NGT का बड़ा खुलासा: राजस्थान में पौधरोपण के नाम पर गड़बड़ी, 10 हजार पौधे लगाए, एक भी नहीं बचा
NGT ने राजस्थान के कोटा बाईपास पौधरोपण में गंभीर गड़बड़ियां पकड़ीं। फर्जी बिल, पौधों की संख्या में विसंगति, असफल पौधरोपण और सरकारी-CAMPA फंड के कथित दुरुपयोग पर कार्रवाई के निर्देश दिए।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
राजस्थान में कोटा बाईपास के किनारे ग्रीन बेल्ट विकसित करने के लिए किए गए पौधरोपण कार्यों में गंभीर अनियमितताओं का मामला सामने आया है। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) ने इसे बेहद गंभीर मामला बताते हुए सरकारी और CAMPA फंड के कथित दुरुपयोग, फर्जी बिलों, असफल पौधरोपण और रिकॉर्ड में विसंगतियों पर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
NGT की सेंट्रल जोन बेंच, भोपाल ने 14 अगस्त 2026 के आदेश में पर्यावरण विभाग के प्रमुख सचिव और राजस्थान के प्रधान मुख्य वन संरक्षक को मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने के निर्देश दिए। अधिकरण ने कथित गबन, सरकारी धन के दुरुपयोग और पर्यावरणीय नियमों के उल्लंघन पर प्रभावी कार्रवाई के साथ राशि की रिकवरी के निर्देश भी दिए हैं। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार अब इस मामले में राज्य सरकार की तरफ से भी रिपोर्ट तलब कर ली गई है।
10 हजार पौधे लगाए, लेकिन एक भी जीवित नहीं मिला
मामला कोटा बाईपास के लिए डायवर्ट की गई वन भूमि पर Mitigative Measures Scheme के तहत विकसित की जाने वाली ग्रीन बेल्ट से जुड़ा है। वन अधिकारियों की निरीक्षण रिपोर्टों में कई स्थानों पर पौधरोपण पूरी तरह विफल पाया गया।
27 मई 2024 को लखावा-VIII के निरीक्षण में 100 से भी कम पौधे जीवित मिले। रिपोर्ट में इसे “completely failed plantation” बताया गया और आशंका जताई गई कि अधिकांश भुगतान ऐसा काम दिखाकर निकाल लिया गया, जो वास्तव में हुआ ही नहीं। NGT ने रिकॉर्ड किया कि एक स्थान पर 10 हजार पौधे लगाए जाने का दावा किया गया, लेकिन निरीक्षण के दौरान एक भी पौधा जीवित नहीं मिला।
यह भी पढें- Chittorgarh: शिक्षिका के तबादले से नाराज छात्राओं ने स्कूल गेट पर ताला जड़ा,विधायक से बातचीत के बाद मामला शांत
8 हजार पौधे लगाए, लेकिन रिकॉर्ड में 5,500 गड्ढे
मामले में सबसे चौंकाने वाली विसंगतियों में से एक पौधों और गड्ढों की संख्या से जुड़ी है। NGT के मुताबिक एक स्थान पर 15 से 25 जुलाई 2022 के बीच 8 हजार पौधे लगाए जाने का रिकॉर्ड है, जबकि बिल में उसी अवधि के बाद केवल 5,500 गड्ढे खोदने का काम दर्ज किया गया।
अधिकरण ने इस विरोधाभास को गंभीरता से लेते हुए कहा कि पौधों की संख्या गड्ढों से अधिक कैसे हो सकती है। रिकॉर्ड से ऐसा प्रतीत होता है कि वास्तविक काम किए बिना बिल तैयार कर राशि निकाल ली गई।
एक ही रास्ते के रखरखाव के लिए दो बार बिल
NGT ने यह भी पाया कि एक ही रास्ते के रखरखाव से संबंधित काम के लिए कथित तौर पर दो अलग-अलग बिलों से भुगतान लिया गया। 16 नवंबर 2022 के बिल नंबर-3 और 2 अगस्त 2023 के बिल नंबर-1 में रास्ते के रखरखाव का काम दर्ज था, जबकि निरीक्षण के दौरान वह रास्ता मौके पर मिला ही नहीं।
अधिकरण ने इसे फर्जी बिल प्रस्तुत करने और सरकारी धन के कथित दुरुपयोग, भ्रष्टाचार या गबन का स्पष्ट मामला माना।
21.42 लाख रुपये के रखरखाव पर भी सवाल
लखावा-VIII की दोबारा जांच में भी पौधरोपण पूरी तरह विफल पाया गया। रिपोर्ट में कहा गया कि रखरखाव पर खर्च किए गए 21.42 लाख रुपये का काम मौके पर नहीं मिला। इसे कथित धोखाधड़ी और सरकारी धन के गबन से जोड़ते हुए जिम्मेदार अधिकारियों और फर्जी बिल तैयार करने वालों से पूरी राशि की वसूली की सिफारिश की गई।
दूसरे-तीसरे साल में भी नए पौधे लगाने का दावा
मई 2025 में लखावा-I से 8 तक दूसरे और तीसरे वर्ष के रखरखाव की जांच के लिए गठित संयुक्त टीम ने पाया कि अधिकांश जीवित पौधे नए लगाए गए लग रहे थे। ज्यादातर पौधे दो फीट से छोटे थे और उनकी कॉलर मोटाई पेंसिल से भी कम थी। पौधों के आसपास ताजा JCB का काम भी मिला।
टीम ने इससे निष्कर्ष निकाला कि पुराने पौधों के बजाय बड़ी संख्या में नए पौधे लगाए गए थे। NGT ने कहा कि रिपोर्टों से संकेत मिलता है कि दूसरे और तीसरे वर्ष के रखरखाव के दौरान लगभग सभी पौधों को दोबारा या नए सिरे से लगाया गया, यानी पहले का पौधरोपण विफल हो चुका था।
2,500-3,000 पौधे गायब या मृत
लखावा-5, 6 और 7 में 2021-22 और 2022-23 के दौरान किए गए पौधरोपण में भी गंभीर कमियां मिलीं। करीब 2,500 से 3,000 पौधे मृत या मौके से गायब पाए गए। जून 2024 में करीब 2,500 नए पौधे ट्रैक्टर-ट्रॉली से लाकर लगाए गए। इनका पहले के पौधरोपण रिकॉर्ड में उल्लेख नहीं था। बाद में केवल 2,366 पौधे जीवित मिले। NGT ने कहा कि यदि नए पौधे नहीं लगाए जाते तो ये पौधे भी मौके पर नहीं मिलते।
मेजरमेंट बुक में भी रिकॉर्ड पर सवाल
अधिकरण ने मेजरमेंट बुक के रिकॉर्ड को भी गंभीरता से लिया। पेज नंबर 5 के बाद पेज 7 और 8 खाली रखे गए, जबकि 20 अगस्त 2022 के बिल में 1 अप्रैल से 15 अगस्त 2022 के बीच 5,500 मैनुअल गड्ढे खोदने का उल्लेख था। वहीं दूसरे रिकॉर्ड में इसी अवधि के दौरान 8 हजार पौधे लगाए जाने की बात दर्ज थी। अशंका जताई जा रही है कि यह सब वास्तविक काम किए बिना बिल तैयार कर राशि निकालने के लिए किया गया था।
बारिश के बाहर पौधरोपण पर भी सवाल
13 अक्टूबर 2025 की रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि कुछ पौधरोपण नवंबर-दिसंबर 2023 और मार्च-जून 2024 में किया गया। NGT ने सवाल उठाया कि जल संकट वाले जिले में बारिश के मौसम के बाहर पौधरोपण करने से पौधों के जीवित रहने की संभावना कम होती है। अधिकरण ने आशंका जताई कि कम सर्वाइवल का एक कारण गलत समय पर पौधरोपण हो सकता है या फिर वास्तविक पौधरोपण किए बिना फर्जी बिल तैयार किए गए हो सकते हैं।
रॉकी इलाके के लिए तय मॉडल भी लागू नहीं किया
राजस्थान वन विभाग की 24 दिसंबर 2024 की रिपोर्ट में भी कई खामियां दर्ज की गईं। विभाग ने माना कि जिम्मेदार अधिकारियों ने अपने दायित्वों का सही तरीके से निर्वहन नहीं किया और पौधरोपण का उद्देश्य पूरा नहीं हुआ।
लखावा-8 में पथरीली जमीन के लिए निर्धारित डबल-ब्लास्टिंग और मैनुअल पिट मॉडल लागू नहीं किया गया। सभी गड्ढे मैनुअली तैयार किए गए। यहां पौधों का सर्वाइवल महज 29.6 फीसदी रहा। रिपोर्ट के अनुसार ब्लास्टिंग करने वाला ठेकेदार काम बीच में छोड़कर चला गया, लेकिन उसके खिलाफ प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई और अधूरा काम भी पूरा नहीं कराया गया।
वन भूमि पर बिना अनुमति सड़क बनाने का मामला
NGT ने यह भी नोट किया कि वन भूमि पर सक्षम प्राधिकारी की अनुमति के बिना सड़क बनाई गई, जिससे पौधरोपण को नुकसान पहुंचा। बाद में सड़क तो हटा दी गई, लेकिन इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई।
NGT ने कहा- पौधरोपण बजट का उद्देश्य ही विफल हुआ
अधिकरण ने कहा कि उपलब्ध रिपोर्टों से स्पष्ट है कि जिस उद्देश्य से पौधरोपण के लिए बजट आवंटित किया गया था, वह पूरा नहीं हुआ। प्रस्तावित ग्रीन बेल्ट प्रभावी रूप से विकसित नहीं हो सकी, जबकि पौधरोपण और रखरखाव के लिए आवंटित धन के कथित दुरुपयोग और गबन के संकेत मिले।
NGT ने पर्यावरण विभाग के प्रमुख सचिव और प्रधान मुख्य वन संरक्षक को जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ प्रभावी अनुशासनात्मक कार्रवाई करने, दुरुपयोग या गबन की गई राशि की वसूली सुनिश्चित करने और CAMPA फंड का उचित उपयोग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। अधिकरण ने दो सप्ताह के भीतर अनुपालन रिपोर्ट पेश करने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई 9 सितंबर 2026 को होगी।