Rajasthan Assembly News: विधायक निधि घोटाले पर सुनवाई में नया मोड, मामले में विधिक राय भी लेगी सदाचार समिति
विधायक निधि में कमीशन आरोपों में सदाचार समिति आरोपी विधायकों की सुनावाई लगभग पूरी कर चुकी है और समिति के चेयरमैन कैलाश वर्मा का कहना है कि अब इस मामले में विधिक राय ली जा सकती है...
विस्तार
विधायक निधि में कमीशन के कथित भ्रष्टाचार के मामले की जांच लगभग पूरी हो चुकी है। अब इस मामले में सचादार कमेटी विधिक राय लेने का मन बना चुकी है। समिति के चेयरमैन विधायक कैलाश वर्मा का कहना है कि इस प्रकरण में अब विधिक राय भी ली जाएगी, ताकि सभी पहलुओं पर निष्पक्ष और कानूनी दृष्टि से निर्णय लिया जा सके। सदाचार समिति अब तक दो बार संबंधित विधायकों को तलब कर चुकी है और दोनों पक्षों से विधायक निधि के उपयोग को लेकर तथ्यात्मक रिपोर्ट प्राप्त की जा चुकी है। इसके अलावा समिति अपने स्तर पर भी इस मामले से जुड़े अतिरिक्त तथ्यों को जुटा रही है।
सभापति कैलाश वर्मा ने बैठक के बाद बताया कि तीनों विधायकों ने समिति के समक्ष अपना पक्ष रखा है और समर्थन में पेन ड्राइव व कुछ फोटोग्राफ्स भी सौंपे हैं। उन्होंने कहा कि समिति 12 जनवरी तक रोजाना बैठक करेगी और इस दौरान मामले से जुड़े सभी तथ्यों की गहनता से जांच की जाएगी। जांच पूरी होने के बाद सदाचार समिति अपनी रिपोर्ट विधानसभा अध्यक्ष को सौंपेगी।
सभापति कैलाश वर्मा ने बैठक के बाद बताया कि तीनों विधायकों ने समिति के समक्ष अपना पक्ष रखा है और समर्थन में पेन ड्राइव व कुछ फोटोग्राफ्स भी सौंपे हैं। उन्होंने कहा कि समिति 12 जनवरी तक रोजाना बैठक करेगी और इस दौरान मामले से जुड़े सभी तथ्यों की गहनता से जांच की जाएगी। जांच पूरी होने के बाद सदाचार समिति अपनी रिपोर्ट विधानसभा अध्यक्ष को सौंपेगी। मंगलवार को तीनों विधायक समिति के समक्ष पेश हुए और अपने-अपने पक्ष में तथ्य प्रस्तुत किए। सदाचार समिति के सभापति कैलाश वर्मा की अध्यक्षता में विधानसभा परिसर में बैठक आयोजित की गई, जिसमें विधायक रितु बनावत, अनीता जाटव और रेवत राम डांगा व्यक्तिगत रूप से उपस्थित हुए।
वर्मा ने बताया कि अब तक की सुनवाई में सभी से उनके साक्ष लिए जा चुके हैं। इसमें स्टिंग से जुड़े वीडियो भी लिए गए हैं। वहीं आरोपी विधायकों से भी उनके तथ्य लिए गए हैं। अब बीएपी विधायक जयकृष्ण पटेल की सुनवाई है। इसके बाद इन सभी के मामले में विधिक राय लेने के लिए राज्य सरकार के विधि विभाग को भेजा जा सकता है। उन्होंने कहा कि विधानसभा का बजट सत्र शुरू होने से पहले ही समिति इस मामले में अपनी रिपोर्ट स्पीकर को सौंपना चाहती है।
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