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Rajasthan : सरिस्का रिजर्व के आसपास खनन पर एनजीटी सख्त, तीन सदस्यीय समिति गठित; छह सप्ताह में मांगी रिपोर्ट
Mon, 06 Jul 2026 07:27 AM IST
Sourabh Bhatt
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
Published by: Sourabh Bhatt
Updated Mon, 06 Jul 2026 07:27 AM IST
सार
एनजीटी ने सरिस्का टाइगर रिजर्व के आसपास खनन गतिविधियों की जांच के लिए तीन सदस्यीय संयुक्त समिति गठित की। समिति छह सप्ताह में रिपोर्ट देगी। मामले की अगली सुनवाई 1 सितंबर को होगी।
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सरिस्का टाइगर रिजर्व
- फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) की सेंट्रल ज़ोन बेंच, भोपाल ने अलवर जिले में सरिस्का टाइगर रिजर्व के आसपास संचालित खनन गतिविधियों को लेकर उठाए गए पर्यावरणीय मुद्दों को गंभीर मानते हुए विस्तृत जांच के आदेश दिए हैं। ट्रिब्यूनल ने तीन सदस्यीय संयुक्त समिति गठित कर छह सप्ताह के भीतर तथ्यात्मक रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं।
मूल आवेदन संख्या 129/2026 में याचिकाकर्ता पवन सिंह ने आरोप लगाया है कि ग्राम झीरी और आसपास के क्षेत्रों में स्थित कुछ खनन पट्टों को पहले राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड (एनबीडब्ल्यूएल) की अनिवार्य स्वीकृति नहीं मिलने के कारण निरस्त या बंद कर दिया गया था, क्योंकि वे सरिस्का टाइगर रिजर्व के नियामक दायरे में आते थे। बाद में कथित तौर पर दूरी संबंधी नए प्रमाण-पत्र के आधार पर इन्हीं खनन परियोजनाओं को दोबारा अनुमति दे दी गई।
याचिका में कहा गया है कि पहले संबंधित खनन पट्टों की दूरी सरिस्का वन्यजीव अभयारण्य से 10 किलोमीटर से कम बताई गई थी, जिसके कारण उन्हें अनुमति नहीं मिली। बाद में एक अन्य अधिकारी की रिपोर्ट में यही दूरी 10 किलोमीटर से अधिक दर्शाई गई, जिसके आधार पर खनन की अनुमति जारी कर दी गई। याचिकाकर्ता ने इस विरोधाभास की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग की है।
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यह भी पढें- राजस्थान: एनएच-62 पर भीषण सड़क हादसा, आर्मी ट्रक और एम्बुलेंस में भिड़ंत; महिला मरीज समेत तीन लोगों की मौत
मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति श्यो कुमार सिंह (न्यायिक सदस्य) और विशेषज्ञ सदस्य सुधीर कुमार चतुर्वेदी की पीठ ने की। पीठ ने माना कि याचिका में पर्यावरण संरक्षण से जुड़े महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए गए हैं, जिनकी जांच आवश्यक है।
एनजीटी ने प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव), राजस्थान को निर्देश दिया है कि वरिष्ठ अधिकारियों के माध्यम से संबंधित खनन पट्टों और सरिस्का टाइगर रिजर्व के बीच वास्तविक दूरी का वैज्ञानिक एवं तथ्यात्मक सत्यापन कराया जाए।
साथ ही ट्रिब्यूनल ने तीन सदस्यीय संयुक्त समिति गठित की है, जिसमें मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक, राजस्थान का एक वरिष्ठ प्रतिनिधि, जिला कलेक्टर अलवर का प्रतिनिधि तथा राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का एक प्रतिनिधि शामिल होगा। समिति स्थल निरीक्षण कर छह सप्ताह के भीतर तथ्यात्मक रिपोर्ट और आवश्यक कार्रवाई संबंधी सुझाव ट्रिब्यूनल को सौंपेगी। राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को समिति की नोडल एजेंसी बनाया गया है। एनजीटी ने सभी प्रतिवादियों को नोटिस जारी करते हुए छह सप्ताह में जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 1 सितंबर 2026 को होगी।
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मूल आवेदन संख्या 129/2026 में याचिकाकर्ता पवन सिंह ने आरोप लगाया है कि ग्राम झीरी और आसपास के क्षेत्रों में स्थित कुछ खनन पट्टों को पहले राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड (एनबीडब्ल्यूएल) की अनिवार्य स्वीकृति नहीं मिलने के कारण निरस्त या बंद कर दिया गया था, क्योंकि वे सरिस्का टाइगर रिजर्व के नियामक दायरे में आते थे। बाद में कथित तौर पर दूरी संबंधी नए प्रमाण-पत्र के आधार पर इन्हीं खनन परियोजनाओं को दोबारा अनुमति दे दी गई।
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याचिका में कहा गया है कि पहले संबंधित खनन पट्टों की दूरी सरिस्का वन्यजीव अभयारण्य से 10 किलोमीटर से कम बताई गई थी, जिसके कारण उन्हें अनुमति नहीं मिली। बाद में एक अन्य अधिकारी की रिपोर्ट में यही दूरी 10 किलोमीटर से अधिक दर्शाई गई, जिसके आधार पर खनन की अनुमति जारी कर दी गई। याचिकाकर्ता ने इस विरोधाभास की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग की है।
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मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति श्यो कुमार सिंह (न्यायिक सदस्य) और विशेषज्ञ सदस्य सुधीर कुमार चतुर्वेदी की पीठ ने की। पीठ ने माना कि याचिका में पर्यावरण संरक्षण से जुड़े महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए गए हैं, जिनकी जांच आवश्यक है।
एनजीटी ने प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव), राजस्थान को निर्देश दिया है कि वरिष्ठ अधिकारियों के माध्यम से संबंधित खनन पट्टों और सरिस्का टाइगर रिजर्व के बीच वास्तविक दूरी का वैज्ञानिक एवं तथ्यात्मक सत्यापन कराया जाए।
साथ ही ट्रिब्यूनल ने तीन सदस्यीय संयुक्त समिति गठित की है, जिसमें मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक, राजस्थान का एक वरिष्ठ प्रतिनिधि, जिला कलेक्टर अलवर का प्रतिनिधि तथा राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का एक प्रतिनिधि शामिल होगा। समिति स्थल निरीक्षण कर छह सप्ताह के भीतर तथ्यात्मक रिपोर्ट और आवश्यक कार्रवाई संबंधी सुझाव ट्रिब्यूनल को सौंपेगी। राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को समिति की नोडल एजेंसी बनाया गया है। एनजीटी ने सभी प्रतिवादियों को नोटिस जारी करते हुए छह सप्ताह में जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 1 सितंबर 2026 को होगी।