयर में तिलहन की बुवाई हुई है। करौली में 90,100 हेक्टेयर में बाजरा और 13,150 हेक्टेयर में तिलहन, जबकि गंगापुर सिटी में 78,500 हेक्टेयर में बाजरा और 14,900 हेक्टेयर में तिलहन की खेती की गई है। डीग और सवाई माधोपुर में भी खरीफ फसलों को बारिश का सीधा लाभ मिला है।

डीग में सबसे ज्यादा 158 मिमी बारिश

मौसम विभाग के अनुसार पिछले 24 घंटे में डीग जिले 158 मिमी बारिश दर्ज की गई, जो प्रदेश में सबसे अधिक रही। इसके अलावा भरतपुर, करौली और धौलपुर के कई इलाकों में अच्छी बारिश हुई। भरतपुर जिले के सबसे बड़े बरेठा बांध में लगातार बारिश के चलते पानी की आवक तेजी से बढ़ रही है। शुक्रवार को बांध का जलस्तर 26.60 फीट तक पहुंच गया, जबकि इसकी अधिकतम भराव क्षमता 29 फीट है।


प्रशासन का कहना है कि यदि कैचमेंट एरिया में बारिश का सिलसिला जारी रहा और जलस्तर 27 फीट तक पहुंचा, तो किसी भी समय बांध के गेट खोले जा सकते हैं। संभावित जल निकासी को देखते हुए कुकुंद नदी के बहाव क्षेत्र के 50 गांवों में अलर्ट जारी कर दिया गया है और लोगों से नदी-नालों के पास नहीं जाने तथा सतर्क रहने की अपील की गई है।
 

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