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Rajasthan: डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाकर रिटायर्ड अफसर से ₹1.06 करोड़ की ठगी, ट्राई अधिकारी बनकर ठगों ने फंसाया
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
Published by: Sabahat Husain
Updated Mon, 09 Mar 2026 09:57 AM IST
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सार
जयपुर में साइबर ठगों ने ट्राई अधिकारी बनकर आरएफसी के रिटायर्ड अफसर को डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाया और गलत वीडियो के फर्जी केस में फंसाने की धमकी दी। घबराकर दंपती ने एफडी तुड़वाकर चार खातों में 1.06 करोड़ रुपए ट्रांसफर कर दिए। पुलिस जांच जारी है।
सांकेतिक
- फोटो : Freepik
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विस्तार
जयपुर में साइबर ठगों ने एक और बड़ी वारदात को अंजाम देते हुए आरएफसी के एक रिटायर्ड अधिकारी से 1 करोड़ 6 लाख 30 हजार रुपए की ठगी कर ली। ठगों ने खुद को टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (TRAI) का अधिकारी बताकर बुजुर्ग दंपती को डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाया और गलत वीडियो से जुड़े फर्जी केस में फंसाने की धमकी दी।
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झोटवाड़ा निवासी पीड़ित के अनुसार 18 जनवरी को सुबह करीब 10 बजे उन्हें व्हाट्सएप कॉल आया। इसके बाद ठगों ने वीडियो कॉल के जरिए खुद को जांच एजेंसी से जुड़ा अधिकारी बताया और सुप्रीम कोर्ट का फर्जी अरेस्ट वारंट तथा फंड फ्रीजिंग नोटिस दिखाया। ठगों ने दावा किया कि उनकी सिम कार्ड से गलत वीडियो से जुड़ी गतिविधियां की गई हैं, जिसके कारण उनके खिलाफ गंभीर मामला दर्ज हो सकता है।
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ठगों ने बुजुर्ग दंपती को लगातार कॉल पर बनाए रखा और इसे “डिजिटल अरेस्ट” बताते हुए कहीं आने-जाने या किसी से बात करने से मना कर दिया। कई बार 8 से 10 घंटे तक कॉल चलती रही। बातचीत के दौरान ठगों को यह भी पता चल गया कि दंपती जयपुर में अकेले रहते हैं और उनका बेटा बेंगलुरु में रहता है। इसके बाद उन्होंने बेटे के खिलाफ भी केस दर्ज कराने की धमकी देकर दंपती को और ज्यादा डरा दिया।
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डर के कारण दंपती ने अपनी जीवनभर की जमा पूंजी एफडी तुड़वाकर ठगों के बताए बैंक खातों में ट्रांसफर कर दी। ठगों ने रकम चार अलग-अलग खातों में जमा करवाई, जिनमें एक्सिस बैंक में 18.20 लाख रुपए, यस बैंक में 34.20 लाख रुपए, बैंक ऑफ बड़ौदा में 27.95 लाख रुपए और आईसीआईसीआई बैंक में 25.95 लाख रुपए ट्रांसफर करवाए गए।
जांच में सामने आया कि पहले चरण में यह राशि इंडसइंड बैंक और फेडरल बैंक के चार फर्जी खातों में जमा करवाई गई। इसके बाद दूसरे चरण में करीब 31 से ज्यादा बैंक खातों में छोटे-छोटे हिस्सों में रकम ट्रांसफर कर दी गई। कुछ राशि एटीएम से निकाली गई, जबकि ज्यादातर रकम विदेश भेजकर क्रिप्टोकरेंसी में निवेश कर दी गई।
जब पीड़ित ने यह बात अपने एक करीबी चार्टर्ड अकाउंटेंट को बताई तो उन्हें ठगी का पता चला। इसके बाद मामले की सूचना पुलिस को दी गई। स्टेट साइबर क्राइम ब्रांच ने 3 फरवरी को रिपोर्ट दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि डिजिटल अरेस्ट नाम की कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं होती। किसी भी अनजान व्यक्ति को बैंक डिटेल, ओटीपी या निजी जानकारी न दें। ठगी होने पर तुरंत 1930 हेल्पलाइन पर कॉल करें या साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं।