कोटा-बीकानेर मातृ मृत्यु प्रकरण: गहलोत ने CM को लिखा पत्र, बोले-दोषियों के खिलाफ एफआईआर हो
पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कोटा और बीकानेर में प्रसूताओं की मौत व किडनी फेल मामलों पर मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने, दोषियों पर एफआईआर करने और पीड़ितों को मुआवजा देने की मांग की।
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कोटा और बीकानेर के सरकारी अस्पतालों में प्रसव के बाद महिलाओं की मौत और कई प्रसूताओं की किडनी फेल होने के मामलों को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को पत्र लिखकर कड़ी कार्रवाई की मांग की है। गहलोत ने इन घटनाओं को "सरकारी व्यवस्था की संस्थागत विफलता" बताते हुए जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने, दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने और पीड़ित परिवारों को तत्काल राहत देने की मांग उठाई है।
गहलोत ने बताया कि 17 जून को वे कोटा के न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल पहुंचे थे, जहां उन्होंने भर्ती महिलाओं और उनके परिजनों से मुलाकात की। उन्होंने अस्पताल की स्थिति को "दिल दहला देने वाली" बताते हुए कहा कि अधिकांश प्रभावित परिवार बेहद गरीब हैं, जिन्होंने सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था पर भरोसा किया था, लेकिन उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ा।
पूर्व मुख्यमंत्री ने पत्र में लिखा कि 4 मई से अब तक कोटा में प्रसव के बाद पांच महिलाओं की मौत हो चुकी है, जबकि पांच अन्य महिलाओं की किडनी प्रभावित होने के कारण उनका नियमित डायलिसिस किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मीडिया रिपोर्टों और विशेषज्ञों की प्रारंभिक टिप्पणियों में अमानक दवाओं, ऑपरेशन थियेटर में संक्रमण और इलाज में लापरवाही जैसे मुद्दे सामने आए हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि एम्स की टीम ने ऑपरेशन थियेटर में संक्रमण की आशंका जताई है।
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गहलोत ने बीकानेर के पीबीएम अस्पताल का भी उल्लेख करते हुए कहा कि वहां भी प्रसव के बाद कई महिलाओं की किडनी फेल होने के मामले सामने आए हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि जब निजी अस्पतालों में समान दवाओं के उपयोग के बावजूद ऐसी घटनाएं नहीं हुईं तो सरकारी अस्पतालों में बार-बार ऐसी स्थिति क्यों बनी।
पूर्व मुख्यमंत्री ने राज्य सरकार से मांग की कि एम्स और राज्य सरकार की जांच रिपोर्ट तत्काल सार्वजनिक की जाए, ताकि लोगों को यह पता चल सके कि मौतों और गंभीर स्वास्थ्य जटिलताओं के पीछे वास्तविक कारण क्या थे। उन्होंने कहा कि जब तक पूरी सच्चाई सामने नहीं आएगी, तब तक पीड़ित परिवारों को न्याय नहीं मिलेगा और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकना भी मुश्किल होगा।
गहलोत ने दोषी अधिकारियों और चिकित्सकों को तत्काल निलंबित कर उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करने, एफएसएल रिपोर्ट को त्वरित प्रक्रिया के तहत प्राप्त करने, मृतकों के परिजनों और प्रभावित महिलाओं को आर्थिक सहायता देने तथा जरूरत पड़ने पर किडनी ट्रांसप्लांट सहित आजीवन इलाज का पूरा खर्च राज्य सरकार द्वारा उठाने की मांग की।
उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि आवश्यकता होने पर मरीजों के इलाज के लिए एम्स दिल्ली या अन्य विशेषज्ञ संस्थानों की मदद ली जाए। साथ ही प्रदेश के सभी सरकारी अस्पतालों में ऑपरेशन थियेटर की स्वच्छता और संक्रमण नियंत्रण व्यवस्था की उच्चस्तरीय समीक्षा कराई जाए।
पत्र के अंत में गहलोत ने कहा कि यह केवल एक चिकित्सकीय त्रुटि का मामला नहीं, बल्कि सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की जवाबदेही से जुड़ा गंभीर मुद्दा है, इसलिए सरकार को पारदर्शिता के साथ कठोर कार्रवाई करनी चाहिए और पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाना चाहिए।