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राजस्थान जल जीवन मिशन घोटाला: पूर्व आईएएस सुबोध अग्रवाल को तीन दिन की रिमांड पर भेजा, 13 अप्रैल को होगी सुनवाई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
Published by: जयपुर ब्यूरो
Updated Fri, 10 Apr 2026 04:07 PM IST
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सार
जल जीवन मिशन घोटाले में पूर्व आईएएस सुबोध अग्रवाल को एसीबी कोर्ट ने तीन दिन की रिमांड पर भेज दिया है। उनके खिलाफ जांच में टेंडर प्रक्रिया में अनियमितताओं और करोड़ों रुपए के फर्जीवाड़े के आरोप सामने आए हैं।
पूर्व आईएएस सुबोध अग्रवाल को तीन दिन की रिमांड पर भेजा गया
- फोटो : Social Media
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विस्तार
जल जीवन मिशन घोटाले के मामले में शुक्रवार को पूर्व आईएएस सुबोध अग्रवाल को एसीबी कोर्ट ने तीन दिन की रिमांड पर भेज दिया गया है। इस दौरान आईएएस सुबोध अग्रवाल के वकील अमित सिंह ने बताया कि एसीबी के द्वारा कोर्ट से पांच दिन की रिमांड मांगी गई थी। जिसे अदालत ने अस्वीकार करते हुए तीन दिन की रिमांड पर भेजा है और 13 अप्रैल को दोबारा सुनवाई के लिए सुबोध अग्रवाल कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत होंगे।
एसीबी ने मांगी थी पांच दिन की रिमांड
भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो यानी एसीबी ने कोर्ट से पूर्व आईएएस सुबोध अग्रवाल की रिमांड की मांग करते हुए कहा कि मामले में बड़े स्तर पर फर्जीवाड़ा और पैसों के लेनदेन के प्रमाण मिले हैं, जिनकी गहन जांच के लिए विस्तृत पूछताछ जरूरी है।
टेंडर प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं सामने आईं
जांच अधिकारी ने कोर्ट को बताया कि टेंडर प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। आरोप है कि फर्जी प्रमाण पत्रों के आधार पर टेंडर जारी किए गए और शर्तों में हेरफेर कर करीब 50 करोड़ रुपए तक के प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी गई। एसीबी का कहना है कि इस पूरे नेटवर्क में कई लोग शामिल हैं और साजिश की परतें खोलने के लिए आरोपी से पूछताछ जरूरी है।
पूर्व आईएएस की गिरफ्तारी गलत और अवैध
पूर्व आईएएस सुबोध अग्रवाल के वकीलों ने गिरफ्तारी को पूरी तरह से गलत और अवैध बताया। उन्होंने कोर्ट में दलील दी कि न तो अभियुक्त को गिरफ्तारी के कारण बताए गए और न ही कानूनी प्रक्रिया का पालन किया गया। बचाव पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का हवाला देते हुए कहा कि रिमांड पेशी से पहले आरोपी को गिरफ्तारी के कारण और रिमांड आवेदन उपलब्ध कराना अनिवार्य है, जो इस मामले में नहीं किया गया। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया और दोपहर बाद आदेश सुनाते हुए 3 दिन की रिमांड पर भेजा।
ये भी पढ़ें- राजस्थान जल जीवन मिशन घोटाला: एसीबी की बड़ी कार्रवाई; फरार पूर्व आईएएस सुबोध अग्रवाल दिल्ली से गिरफ्तार
गौरतलब है कि एसीबी ने गुरुवार को नई दिल्ली से सुबोध अग्रवाल को हिरासत में लिया था और बाद में जयपुर लाकर उनकी औपचारिक गिरफ्तारी की गई। इससे पहले उन्हें पकड़ने के लिए एसीबी ने 51 दिनों तक 18 टीमों के जरिए 260 से अधिक ठिकानों पर छापेमारी की थी, लेकिन वे लगातार बचते रहे और इस दौरान उन्होंने 10 से ज्यादा ठिकाने बदले।
मामले में अब तक 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि तीन अन्य आरोपी अभी भी फरार हैं। इन फरार आरोपियों के खिलाफ स्टैंडिंग वारंट जारी किए गए हैं और उनकी संपत्तियों को कुर्क करने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। कोर्ट ने पहले सुबोध अग्रवाल समेत चार आरोपियों को भगोड़ा घोषित किया था, हालांकि अब उनके सामने आने के बाद कानूनी प्रक्रिया तेज हो गई है।
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एसीबी ने मांगी थी पांच दिन की रिमांड
भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो यानी एसीबी ने कोर्ट से पूर्व आईएएस सुबोध अग्रवाल की रिमांड की मांग करते हुए कहा कि मामले में बड़े स्तर पर फर्जीवाड़ा और पैसों के लेनदेन के प्रमाण मिले हैं, जिनकी गहन जांच के लिए विस्तृत पूछताछ जरूरी है।
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टेंडर प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं सामने आईं
जांच अधिकारी ने कोर्ट को बताया कि टेंडर प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। आरोप है कि फर्जी प्रमाण पत्रों के आधार पर टेंडर जारी किए गए और शर्तों में हेरफेर कर करीब 50 करोड़ रुपए तक के प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी गई। एसीबी का कहना है कि इस पूरे नेटवर्क में कई लोग शामिल हैं और साजिश की परतें खोलने के लिए आरोपी से पूछताछ जरूरी है।
पूर्व आईएएस की गिरफ्तारी गलत और अवैध
पूर्व आईएएस सुबोध अग्रवाल के वकीलों ने गिरफ्तारी को पूरी तरह से गलत और अवैध बताया। उन्होंने कोर्ट में दलील दी कि न तो अभियुक्त को गिरफ्तारी के कारण बताए गए और न ही कानूनी प्रक्रिया का पालन किया गया। बचाव पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का हवाला देते हुए कहा कि रिमांड पेशी से पहले आरोपी को गिरफ्तारी के कारण और रिमांड आवेदन उपलब्ध कराना अनिवार्य है, जो इस मामले में नहीं किया गया। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया और दोपहर बाद आदेश सुनाते हुए 3 दिन की रिमांड पर भेजा।
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गौरतलब है कि एसीबी ने गुरुवार को नई दिल्ली से सुबोध अग्रवाल को हिरासत में लिया था और बाद में जयपुर लाकर उनकी औपचारिक गिरफ्तारी की गई। इससे पहले उन्हें पकड़ने के लिए एसीबी ने 51 दिनों तक 18 टीमों के जरिए 260 से अधिक ठिकानों पर छापेमारी की थी, लेकिन वे लगातार बचते रहे और इस दौरान उन्होंने 10 से ज्यादा ठिकाने बदले।
मामले में अब तक 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि तीन अन्य आरोपी अभी भी फरार हैं। इन फरार आरोपियों के खिलाफ स्टैंडिंग वारंट जारी किए गए हैं और उनकी संपत्तियों को कुर्क करने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। कोर्ट ने पहले सुबोध अग्रवाल समेत चार आरोपियों को भगोड़ा घोषित किया था, हालांकि अब उनके सामने आने के बाद कानूनी प्रक्रिया तेज हो गई है।