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Rajasthan: किरोड़ी को क्यों याद आए 2008 के दिन? क्या फिर बदलने वाली है सियासी राह? बयान के बाद बढ़ी सरगर्मी

Fri, 26 Jun 2026 05:34 PM IST
Sourabh Bhatt न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर Published by: Sourabh Bhatt Updated Fri, 26 Jun 2026 05:34 PM IST
सार

पांचना बांध आंदोलन के मंच से किरोड़ी लाल मीणा ने 2008 की राजनीतिक घटनाओं को याद किया। उनके बयान से भाजपा से दूरी और पूर्वी राजस्थान में स्वतंत्र राजनीतिक ताकत के संकेतों पर चर्चा तेज हो गई।


 

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“Once Betrayed by His Party, Is Kirori Lal Meena Preparing for a Political Plan B?”
किरोड़ी के बयान से बढ़ी हलचल - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

क्या कृषि मंत्री किरोड़ी लाल मीणा 2 दशक पुरानी  स्थिति में पहुंच रहे हैं? क्या उन्हें फिर वही राजनीतिक खतरा नजर आ रहा है? ये दो बड़े सवाल हैं जिनके इर्द गिर्द आने वाले समय में पूर्वी राजस्थान की सियासत में कई नए जोड़-घटाव देखने को मिल सकते हैं। ऐसा लिखने के पीछे किरोड़ीलाल मीणा का वह बयान है जो उन्होंने पांचना बांध को लेकर गंगापुर में बुलाई सभा में दिया। किरोड़ी ने कहा....मैं दूध का जला हूँ, इसलिए छाछ भी फूंक-फूंक कर पीता हूं। 2006, 2007 और 2008, मीणा-मीना विवाद और आरक्षण आंदोलनों को मैं भूला नहीं हूं।

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उस समय विधानसभा में हमारे 33 विधायक थे। सभी ने कहा था कि यदि आरक्षण पर कोई आंच आई तो वे अपने पद छोड़ देंगे। मैंने अपने वचन का पालन करते हुए मंत्री पद से इस्तीफा दिया। इसके बाद मुझे पार्टी से निकाल दिया गया और मेरा टिकट भी काट दिया गया। लेकिन मैं उस संघर्ष से पीछे नहीं हटा। उस वक्त मेरी डबूती हुई नैय्या को पार लगाने का काम टोडाभीम की जनता ने किया। मुझे निर्दलीय चुनाव जितवा कर विधानसभा भेजा। ”क्या कृषि मंत्री किरोड़ीलाल मीणा फिर से दो दशक पुरानी स्थिति में पहुंच रहे हैं? क्या उन्हें फिर वही राजनीतिक खतरा नजर आ रहा है? ये दो बड़े सवाल हैं, जिनके इर्द-गिर्द आने वाले समय में पूर्वी राजस्थान की सियासत में कई नए जोड़-घटाव देखने को मिल सकते हैं। 
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क्या कृषि मंत्री किरोड़ीलाल मीणा फिर से दो दशक पुरानी स्थिति में पहुंच रहे हैं? क्या उन्हें फिर वही राजनीतिक खतरा नजर आ रहा है? ये दो बड़े सवाल हैं, जिनके इर्द-गिर्द आने वाले समय में पूर्वी राजस्थान की सियासत में कई नए जोड़-घटाव देखने को मिल सकते हैं। 
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इसके पीछे किरोड़ीलाल मीणा का वह बयान है, जो उन्होंने पांचना बांध को लेकर गंगापुर में बुलाई सभा में दिया। किरोड़ी ने कहा- मैं दूध का जला हूं, इसलिए छाछ भी फूंक-फूंककर पीता हूं। 2006, 2007 और 2008, मीणा-मीना विवाद और आरक्षण आंदोलनों को मैं भूला नहीं हूं। उस समय विधानसभा में हमारे 33 विधायक थे। सभी ने कहा था कि यदि आरक्षण पर कोई आंच आई तो वे अपने पद छोड़ देंगे। मैंने अपने वचन का पालन करते हुए मंत्री पद से इस्तीफा दिया। इसके बाद मुझे पार्टी से निकाल दिया गया और मेरा टिकट भी काट दिया गया लेकिन मैं उस संघर्ष से पीछे नहीं हटा। उस वक्त मेरी डबूती हुई नैय्या को पार लगाने का काम टोडाभीम की जनता ने किया और मुझे निर्दलीय चुनाव जितवाकर विधानसभा भेजा। 
  
क्यों महत्वपूर्ण है यह बयान?
किरोड़ीलाल मीणा फिलहाल भाजपा सरकार में कृषि मंत्री हैं, लेकिन पिछले डेढ़ साल में उनकी राजनीति कई बार पार्टी लाइन से अलग दिखाई दी है। मौजूदा खाद-बीज कंपनियों में छापेमारी को लेकर किरोड़ीलाल मीणा उस वक्त विवादों में आ गए जब एसीबी ने बीज निगम के एक निदेशक को गिरफ्तार कर लिया।

मामले में उन्होंने सीधे तौर पर सरकार में से किसी का नाम नहीं लिया लेकिन यह बयान जरूर दिया कि एसीबी और जांच अधिकारी 'किसी के दबाव' में काम कर रहे हैं। उनका कहना था कि यह सब उनकी छवि खराब करने के लिए एक राजनीतिक हथियार की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है।

यह भी पढ़ें- घी के मालपुए न बनाने पर समाज से निकाला: मृत्यु भोज में परोसा था साधारण खाना; 43 परिवारों का हुक्का-पानी बंद

इससे पहले भी वे अपनी सरकार पर ही फोन टैपिंग जैसे आरोप लगा चुके हैं। उन्होंने दावा किया था कि उनका फोन टैप किया जा रहा है और सीआईडी उनके पीछे लगाई गई है। यह मुद्दा विधानसभा में सरकार की किरकिरी की बड़ी वजह बना।

क्या टोडाभीम पर फिर से है किरोड़ी की नजर?
2008 में बीजेपी से टिकट कटने के बाद किरोड़ी ने टोडाभीम से निर्दलीय चुनाव जीतकर राजनीतिक इतिहास रचा था। पांचना की सभा में किरोड़ी ने इसका जिक्र करते हुए कहा था कि एसटी आरक्षण के मुद्दे पर जब उन्होंने सरकार से इस्तीफा दिया तो 2008 में टोडाभीम की जनता ने उन्हें निर्दलीय चुनाव जितवाकर आर्शीवाद दिया। राजनीतिक जानकार किरोड़ी के इस बयान को आने वाले समय का बड़ा संकेत मान रहे हैं।



बीजेपी से मोहभंग या दबाव की राजनीति
वसुंधरा राजे के पहले कार्यकाल में किरोड़ी सरकार में मंत्री बनाए गए लेकिन राजे से मतभेदों के चलते किरोड़ी की सरकार और बीजेपी दोनों से रवानगी हो गई। इसके करीब 10 साल बाद किरोड़ी की बीजेपी में वापसी हो पाई लेकिन मौजूदा हालातों में किरोड़ी पार्टी में एक बार फिर अलग-थलग नजर आने लगे हैं। ऐसे में अगले विधानसभा चुनावों में किरोड़ी क्या विकल्प चुनेंगे इस पर सबकी नजरें हैं।

क्या बोले टोडाभीम विधायक
इधर टोडाभीम विधायक  घनश्याम मेहर का कहना है कि 2008 में किरोड़ीलाल मीणा यहां से जीते इसके पीछे कुछ और वजह थी। उस वक्त यहां धानक्या जाति के प्रत्याशी ने भी चुनाव लड़ा था। इसलिए चुनाव जातिगत गोलबंदी में चला गया और किरोड़ी जीत गए लेकिन अब यहां वह स्थिति नहीं है इसलिए किरोड़ीलाल मीणा अब यहां से चुनाव नहीं जीत पाएंगे। रही बात पांचना बांध की तो वह हाईकोर्ट के आदेश से खुला है। वह सिर्फ जनता का आंदोलन था। इसमें किसी का कोई लेना-देना नहीं  है।

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