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Rajasthan News: पंचायत व निकाय चुनाव कब होंगे, यह तय नहीं; फिर भी दोनों दल क्यों उतर गए चुनावी मोड में?
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
Published by: Sourabh Bhatt
Updated Thu, 18 Jun 2026 03:32 PM IST
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सार
Rajasthan News: राजस्थान में पंचायत-निकाय चुनावों की तारीख फिर टलती नजर आ रही है, बावजूद इसके दोनों दलों ने चुनावी तैयारी क्यूं तेज कर दी। बीजेपी बूथ संगठन मजबूत करने और कांग्रेस रिपोर्ट कार्ड मॉडल पर काम कर रही है।
पंचायत चुनाव
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद राजस्थान में पंचायत चुनाव 31 जुलाई की समय सीमा में होते नजर नहीं आ रहे हैं। राजस्थान में पंचायत व निकाय चुनावों को लेकर सरकार की ओर से गठित ओबीसी आयोग की रिपोर्ट की रिपोर्ट अब तक सरकार को नहीं मिली है।
इधर बीजेपी नेताओं के बयान यही इशारा कर रहे हैं कि चुनाव साल के आखिर में ही होगी। मामले से जुड़े एक अधिकारी ने कहा कि पंचायत और निकाय चुनाव साल के आखिर में ही होंगे। हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ एक और एप्लीकेशन दाखिल कर दी जाएगी। इधर मामले में याचिकाकर्ता संयम लोढ़ा ने सुप्रीम कोर्ट में पहले ही कैविएट दायर कर दी थी। ताकि सरकार यदि हाईकोर्ट के फैसले को लेकर सुप्रीम कोर्ट जाए तो पहले उन्हें सुना जाए।
इधर मामले में पंचायती राज मंत्री ओटाराम देवासी का बयान भी आया है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार तो पहले भी यही चाहती थी कि पंचायत-निकाय चुनाव समय पर हो। OBC आयोग की रिपोर्ट नहीं आने की वजह से चुनाव कराने में विलंब हुआ।
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OBC आयोग ने सरकार से कार्यकाल बढ़ाने की मांग की थी। सरकार ने 30 सितंबर तक आयोग का कार्यकाल बढ़ा दिया है। कोर्ट के आदेशों के पालन के तहत आयोग को 20 जून तक OBC आरक्षण के आंकड़े देने हैं। हमें उम्मीद है कि इस बार आयोग अपनी रिपोर्ट सौंप देगा।
इन सबके बीच बीजेपी और कांग्रेस ने इन चुनावों को लेकर अपनी-अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। बीजेपी बूथ मजबूत करने की योजना बना रही है तो कांग्रेस ने इस बार नया फार्मूला तैयार कर लिया है।
यह भी पढें- Dausa News: ट्रेलर ने पुलिस की बोलेरो को मारी टक्कर, तीन पुलिसकर्मी घायल; दो गंभीर घायलों को जयपुर किया रेफर
संगठन मजबूत करने में जुटी बीजेपी, ‘समन्वय-चुनाव-प्रचार’ पर फोकस
बीजेपी ने संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने की कवायद तेज कर दी है। पार्टी का फोकस संगठन और सरकार के बीच बेहतर समन्वय, कार्यकर्ताओं की सक्रियता बढ़ाने तथा केंद्र और राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रचार-प्रसार पर है।
बीजेपी ने आगामी चुनावों को देखते हुए तीन स्तरीय मिशन तैयार किया है, जिसमें संगठनात्मक समन्वय, चुनावी तैयारी और योजनाओं के व्यापक प्रचार को प्राथमिकता दी गई है। पार्टी के अनुसार प्रदेशभर में बूथ समितियों को सक्रिय किया जा रहा है और नए कार्यकर्ताओं को जोड़ने पर भी जोर है।
पार्टी सूत्रों के मुताबिक प्रदेश में 61 हजार से अधिक बूथों पर संगठन की सक्रियता बढ़ाने का अभियान चलाया जा रहा है। इसके साथ ही केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं के लाभार्थियों तक पहुंच बनाकर चुनावी माहौल तैयार करने की रणनीति पर काम किया जा रहा है।
बीजेपी नेतृत्व का मानना है कि मजबूत बूथ संगठन और सरकार की उपलब्धियों के प्रचार के दम पर आगामी स्थानीय निकाय और पंचायत चुनावों में बेहतर प्रदर्शन किया जा सकेगा।
यह भी पढें- Dausa News: ट्रेलर ने पुलिस की बोलेरो को मारी टक्कर, तीन पुलिसकर्मी घायल; दो गंभीर घायलों को जयपुर किया रेफर
कांग्रेस का नया फॉर्मूला, नेताओं और पदाधिकारियों की होगी रिपोर्ट कार्ड से मॉनिटरिंग
वहीं कांग्रेस ने भी इस बार नया फार्मूला तैयार किया है। आगामी पंचायत और निकाय चुनावों को देखते हुए कांग्रेस संगठन में जवाबदेही बढ़ाने की तैयारी कर रही है। पार्टी ने नेताओं और पदाधिकारियों के प्रदर्शन का आकलन करने के लिए ‘रिपोर्ट कार्ड मॉडल’ लागू करने का फैसला किया है।
कांग्रेस संगठन अब जिला, ब्लॉक और विधानसभा स्तर तक पदाधिकारियों की सक्रियता की नियमित समीक्षा करेगा। पार्टी की योजना कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों को उनकी जिम्मेदारियों के आधार पर रेटिंग देने की है। इसके जरिए जमीनी स्तर पर संगठन की मजबूती और चुनावी तैयारियों का मूल्यांकन किया जाएगा।
सूत्रों के अनुसार विधानसभा से लेकर ब्लॉक स्तर तक पदाधिकारियों को क्षेत्रीय गतिविधियों, जनसंपर्क अभियानों और संगठनात्मक कार्यक्रमों के आधार पर अंक दिए जाएंगे। पार्टी की कोशिश है कि निष्क्रिय पदाधिकारियों की पहचान कर संगठन में जवाबदेही तय की जाए।
कांग्रेस नेतृत्व का मानना है कि रिपोर्ट कार्ड व्यवस्था से कार्यकर्ताओं की सक्रियता बढ़ेगी और निकाय व पंचायत चुनावों में पार्टी को संगठनात्मक लाभ मिलेगा। फोटो, खबरों और जमीनी गतिविधियों के आधार पर भी पदाधिकारियों का मूल्यांकन किए जाने की तैयारी है।
इधर बीजेपी नेताओं के बयान यही इशारा कर रहे हैं कि चुनाव साल के आखिर में ही होगी। मामले से जुड़े एक अधिकारी ने कहा कि पंचायत और निकाय चुनाव साल के आखिर में ही होंगे। हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ एक और एप्लीकेशन दाखिल कर दी जाएगी। इधर मामले में याचिकाकर्ता संयम लोढ़ा ने सुप्रीम कोर्ट में पहले ही कैविएट दायर कर दी थी। ताकि सरकार यदि हाईकोर्ट के फैसले को लेकर सुप्रीम कोर्ट जाए तो पहले उन्हें सुना जाए।
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इधर मामले में पंचायती राज मंत्री ओटाराम देवासी का बयान भी आया है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार तो पहले भी यही चाहती थी कि पंचायत-निकाय चुनाव समय पर हो। OBC आयोग की रिपोर्ट नहीं आने की वजह से चुनाव कराने में विलंब हुआ।
OBC आयोग ने सरकार से कार्यकाल बढ़ाने की मांग की थी। सरकार ने 30 सितंबर तक आयोग का कार्यकाल बढ़ा दिया है। कोर्ट के आदेशों के पालन के तहत आयोग को 20 जून तक OBC आरक्षण के आंकड़े देने हैं। हमें उम्मीद है कि इस बार आयोग अपनी रिपोर्ट सौंप देगा।
इन सबके बीच बीजेपी और कांग्रेस ने इन चुनावों को लेकर अपनी-अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। बीजेपी बूथ मजबूत करने की योजना बना रही है तो कांग्रेस ने इस बार नया फार्मूला तैयार कर लिया है।
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संगठन मजबूत करने में जुटी बीजेपी, ‘समन्वय-चुनाव-प्रचार’ पर फोकस
बीजेपी ने संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने की कवायद तेज कर दी है। पार्टी का फोकस संगठन और सरकार के बीच बेहतर समन्वय, कार्यकर्ताओं की सक्रियता बढ़ाने तथा केंद्र और राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रचार-प्रसार पर है।
बीजेपी ने आगामी चुनावों को देखते हुए तीन स्तरीय मिशन तैयार किया है, जिसमें संगठनात्मक समन्वय, चुनावी तैयारी और योजनाओं के व्यापक प्रचार को प्राथमिकता दी गई है। पार्टी के अनुसार प्रदेशभर में बूथ समितियों को सक्रिय किया जा रहा है और नए कार्यकर्ताओं को जोड़ने पर भी जोर है।
पार्टी सूत्रों के मुताबिक प्रदेश में 61 हजार से अधिक बूथों पर संगठन की सक्रियता बढ़ाने का अभियान चलाया जा रहा है। इसके साथ ही केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं के लाभार्थियों तक पहुंच बनाकर चुनावी माहौल तैयार करने की रणनीति पर काम किया जा रहा है।
बीजेपी नेतृत्व का मानना है कि मजबूत बूथ संगठन और सरकार की उपलब्धियों के प्रचार के दम पर आगामी स्थानीय निकाय और पंचायत चुनावों में बेहतर प्रदर्शन किया जा सकेगा।
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कांग्रेस का नया फॉर्मूला, नेताओं और पदाधिकारियों की होगी रिपोर्ट कार्ड से मॉनिटरिंग
वहीं कांग्रेस ने भी इस बार नया फार्मूला तैयार किया है। आगामी पंचायत और निकाय चुनावों को देखते हुए कांग्रेस संगठन में जवाबदेही बढ़ाने की तैयारी कर रही है। पार्टी ने नेताओं और पदाधिकारियों के प्रदर्शन का आकलन करने के लिए ‘रिपोर्ट कार्ड मॉडल’ लागू करने का फैसला किया है।
कांग्रेस संगठन अब जिला, ब्लॉक और विधानसभा स्तर तक पदाधिकारियों की सक्रियता की नियमित समीक्षा करेगा। पार्टी की योजना कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों को उनकी जिम्मेदारियों के आधार पर रेटिंग देने की है। इसके जरिए जमीनी स्तर पर संगठन की मजबूती और चुनावी तैयारियों का मूल्यांकन किया जाएगा।
सूत्रों के अनुसार विधानसभा से लेकर ब्लॉक स्तर तक पदाधिकारियों को क्षेत्रीय गतिविधियों, जनसंपर्क अभियानों और संगठनात्मक कार्यक्रमों के आधार पर अंक दिए जाएंगे। पार्टी की कोशिश है कि निष्क्रिय पदाधिकारियों की पहचान कर संगठन में जवाबदेही तय की जाए।
कांग्रेस नेतृत्व का मानना है कि रिपोर्ट कार्ड व्यवस्था से कार्यकर्ताओं की सक्रियता बढ़ेगी और निकाय व पंचायत चुनावों में पार्टी को संगठनात्मक लाभ मिलेगा। फोटो, खबरों और जमीनी गतिविधियों के आधार पर भी पदाधिकारियों का मूल्यांकन किए जाने की तैयारी है।