जगन गुर्जर केस से उठे सवाल: राजस्थान में हिरासत में मौतों पर बढ़ी चिंता, 5 साल में 51 मौतें
जगन गुर्जर की हिरासत में मौत पर राजस्थान हाईकोर्ट ने सरकार से विस्तृत रिपोर्ट मांगी। इसी बीच संसद में खुलासा हुआ कि 2025-26 में कस्टोडियल डेथ के मामलों में राजस्थान दूसरे स्थान पर है।
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अजमेर की हाई सिक्योरिटी जेल में कुख्यात पूर्व डकैत जगन गुर्जर की हत्या के बाद राजस्थान में हिरासत में होने वाली मौतों को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। इस मामले में राजस्थान हाईकोर्ट ने जेल सुरक्षा व्यवस्था पर कड़ा रुख अपनाते हुए राज्य सरकार और जेल प्रशासन से 28 जुलाई तक विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। अदालत ने सीसीटीवी कैमरों के काम नहीं करने, जेलों से अपराधी गिरोहों के संचालन, कैदियों तक मोबाइल फोन पहुंचने और अधिकारियों की जवाबदेही पर तीखे सवाल उठाए हैं।
वित्तीय वर्ष 2025-26 में अब तक राज्य में 19 कस्टोडियल डेथ (हिरासत में मौत) दर्ज की गई हैं। हिरासत में मौतों के मामले में राजस्थान देश में दूसरे स्थान पर है। पहले स्थान पर बिहार है, जहां इसी अवधि में 19 हिरासत में मौतें दर्ज हुई हैं। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल 2021 से 2026 तक राजस्थान में कुल 51 लोगों की हिरासत में मौत हुई है। इस आधार पर राज्य देश में पांचवें स्थान पर है।
सबसे गंभीर तथ्य यह है कि इन 51 मौतों के बावजूद राजस्थान में किसी भी पुलिस अधिकारी या कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई दर्ज नहीं की गई। ऐसे में जगन गुर्जर हत्याकांड के बाद हाईकोर्ट द्वारा उठाए गए सवाल और संसद में सामने आए आंकड़े मिलकर प्रदेश की हिरासत और जेल सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर रहे हैं।
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हाईकोर्ट ने क्या कहा?
जगन गुर्जर हत्याकांड की सुनवाई के दौरान राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा कि यदि हाई सिक्योरिटी जेल के भीतर ही एक कैदी की हत्या हो सकती है तो सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठना स्वाभाविक है। अदालत ने सीसीटीवी कैमरों के काम नहीं करने पर नाराजगी जताते हुए घटना से संबंधित कैमरों की रिकॉर्डिंग और बैकअप पेश करने के निर्देश दिए।
खंडपीठ ने यह भी टिप्पणी की कि मीडिया रिपोर्टों के अनुसार प्रदेश की जेलों से आपराधिक गिरोह संचालित हो रहे हैं और कैदियों तक मोबाइल फोन आसानी से पहुंच रहे हैं। अदालत ने याद दिलाया कि मुख्यमंत्री तक को जेल से धमकी मिल चुकी है, इसके बावजूद सुरक्षा व्यवस्था में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ।
कोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा कि जगन गुर्जर की हत्या के बाद अब तक किस अधिकारी की जिम्मेदारी तय की गई और किन अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। इस मामले की अगली सुनवाई 28 जुलाई को होगी।
इस साल सबसे ज्यादा हिरासत में मौतें
साल 2025-26 में 1राजस्थान में 19 हिरासत में मौतें दर्ज हो चुकी हैं, जो पिछले पांच वर्षों का सबसे बड़ा वार्षिक आंकड़ा है। इससे पहले 2021-22 में 13, 2022-23 में 4, 2023-24 में 7 और 2024-25 में 9 मामले सामने आए थे।
देशभर में इस वर्ष बिहार 19 मामलों के साथ पहले स्थान पर है, जबकि राजस्थान 18 मामलों के साथ दूसरे और उत्तर प्रदेश 15 मामलों के साथ तीसरे स्थान पर है। गुजरात, महाराष्ट्र और पंजाब में 14-14 हिरासत में मौतें दर्ज की गई हैं। पिछले पांच वर्षों के कुल आंकड़ों पर नजर डालें तो महाराष्ट्र 101 मामलों के साथ पहले स्थान पर है। इसके बाद गुजरात (85), बिहार (76), उत्तर प्रदेश (56) और राजस्थान (51) का स्थान है।
एनएचआरसी के नियम क्या कहते हैं?
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) के दिशा-निर्देशों के अनुसार पुलिस या न्यायिक हिरासत में होने वाली हर मौत की सूचना 24 घंटे के भीतर आयोग को देना अनिवार्य है। पोस्टमार्टम की वीडियो रिकॉर्डिंग, मानक प्रारूप में पोस्टमार्टम रिपोर्ट और निष्पक्ष जांच भी अनिवार्य है ताकि लापरवाही, यातना या किसी साजिश की संभावना की जांच हो सके। यदि जांच में किसी सरकारी अधिकारी की लापरवाही सामने आती है तो एनएचआरसी संबंधित सरकार को अभियोजन या अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश करता है।
पूर्व डीजीपी बोले निष्पक्ष जांच जरूरी
राजस्थान के पूर्व पुलिस महानिदेशक भूपेंद्र सिंह का कहना है कि हिरासत में मौत के हर मामले में न्यायिक मजिस्ट्रेट से जांच कराई जाती है और उसी रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होती है। उनके अनुसार हिरासत में मौत बीमारी, आत्महत्या या कथित पुलिस हिंसा जैसी अलग-अलग परिस्थितियों में हो सकती है, इसलिए प्रत्येक मामले की निष्पक्ष एवं स्वतंत्र जांच जरूरी है।
राजस्थान में वर्षवार हिरासत में मौतें
- 2021-22: 13
- 2022-23: 4
- 2023-24: 7
- 2024-25: 9
- 2025-26 (अब तक): 19
पिछले पांच वर्षों (अप्रैल 2021 से मार्च 2026) में हिरासत में मौतों के मामले में महाराष्ट्र सबसे ऊपर रहा, जहां 101 मौतें दर्ज की गईं। इसके बाद गुजरात में 85, बिहार में 76, उत्तर प्रदेश में 56 और राजस्थान में 51 हिरासत में मौतें दर्ज की गईं।