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Rajasthan High Court Order: जयपुर में अवैध रूप से बने मंदिर हटाने के आदेश, हाईकोर्ट सख्त

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर Published by: सौरभ भट्ट Updated Wed, 28 Jan 2026 09:06 PM IST
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सार

राजस्थान हाईकोर्ट ने जयपुर शहर में फुटपाथ, सड़क और सार्वजनिक रास्तों पर अवैध रूप से बने मंदिरों को हटाने के आदेश दिए हैं। जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा और जस्टिस संगीता शर्मा की खंडपीठ ने यह आदेश जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान दिए। कोर्ट ने नगर निगम कमिश्नर से शपथपत्र मांगा है और सरकार को अवैध मंदिरों की मूर्तियां पास के वैध मंदिरों में शिफ्ट करने के निर्देश जारी करने को कहा है। अगली सुनवाई 4 फरवरी को होगी।


Rajasthan High Court Orders Removal of Illegal Temples from Public Roads in Jaipur
राजस्थान हाईकोर्ट, जयपुर - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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राजस्थान हाईकोर्ट ने जयपुर शहर में फुटपाथ, सड़कों और सार्वजनिक रास्तों पर अवैध रूप से बने मंदिरों को हटाने के आदेश दिए हैं। जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा और जस्टिस संगीता शर्मा की खंडपीठ ने यह निर्देश सनी मीणा द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान दिए।
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अदालत ने जयपुर नगर निगम के कमिश्नर को निर्देश दिया है कि वे अगली सुनवाई पर शपथपत्र दाखिल कर यह स्पष्ट करें कि शहर में अवैध रूप से बने मंदिरों को हटाने के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए हैं। साथ ही राज्य सरकार से कहा गया है कि अवैध मंदिरों के ढांचों को ध्वस्त करने और उनकी मूर्तियों को पास के वैध मंदिरों में स्थानांतरित करने के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाएं। मामले की अगली सुनवाई 4 फरवरी को होगी। हाईकोर्ट प्रताप नगर सेक्टर-7 में सार्वजनिक रास्ते पर बने एक मंदिर को हटाने से जुड़ी याचिका पर सुनवाई कर रहा है। कोर्ट ने इस मंदिर को 7 दिन के भीतर हटाने के आदेश दिए हैं और लापरवाही बरतने वाले जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के भी निर्देश दिए हैं।
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मंदिर की आड़ में दुकानें चलाने का आरोप
याचिकाकर्ता सनी मीणा ने जनहित याचिका में आरोप लगाया कि प्रताप नगर सेक्टर-7 में कुछ लोगों ने आम रास्ते पर अतिक्रमण कर दुकानें और मंदिर का निर्माण कर लिया है। मंदिर की आड़ में व्यावसायिक गतिविधियां संचालित की जा रही थीं। याचिका दायर होने के बाद नगर निगम ने अवैध दुकानों को तो हटा दिया, लेकिन मंदिर के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई। नगर निगम और अन्य पक्षों की ओर से अदालत में दलील दी गई कि मंदिर पुराना है और लोगों की आस्था से जुड़ा हुआ है। इसके जवाब में याचिकाकर्ता ने मंदिर के हालिया निर्माण की तस्वीरें कोर्ट में पेश कीं। तस्वीरों के आधार पर कोर्ट ने नगर निगम के डिप्टी कमिश्नर को 7 दिन में मंदिर हटाने और मूर्ति को किसी अन्य वैध मंदिर में स्थानांतरित करने के आदेश दिए।
नगर निगम पर कार्रवाई की जिम्मेदारी
मामले में हाउसिंग बोर्ड की ओर से अधिवक्ता अजय शुक्ला ने अदालत को बताया कि प्रताप नगर क्षेत्र नगर निगम को हैंडओवर किया जा चुका है। ऐसे में निर्माण की अनुमति देने और अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई की पूरी जिम्मेदारी नगर निगम की है।
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