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पंचायत-निकाय चुनावों पर कल हाईकोर्ट में अहम सुनवाई: अवमानना नोटिस पर सरकार को देना होगा जवाब
Mon, 13 Jul 2026 07:52 AM IST
Sourabh Bhatt
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
Published by: Sourabh Bhatt
Updated Mon, 13 Jul 2026 07:52 AM IST
सार
राजस्थान में पंचायत राज संस्थाओं और नगरीय निकायों के लंबे समय से लंबित चुनावों को लेकर मंगलवार को राजस्थान हाईकोर्ट में दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई होगी। हाईकोर्ट पहले 31 जुलाई तक चुनाव कराने के निर्देश दे चुका है,
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राजस्थान हाईकोर्ट, जयपुर
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
पंचायत-निकाय चुनावों में देरी को लेकर एक बार फिर अवमाना मामला हाईकोर्ट की दहलीज पर पहुंच चुका है। राजस्थान में पंचायत और नगरीय निकाय चुनावों में हो रही देरी को लेकर मंगलवार को राजस्थान हाईकोर्ट में अहम सुनवाई होगी। कांग्रेस नेता एवं याचिकाकर्ता संयम लोढ़ा की ओर से दायर अवमानना याचिका में आरोप लगाया गया है कि राज्य सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग ने हाईकोर्ट के 31 जुलाई तक चुनाव कराने संबंधी आदेश का पालन नहीं किया है जो हाईकोर्ट की अवमानना की श्रेणी में आता है।
सुनवाई ऐसे समय हो रही है जब राजस्थान राज्य अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) आयोग ने 10 जुलाई से 23 जुलाई तक प्रदेशभर में घर-घर ऑनलाइन सर्वे शुरू कर दिया है। आयोग इस सर्वे के जरिए स्थानीय निकायों में OBC राजनीतिक आरक्षण के लिए आवश्यक आंकड़े जुटा रहा है। यह प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित 'ट्रिपल टेस्ट' का हिस्सा है।
राज्य सरकार का कहना है कि चुनाव संबंधी सभी प्रशासनिक तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। परिसीमन, वार्ड पुनर्गठन और अन्य प्रक्रियाएं पूरी हो चुकी हैं। अब चुनाव कार्यक्रम OBC आयोग की रिपोर्ट और राज्य निर्वाचन आयोग की संवैधानिक प्रक्रिया पर निर्भर है।
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यह भी पढें- Dausa: 100 करोड़ के जिला अस्पताल में एक साल में दरारें, एल्युमिनियम प्लेटों से छिपाने की कोशिश नाकाम
हालांकि राज्य निर्वाचन आयोग पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि OBC आयोग की अंतिम रिपोर्ट मिलने के बाद चुनाव प्रक्रिया पूरी कराने में करीब 90 दिन का समय लगेगा। ऐसे में जुलाई के अंत तक रिपोर्ट आने की स्थिति में भी चुनाव अक्टूबर से पहले कराना मुश्किल माना जा रहा है।
सरकार व आयोग भी हाईकोर्ट जाने की तैयारी में
इधर राज्य सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग भी हाईकोर्ट की ओर से निर्धारित समय सीमा को बढ़ाने की मांग को लेकर अपना पक्ष रखने की तैयारी कर चुके हैं। इसे देखते हुए याचिका कर्ता की ओर से पहले ही हाईकोर्ट में कैविएट दायर कर दी है, ताकि चुनाव से जुड़े किसी भी आवेदन पर सुनवाई से पहले उनका पक्ष भी सुना जाए।
कांग्रेस का आरोप
दूसरी ओर, कांग्रेस सरकार पर जानबूझकर चुनाव टालने का आरोप लगा रही है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने आरोप लगाया कि सरकार ने OBC आयोग के गठन में देरी की और अब सर्वे प्रक्रिया के जरिए चुनाव और आगे खिसकाए जा रहे हैं। कांग्रेस ने 'राजधारा' मोबाइल एप के जरिए सर्वे की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठाए हैं।
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सुनवाई ऐसे समय हो रही है जब राजस्थान राज्य अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) आयोग ने 10 जुलाई से 23 जुलाई तक प्रदेशभर में घर-घर ऑनलाइन सर्वे शुरू कर दिया है। आयोग इस सर्वे के जरिए स्थानीय निकायों में OBC राजनीतिक आरक्षण के लिए आवश्यक आंकड़े जुटा रहा है। यह प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित 'ट्रिपल टेस्ट' का हिस्सा है।
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राज्य सरकार का कहना है कि चुनाव संबंधी सभी प्रशासनिक तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। परिसीमन, वार्ड पुनर्गठन और अन्य प्रक्रियाएं पूरी हो चुकी हैं। अब चुनाव कार्यक्रम OBC आयोग की रिपोर्ट और राज्य निर्वाचन आयोग की संवैधानिक प्रक्रिया पर निर्भर है।
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हालांकि राज्य निर्वाचन आयोग पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि OBC आयोग की अंतिम रिपोर्ट मिलने के बाद चुनाव प्रक्रिया पूरी कराने में करीब 90 दिन का समय लगेगा। ऐसे में जुलाई के अंत तक रिपोर्ट आने की स्थिति में भी चुनाव अक्टूबर से पहले कराना मुश्किल माना जा रहा है।
सरकार व आयोग भी हाईकोर्ट जाने की तैयारी में
इधर राज्य सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग भी हाईकोर्ट की ओर से निर्धारित समय सीमा को बढ़ाने की मांग को लेकर अपना पक्ष रखने की तैयारी कर चुके हैं। इसे देखते हुए याचिका कर्ता की ओर से पहले ही हाईकोर्ट में कैविएट दायर कर दी है, ताकि चुनाव से जुड़े किसी भी आवेदन पर सुनवाई से पहले उनका पक्ष भी सुना जाए।
कांग्रेस का आरोप
दूसरी ओर, कांग्रेस सरकार पर जानबूझकर चुनाव टालने का आरोप लगा रही है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने आरोप लगाया कि सरकार ने OBC आयोग के गठन में देरी की और अब सर्वे प्रक्रिया के जरिए चुनाव और आगे खिसकाए जा रहे हैं। कांग्रेस ने 'राजधारा' मोबाइल एप के जरिए सर्वे की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठाए हैं।