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राजस्थान निकाय-पंचायत चुनाव: अवमानना याचिका पर सुनवाई 16 जुलाई तक टली, सरकार ने HC में मांगा और समय
Tue, 14 Jul 2026 06:07 PM IST
Sourabh Bhatt
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
Published by: Sourabh Bhatt
Updated Tue, 14 Jul 2026 06:07 PM IST
सार
राजस्थान हाईकोर्ट ने पंचायत-निकाय चुनाव में देरी से जुड़ी अवमानना याचिका पर सुनवाई 16 जुलाई तक टाल दी। सरकार ने OBC आयोग की रिपोर्ट और 90 दिन की चुनावी प्रक्रिया का हवाला देकर अतिरिक्त समय मांगा है।
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राजस्थान हाईकोर्ट, जयपुर
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
राजस्थान हाईकोर्ट में पंचायत एवं नगरीय निकाय चुनावों में देरी को लेकर दायर अवमानना याचिका पर मंगलवार को सुनवाई नहीं हो सकी। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 16 जुलाई तय कर दी। इसी बीच राज्य सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग ने चुनाव कराने के लिए अतिरिक्त समय मांगते हुए हाईकोर्ट में संयुक्त आवेदन दायर किया है। आवेदन में OBC राजनीतिक आरक्षण के लिए चल रही 'ट्रिपल टेस्ट' प्रक्रिया और चुनावी कार्यक्रम पूरा करने में लगने वाले न्यूनतम 90 दिनों का हवाला दिया गया है।
सरकार ने आवेदन में कहा है कि 22 मई 2026 को पारित हाईकोर्ट के आदेश का पालन करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए गए हैं, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप OBC राजनीतिक आरक्षण की प्रक्रिया पूरी हुए बिना चुनाव कराना संभव नहीं है। सरकार ने स्पष्ट किया कि अदालत के आदेश की अवहेलना करने का कोई इरादा नहीं है और देरी केवल संवैधानिक एवं कानूनी प्रक्रियाओं के कारण हुई है।
यह भी पढें- Rajasthan: 19 प्रसूताओं की मौत पर स्वास्थ्य मंत्री के बयान से मचा बवाल! ऐसा क्या बोल गए गजेंद्र सिंह खींवसर
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आवेदन के अनुसार OBC राजनीतिक आरक्षण तय करने के लिए गठित समर्पित आयोग पहले 30 सितंबर 2026 तक रिपोर्ट देने वाला था, लेकिन अब आयोग ने 14 अगस्त 2026 तक रिपोर्ट सौंपने की जानकारी दी है। राज्य निर्वाचन आयोग का कहना है कि आयोग की रिपोर्ट के आधार पर आरक्षण का अंतिम स्वरूप तय होने के बाद ही चुनाव कार्यक्रम जारी किया जा सकेगा।
निर्वाचन आयोग ने अदालत को बताया है कि राज्य की 14 हजार से अधिक ग्राम पंचायतों के चुनाव चार चरणों में तथा 300 से अधिक नगरीय निकायों के चुनाव दो चरणों में कराए जाएंगे। ग्राम पंचायत चुनावों में लगभग 50 दिन और नगरीय निकायों में करीब 40 दिन लगेंगे। कानून में निर्धारित सभी प्रक्रियाओं का पालन करते हुए पूरी चुनावी प्रक्रिया पूरी करने के लिए न्यूनतम 90 दिनों की आवश्यकता होगी।
सरकार ने यह भी तर्क दिया है कि OBC आयोग की रिपोर्ट आने से पहले चुनाव अधिसूचित करना न्यायोचित नहीं होगा। आवेदन में कहा गया है कि राज्य की लगभग 50 प्रतिशत आबादी OBC वर्ग से संबंधित है और राजनीतिक आरक्षण तय किए बिना चुनाव कराने से भविष्य में कानूनी और प्रशासनिक विवाद उत्पन्न हो सकते हैं।
'कोर्ट पहले ही स्पष्ट कर चुका है सरकार आयोग की रिपोर्ट का इंतजार नहीं करे'
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सरकार ने आवेदन में कहा है कि 22 मई 2026 को पारित हाईकोर्ट के आदेश का पालन करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए गए हैं, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप OBC राजनीतिक आरक्षण की प्रक्रिया पूरी हुए बिना चुनाव कराना संभव नहीं है। सरकार ने स्पष्ट किया कि अदालत के आदेश की अवहेलना करने का कोई इरादा नहीं है और देरी केवल संवैधानिक एवं कानूनी प्रक्रियाओं के कारण हुई है।
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आवेदन के अनुसार OBC राजनीतिक आरक्षण तय करने के लिए गठित समर्पित आयोग पहले 30 सितंबर 2026 तक रिपोर्ट देने वाला था, लेकिन अब आयोग ने 14 अगस्त 2026 तक रिपोर्ट सौंपने की जानकारी दी है। राज्य निर्वाचन आयोग का कहना है कि आयोग की रिपोर्ट के आधार पर आरक्षण का अंतिम स्वरूप तय होने के बाद ही चुनाव कार्यक्रम जारी किया जा सकेगा।
निर्वाचन आयोग ने अदालत को बताया है कि राज्य की 14 हजार से अधिक ग्राम पंचायतों के चुनाव चार चरणों में तथा 300 से अधिक नगरीय निकायों के चुनाव दो चरणों में कराए जाएंगे। ग्राम पंचायत चुनावों में लगभग 50 दिन और नगरीय निकायों में करीब 40 दिन लगेंगे। कानून में निर्धारित सभी प्रक्रियाओं का पालन करते हुए पूरी चुनावी प्रक्रिया पूरी करने के लिए न्यूनतम 90 दिनों की आवश्यकता होगी।
सरकार ने यह भी तर्क दिया है कि OBC आयोग की रिपोर्ट आने से पहले चुनाव अधिसूचित करना न्यायोचित नहीं होगा। आवेदन में कहा गया है कि राज्य की लगभग 50 प्रतिशत आबादी OBC वर्ग से संबंधित है और राजनीतिक आरक्षण तय किए बिना चुनाव कराने से भविष्य में कानूनी और प्रशासनिक विवाद उत्पन्न हो सकते हैं।
'कोर्ट पहले ही स्पष्ट कर चुका है सरकार आयोग की रिपोर्ट का इंतजार नहीं करे'
याचिकाकर्ता की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता पुनीत सिंहवी ने कहा कि हाईकोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया था कि राज्य सरकार OBC आयोग की रिपोर्ट का इंतजार नहीं करेगी। इसके बावजूद सरकार ने न तो उस आदेश के खिलाफ कोई अपील दायर की और न ही उसमें संशोधन या राहत के लिए कोई आवेदन प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा, "अब सरकार बिना अपील किए और उसी आधार पर समय बढ़ाने की मांग कर रही है, जिसे अदालत पहले ही खारिज कर चुकी है। यह अदालत के आदेश का उल्लंघन है।"
वहीं मामले में याचिकाकर्ता संयम लोढ़ा ने कहाञ मामले में राज्य सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग ने जिस ओबीसी आयोग की पेंडिंग रिपोर्ट के ग्राउंड पर हाईकोर्ट से समय बढ़ाने की मांग की है वह तो सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट पहले ही खारिज कर चुके हैं। सुप्रीम कोर्ट व हाईकोर्ट स्पष्ट कर चुके हैं कि रिपोर्ट आए या नहीं आए चुनाव होने चाहिए।