कोटा मातृ मृत्यु प्रकरण: क्या ऑक्सीटॉक्सीन थी मौतों की वजह? जांच रिपोर्ट में क्या निकला सच
कोटा के जेके लोन अस्पताल में पांच प्रसूताओं की मौत की जांच रिपोर्ट सरकार को मिल गई है। अंतिम निष्कर्ष से पहले वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञों का पैनल रिपोर्ट की समीक्षा करेगा।
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कोटा के जेके लोन अस्पताल में सीजेरियन डिलीवरी के बाद हुई पांच महिलाओं की मौत के मामले में जांच रिपोर्ट राजस्थान सरकार को सौंप दी गई है। प्रसूताओं की मौत के कारण जानने के लिए सरकार ने एसएमएस मेडिकल कॉलेज जयपुर, एम्स दिल्ली और कोटा मेडिकल कॉलेज की समितियों को जांच सौंपी थी। जानकारी के अनुसार समितियों ने अब अपनी फाइनल रिपोर्ट सरकार को सौंप दी है। हालांकि सरकार इन रिपोर्ट के मिलने के बावजूद प्रदेश के वरिष्ठ स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञों से भी मामले की जांच करवाने जा रही है।
रिपोर्ट में मौत के कारण इन्हें बताया
कोटा में प्रसूताओं की मौतों को लेकर अमानक दवाओं का मामला भी काफी तेजी से उछला था। खुद स्वास्थ्य मंत्री ने बयान दिया था कि प्रसूताओं को जो ऑक्सीटोक्सीन के इंजेक्शन दिए गए थे उनमें सिर्फ पानी था। लेकिन सूत्रों के अनुसार समितियों की रिपोर्ट में महिलाओं की मौतों के जो कारण बताए गए हैं उनमें एक महिला की मौत पल्मोनरी एम्बोलिज्म के कारण हुई, जबकि दूसरे मामले में संक्रमण बढ़कर सेप्टीसीमिया और मल्टी ऑर्गन फेल्योर तक पहुंच गया। एक अन्य मामले में गर्भाशय संक्रमण और उपचार प्रक्रिया को लेकर सवाल उठे हैं। रिपोर्ट में एक महिला की मौत का कारण पूर्व से मौजूद हृदय रोग तथा एक अन्य की मृत्यु प्रसव के बाद अत्यधिक रक्तस्राव बताया गया है।
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मेडिकल रिकॉर्ड में मिली खामियां
जांच के दौरान अस्पताल में मेडिकल रिकॉर्ड और उपचार संबंधी दस्तावेजों के रखरखाव में भी कई खामियां सामने आई हैं। कुछ मामलों में मरीजों की निगरानी और उपचार से जुड़े महत्वपूर्ण विवरण रिकॉर्ड में दर्ज नहीं मिले, जिससे अस्पताल की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हुए हैं। स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने रिपोर्ट मिलने की पुष्टि करते हुए कहा कि सरकार पूरे मामले की गहन समीक्षा कर रही है। उन्होंने कहा कि कई मामलों में मौत के पीछे एक से अधिक कारण हो सकते हैं, इसलिए विशेषज्ञ चिकित्सकों की राय लेना जरूरी है।
खींवसर ने कहा कि वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञ मेडिकल रिकॉर्ड, जांच रिपोर्ट और अन्य तथ्यों का अध्ययन कर अपनी राय देंगे। इसके बाद ही सरकार अंतिम निष्कर्ष पर पहुंचेगी और यदि किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। सरकार का कहना है कि विशेषज्ञों की समीक्षा पूरी होने के बाद पूरे मामले की जानकारी सार्वजनिक की जाएगी। साथ ही मातृ स्वास्थ्य सेवाओं, मरीजों की निगरानी व्यवस्था और रिकॉर्ड प्रबंधन में सुधार के लिए आवश्यक कदम भी उठाए जाएंगे।