फंड पर विवाद: कांग्रेस ने भाजपा पर दोहरा मापदंड अपनाने का लगाया आरोप, सांसदों के फंड खर्च पर सियासी टकराव तेज
भाजपा के एमपीएलएडी (MPLAD) के आरोपों पर कांग्रेस ने पलटवार किया है। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि जब बीजेपी सांसद भी बाहर फंड देते रहे हैं, तो कांग्रेस पर दोहरा मापदंड क्यों? चलिए बता रहे हैं कि और क्या-क्या आरोप लगाए गए हैं?
विस्तार
कांग्रेस और भाजपा के बीच सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास निधि (एमपी-लैड) को लेकर सियासी टकराव तेज हो गया है। भाजपा द्वारा तीन कांग्रेस सांसदों पर हरियाणा की एक विधानसभा सीट में कथित तौर पर एमपी-लैड फंड खर्च करने का आरोप लगाए जाने के एक दिन बाद कांग्रेस ने पलटवार किया है। कांग्रेस ने भाजपा पर दोहरा मापदंड अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि खुद भाजपा के कई सांसद भी अपने क्षेत्र से बाहर एमपी-लैड फंड खर्च कर चुके हैं।
राजस्थान कांग्रेस के महासचिव आरसी चौधरी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर भाजपा और उसके आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय को घेरते हुए सवाल उठाया कि क्या नैतिकता और नियम सिर्फ कांग्रेस पर ही लागू होते हैं। उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा अध्यक्ष से पूछा कि यदि अपने क्षेत्र से बाहर जनकल्याण के लिए फंड देना ‘लूट’ है, तो वही काम करने वाले भाजपा सांसदों पर कार्रवाई क्यों नहीं होती।
'क्या यह सरकार की आर्थिक स्थिति पर सवाल नहीं उठाता'
चौधरी ने आठ भाजपा सांसदों की सूची साझा की, जिनमें राजस्थान के तीन सांसद भी शामिल हैं। सूची के अनुसार, इन सांसदों ने उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, हिमाचल प्रदेश और गुजरात जैसे राज्यों में अपने एमपी-लैड फंड से काम कराए हैं। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में भी दूसरे सांसदों को फंड देना पड़ रहा है, तो क्या यह सरकार की आर्थिक स्थिति पर सवाल नहीं उठाता।
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दरअसल, भाजपा आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने कांग्रेस सांसद राहुल कस्वां (चूरू), बृजेंद्र सिंह ओला (झुंझुनूं) और संजना जाटव (भरतपुर) पर आरोप लगाया था कि उन्होंने हरियाणा के कैथल विधानसभा क्षेत्र में एमपी-लैड फंड जारी किया, जो कांग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला के बेटे की सीट है। मालवीय ने इसे भाई-भतीजावाद और सार्वजनिक धन की खुली लूट बताया था।
राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित
इस मामले में खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री सुमित गोदारा ने भी कांग्रेस सांसदों पर जांच की मांग की है। वहीं कांग्रेस का कहना है कि एमपी-लैड योजना के दिशा-निर्देशों के तहत सांसदों को अपने क्षेत्र से बाहर भी सीमित राशि खर्च करने की अनुमति है, इसलिए इसे भ्रष्टाचार बताना गलत और राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित है।