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राजस्थान में सुरक्षित प्रसव के लिए सख्त कदम: हाईरिस्क गर्भवती की सूची बनेगी, एएनएम और सीएचओ करेंगे निगरानी
Sun, 19 Jul 2026 10:26 PM IST
हिमांशु सिंह बघेल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
Published by: हिमांशु सिंह बघेल
Updated Sun, 19 Jul 2026 10:26 PM IST
सार
राजस्थान सरकार ने मातृ एवं शिशु मृत्यु दर कम करने के लिए हाईरिस्क गर्भवती महिलाओं की नामवार निगरानी के निर्देश दिए हैं। मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने एएनएम और सीएचओ के माध्यम से नियमित स्वास्थ्य जांच, समय पर रेफरल, सुरक्षित प्रसव और गंभीर एनीमिया से पीड़ित महिलाओं के विशेष उपचार पर जोर दिया।
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मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने स्वास्थ्य भवन से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित समीक्षा बैठक
- फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
राजस्थान में मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को कम करने के लिए सरकार ने हाईरिस्क गर्भवती महिलाओं की निगरानी और सुरक्षित प्रसव सुनिश्चित करने के लिए सख्त कदम उठाए हैं। मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने रविवार को स्वास्थ्य भवन से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित समीक्षा बैठक में निर्देश दिए कि प्रत्येक जिले में हाईरिस्क गर्भवती महिलाओं की नामवार सूची तैयार कर उन्हें संबंधित एएनएम (ANM) और सीएचओ (CHO) से मैप किया जाए, ताकि उनकी नियमित निगरानी और समय पर उपचार सुनिश्चित किया जा सके।
मुख्य सचिव ने दिए निर्देश
मुख्य सचिव ने सभी मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों (CMHO) और आरसीएच अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे सोमवार सुबह एएनएम की बैठक आयोजित कर हाईरिस्क गर्भवती महिलाओं की लाइनलिस्ट तथा जोखिम के कारणों की समीक्षा करें। उन्होंने कहा कि आवश्यकता पड़ने पर समय पर रेफरल सेवाएं उपलब्ध कराई जाएं, ताकि किसी भी जटिल स्थिति से पहले आवश्यक चिकित्सकीय हस्तक्षेप किया जा सके।
रेफरल प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन करने पर जोर
बैठक में प्रदेश के सभी मेडिकल कॉलेजों के अधीक्षकों और स्त्री एवं प्रसूति रोग (गायनी) विभागाध्यक्षों से पिछले 24 घंटे में हुए सामान्य और सिजेरियन प्रसव की जानकारी ली गई। मुख्य सचिव ने सभी अस्पतालों में प्रसव और ऑपरेशन से संबंधित स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने लेबर रूम प्रोटोकॉल, संक्रमण नियंत्रण, एनेस्थीसिया, बायोमेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट, कोल्ड चेन और रेफरल प्रोटोकॉल का कड़ाई से पालन करने पर जोर दिया। उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि प्रसव के बाद कम से कम 24 घंटे तक धात्री महिला की गहन निगरानी की जाए और उसके पोषण का विशेष ध्यान रखा जाए।
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पांच जिलों में हाईरिस्क गर्भवती महिलाओं की पहचान हुई
समीक्षा बैठक में बताया गया कि जुलाई माह में सीकर, नागौर, जालौर, बांसवाड़ा और चूरू जिलों में सबसे अधिक हाईरिस्क गर्भवती महिलाओं की पहचान हुई है। मुख्य सचिव ने गंभीर एनीमिया से पीड़ित तथा प्रसव के निकट पहुंच चुकी महिलाओं को आवश्यकता के अनुसार ब्लड ट्रांसफ्यूजन, एफसीएम (FCM) इंजेक्शन या आयरन सुक्रोज थेरेपी उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जिन महिलाओं का हीमोग्लोबिन 6 ग्राम या उससे कम है, उनकी नामवार जानकारी एएनएम, आरसीएचओ और सीएमएचओ स्तर पर उपलब्ध रखी जाए। साथ ही संबंधित एएनएम प्रत्येक तीसरे दिन उनकी स्वास्थ्य जांच सुनिश्चित करें।
प्रमुख शासन सचिव, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य, गायत्री राठौड़ ने सुरक्षित प्रसव के लिए समय पर प्रसव योजना तैयार करने, उपयुक्त अस्पताल का चयन करने, रेफरल व्यवस्था को मजबूत बनाने तथा ममता कार्ड में सही एवं पूर्ण जानकारी दर्ज करने के निर्देश दिए।
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मुख्य सचिव ने दिए निर्देश
मुख्य सचिव ने सभी मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों (CMHO) और आरसीएच अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे सोमवार सुबह एएनएम की बैठक आयोजित कर हाईरिस्क गर्भवती महिलाओं की लाइनलिस्ट तथा जोखिम के कारणों की समीक्षा करें। उन्होंने कहा कि आवश्यकता पड़ने पर समय पर रेफरल सेवाएं उपलब्ध कराई जाएं, ताकि किसी भी जटिल स्थिति से पहले आवश्यक चिकित्सकीय हस्तक्षेप किया जा सके।
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रेफरल प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन करने पर जोर
बैठक में प्रदेश के सभी मेडिकल कॉलेजों के अधीक्षकों और स्त्री एवं प्रसूति रोग (गायनी) विभागाध्यक्षों से पिछले 24 घंटे में हुए सामान्य और सिजेरियन प्रसव की जानकारी ली गई। मुख्य सचिव ने सभी अस्पतालों में प्रसव और ऑपरेशन से संबंधित स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने लेबर रूम प्रोटोकॉल, संक्रमण नियंत्रण, एनेस्थीसिया, बायोमेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट, कोल्ड चेन और रेफरल प्रोटोकॉल का कड़ाई से पालन करने पर जोर दिया। उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि प्रसव के बाद कम से कम 24 घंटे तक धात्री महिला की गहन निगरानी की जाए और उसके पोषण का विशेष ध्यान रखा जाए।
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पांच जिलों में हाईरिस्क गर्भवती महिलाओं की पहचान हुई
समीक्षा बैठक में बताया गया कि जुलाई माह में सीकर, नागौर, जालौर, बांसवाड़ा और चूरू जिलों में सबसे अधिक हाईरिस्क गर्भवती महिलाओं की पहचान हुई है। मुख्य सचिव ने गंभीर एनीमिया से पीड़ित तथा प्रसव के निकट पहुंच चुकी महिलाओं को आवश्यकता के अनुसार ब्लड ट्रांसफ्यूजन, एफसीएम (FCM) इंजेक्शन या आयरन सुक्रोज थेरेपी उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जिन महिलाओं का हीमोग्लोबिन 6 ग्राम या उससे कम है, उनकी नामवार जानकारी एएनएम, आरसीएचओ और सीएमएचओ स्तर पर उपलब्ध रखी जाए। साथ ही संबंधित एएनएम प्रत्येक तीसरे दिन उनकी स्वास्थ्य जांच सुनिश्चित करें।
प्रमुख शासन सचिव, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य, गायत्री राठौड़ ने सुरक्षित प्रसव के लिए समय पर प्रसव योजना तैयार करने, उपयुक्त अस्पताल का चयन करने, रेफरल व्यवस्था को मजबूत बनाने तथा ममता कार्ड में सही एवं पूर्ण जानकारी दर्ज करने के निर्देश दिए।