Rajasthan: गृह मंत्री शाह को भाटी का खून से पत्र, गिरल आंदोलन पर गरमाई सियासत; मदन राठौड़ ने उठाए गंभीर सवाल
बाड़मेर के गिरल लिग्नाइट माइंस आंदोलन को लेकर सियासत तेज हो गई है। विधायक रवींद्र सिंह भाटी के खुद पर पेट्रोल छिड़कने पर मदन राठौड़ ने सवाल उठाए। वहीं आंदोलनकारियों ने अपनी मांगों को लेकर अमित शाह को खून से पत्र लिखा।
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बाड़मेर जिले के गिरल लिग्नाइट माइंस आंदोलन को लेकर अब सियासत तेज हो गई है। शिव विधायक रवींद्र सिंह भाटी द्वारा धरने के दौरान खुद पर पेट्रोल छिड़कने की घटना पर बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि यह किसी जनप्रतिनिधि के आचरण के अनुरूप नहीं है और नेताओं को ऐसा व्यवहार करना चाहिए जिससे समाज को सकारात्मक संदेश मिले।
मदन राठौड़ ने कहा कि विधायक का धरने पर पेट्रोल की बोतल लेकर पहुंचना ही कई सवाल खड़े करता है। उन्होंने कहा कि आम आदमी को बोतल में पेट्रोल देना नियमों के खिलाफ है, ऐसे में इस पूरे घटनाक्रम की गंभीरता से समीक्षा होनी चाहिए। उन्होंने खुद पर पेट्रोल डालने की घटना को भी गलत संदेश देने वाला बताया।
उन्होंने कहा, “हर मांग तुरंत पूरी नहीं हो सकती। जनप्रतिनिधि का अधिकार है कि वह जनता की आवाज मजबूती से उठाए, लेकिन विरोध का तरीका ऐसा होना चाहिए जो लोकतांत्रिक मर्यादाओं के भीतर हो। इस तरह का कदम समाज में गलत उदाहरण पेश कर सकता है।” हालांकि राठौड़ ने रविंद्र सिंह भाटी की जनसरोकारों को लेकर सक्रियता की सराहना भी की। उन्होंने कहा कि भाटी लगातार जनता के मुद्दे उठाते रहे हैं, लेकिन इस विशेष घटना से वे सहमत नहीं हैं।
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उधर गिरल लिग्नाइट माइंस क्षेत्र में श्रमिकों और ग्रामीणों का आंदोलन 45 दिनों से अधिक समय से जारी है। विधायक रविंद्र सिंह भाटी भी पिछले 20 दिनों से धरनास्थल पर मौजूद हैं। भीषण गर्मी और 45 डिग्री से अधिक तापमान के बावजूद आंदोलनकारी अपनी मांगों को लेकर डटे हुए हैं। धरने के 20वें दिन आंदोलनकारियों ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को खून से पत्र लिखकर अपनी पीड़ा और मांगों से अवगत कराया। श्रमिकों का कहना है कि लंबे समय से शांतिपूर्ण आंदोलन के बावजूद उनकी मांगों पर सुनवाई नहीं हो रही है।
रविंद्र सिंह भाटी ने कहा कि वे अमित शाह के राजस्थान आगमन का स्वागत करते हैं, लेकिन साथ ही गिरल के मजदूरों की समस्याओं की ओर केंद्र और राज्य सरकार का ध्यान भी आकर्षित करना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि माइंस क्षेत्र में सुरक्षा मानकों और श्रमिक सुविधाओं को लेकर लंबे समय से सवाल उठ रहे हैं और जल्द समाधान नहीं हुआ तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।
धरनास्थल अब केवल आंदोलन का केंद्र नहीं, बल्कि जनसुनवाई का मंच भी बन गया है। विधायक भाटी वहीं से आमजन की समस्याएं सुन रहे हैं और अधिकारियों से संपर्क कर समाधान का प्रयास कर रहे हैं। आंदोलन को सामाजिक संगठनों, युवाओं और ग्रामीणों का लगातार समर्थन मिल रहा है।