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राजस्थान बजट: मार्च तक प्रोजेक्टेड घाटा दिसंबर में ही हुआ पार, जाने घाटे और कर्ज का मर्ज कितना बढ़ा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
Published by: सौरभ भट्ट
Updated Fri, 06 Feb 2026 04:41 PM IST
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सार
राजस्थान की भजनलाल सरकार 11 फरवरी को अपने कार्यकाल का तीसरा बजट पेश करने जा रही है। सरकार ने पिछले बजट में जो अनुमान रखे थे, राजकोषीय घाटा उन्हें कब का पार कर चुका है। अब सरकार सदन में नए आंकड़ों की क्या जादूगरी दिखाएगी यह देखने वाली बात होगी-
राजस्थान विधानसभा
- फोटो : राजस्थान विधानसभा
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विस्तार
राज्य सरकार की ओर से कैग को भेज गए प्रोविजन आंकडों के अनुसार दिसंबर तक राज्य की आर्थिक स्थिति में जहां कर संग्रह के मोर्चे पर मजबूती दिखाई दे रही है,वहीं बढ़ता राजकोषीय घाटा, कम पूंजीगत व्यय और कर्ज पर निर्भरता सरकार के लिए चुनौती बनी हुई है। वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए राज्य का कुल बजट अनुमान ₹3.78 लाख करोड़ रखा गया था, जिसके मुकाबले दिसंबर 2025 तक 2.19 लाख करोड़ रुपए की वास्तविक प्राप्तियां हुई हैं। यानी कुल बजट का लगभग 58.11 प्रतिशत ही अब तक हासिल हो पाया है।
कर राजस्व में संतोषजनक प्रदर्शन
राज्य की राजस्व प्राप्तियां 1.66 लाख करोड़ रुपए रहीं, जो बजट अनुमान का 56.43 प्रतिशत है।
कर राजस्व के तहत GST (51.67%), एक्साइज ड्यूटी (57.92%), स्टॉम्प-रजिस्ट्रेशन (62.37%) और सेल्स टैक्स (59.32%) से अपेक्षाकृत बेहतर संग्रह दर्ज किया गया है। इससे संकेत मिलता है कि आर्थिक गतिविधियां पूरी तरह ठप नहीं हैं। हालांकि, गैर-कर राजस्व केवल 50 प्रतिशत के आसपास रहा, जबकि केंद्र सरकार से मिलने वाला अनुदान (Grant-in-Aid) मात्र 24.45 प्रतिशत ही प्राप्त हो सका। वहीं वित्त 2024-25 साल की इसी अवधि से इन आंकड़ों की तुलना करें तो राज्य की राजस्व प्राप्तियां ₹1.53 लाख करोड़ रहीं, जो बजट अनुमान का 58.33 प्रतिशत था। इसमें कर राजस्व के तहत GST (55.42%), एक्साइज ड्यूटी (62.61%), स्टॉम्प-रजिस्ट्रेशन (70.67%) और सेल्स टैक्स (60.46%) रहा।
विकास खर्च सुस्त, वेतन-पेंशन पर भारी बोझ
सरकार का कुल राजस्व व्यय 200154 करोड़ रुपए रहा, जो बजट का 61.42 प्रतिशत है। इसमें से बड़ा हिस्सा वेतन (67%), पेंशन (71%) और ब्याज भुगतान (65%) में खर्च हुआ। इसके विपरीत, पूंजीगत व्यय यानी सड़क, बिजली, सिंचाई और अन्य बुनियादी ढांचे पर खर्च सिर्फ 35.59 प्रतिशत ही हो पाया, जो विकास की रफ्तार धीमी होने का संकेत देता है।
यह भी पढें- Rajasthan News: राजस्थान हाईकोर्ट को बम से उड़ाने की धमकी, जयपुर-जोधपुर में खाली कराए परिसर
सामाजिक और आर्थिक क्षेत्रों पर कम खर्च
आंकड़ों के अनुसार- (पूंजीगत व्यय)
2025-26: सामाजिक क्षेत्र (शिक्षा, स्वास्थ्य आदि) पर सिर्फ 32.94% खर्च
2024-25:सामाजिक क्षेत्र (शिक्षा, स्वास्थ्य आदि) पर सिर्फ 40.34% खर्च
2025-26: आर्थिक क्षेत्र (कृषि, उद्योग, परिवहन) पर महज 45.74% व्यय हुआ
2024-25:आर्थिक क्षेत्र (कृषि, उद्योग, परिवहन) पर महज 64.38% व्यय हुआ
विशेषज्ञों का मानना है कि इन क्षेत्रों में कम निवेश का असर आने वाले वर्षों में विकास और रोजगार पर पड़ सकता है।
बढ़ता घाटा बना चिंता का विषय
दिसंबर 2025 तक- राजस्व घाटा: 33,939 करोड़ रुपए
राज्य सरकार की ओर से बजट अनुमानों में मौजूदा वित्त वर्ष के लिए 31 हजार करोड़ रुपए का राजस्व घाटा अनुमानित किया गया था। लेकिन दिसंबर तक ही यह घाटा 33 हजार करोड़ रुपए को पार कर चुका है। यानी मार्च खत्म होते होते यह घाटा और बढ़ेगा।
राजकोषीय घाटा: 53,303 करोड़ रुपए
बजट में राजकोषीय घाटा 85,631 करोड़ रुपए अनुमानित रखा गया था। इसमें से दिसंबर तक राजकोषीय घाटा 33, 939 करोड़ रुपए पहुंच गया।
ये आंकड़े दर्शाते हैं कि राज्य की आय नियमित खर्चों को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं है और सरकार को लगातार उधारी का सहारा लेना पड़ रहा है।
एक्सपर्ट की राय
बजट एनालिसिस एंड रिसर्च सेंटर, जयपुर के निदेशक निसार अहमद का कहना है कि दिसंबर तक के आंकड़े मिश्रित संकेत दे रहे हैं। राजस्व प्राप्तियां पिछले वर्ष के उसी अवधि से कम हुई हैं । केंद्र से आने वाला ग्रांट इन ऐड भी लक्ष्य का मात्र एक चौथाई ही आ पाया है। ज़ाहिर है कि इससे राज्य में लागू होने वाले केंद्र प्रायोजित कार्यक्रमों की क्रियान्वयन को गति धीमी हुई होगी। पूंजीगत खर्च की धीमी रफ्तार भी चिंताजनक है। विधान सभा में पेश किए गए आंकड़ों के अनुसार राज्य में 58% विद्यालयों के भवन जर्जर हैं। ऐसे में सरकार को स्कूलों के साथ ही स्वास्थ्य केंद्रों आंगनबाड़ी केन्दों आदि सरकारी भवनों के निर्माण और रख रखाव के लिए पूंजीगत खर्च बढ़ाने की भी आवश्यकता होगी।
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कर राजस्व में संतोषजनक प्रदर्शन
राज्य की राजस्व प्राप्तियां 1.66 लाख करोड़ रुपए रहीं, जो बजट अनुमान का 56.43 प्रतिशत है।
कर राजस्व के तहत GST (51.67%), एक्साइज ड्यूटी (57.92%), स्टॉम्प-रजिस्ट्रेशन (62.37%) और सेल्स टैक्स (59.32%) से अपेक्षाकृत बेहतर संग्रह दर्ज किया गया है। इससे संकेत मिलता है कि आर्थिक गतिविधियां पूरी तरह ठप नहीं हैं। हालांकि, गैर-कर राजस्व केवल 50 प्रतिशत के आसपास रहा, जबकि केंद्र सरकार से मिलने वाला अनुदान (Grant-in-Aid) मात्र 24.45 प्रतिशत ही प्राप्त हो सका। वहीं वित्त 2024-25 साल की इसी अवधि से इन आंकड़ों की तुलना करें तो राज्य की राजस्व प्राप्तियां ₹1.53 लाख करोड़ रहीं, जो बजट अनुमान का 58.33 प्रतिशत था। इसमें कर राजस्व के तहत GST (55.42%), एक्साइज ड्यूटी (62.61%), स्टॉम्प-रजिस्ट्रेशन (70.67%) और सेल्स टैक्स (60.46%) रहा।
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विकास खर्च सुस्त, वेतन-पेंशन पर भारी बोझ
सरकार का कुल राजस्व व्यय 200154 करोड़ रुपए रहा, जो बजट का 61.42 प्रतिशत है। इसमें से बड़ा हिस्सा वेतन (67%), पेंशन (71%) और ब्याज भुगतान (65%) में खर्च हुआ। इसके विपरीत, पूंजीगत व्यय यानी सड़क, बिजली, सिंचाई और अन्य बुनियादी ढांचे पर खर्च सिर्फ 35.59 प्रतिशत ही हो पाया, जो विकास की रफ्तार धीमी होने का संकेत देता है।
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सामाजिक और आर्थिक क्षेत्रों पर कम खर्च
आंकड़ों के अनुसार- (पूंजीगत व्यय)
2025-26: सामाजिक क्षेत्र (शिक्षा, स्वास्थ्य आदि) पर सिर्फ 32.94% खर्च
2024-25:सामाजिक क्षेत्र (शिक्षा, स्वास्थ्य आदि) पर सिर्फ 40.34% खर्च
2025-26: आर्थिक क्षेत्र (कृषि, उद्योग, परिवहन) पर महज 45.74% व्यय हुआ
2024-25:आर्थिक क्षेत्र (कृषि, उद्योग, परिवहन) पर महज 64.38% व्यय हुआ
विशेषज्ञों का मानना है कि इन क्षेत्रों में कम निवेश का असर आने वाले वर्षों में विकास और रोजगार पर पड़ सकता है।
बढ़ता घाटा बना चिंता का विषय
दिसंबर 2025 तक- राजस्व घाटा: 33,939 करोड़ रुपए
राज्य सरकार की ओर से बजट अनुमानों में मौजूदा वित्त वर्ष के लिए 31 हजार करोड़ रुपए का राजस्व घाटा अनुमानित किया गया था। लेकिन दिसंबर तक ही यह घाटा 33 हजार करोड़ रुपए को पार कर चुका है। यानी मार्च खत्म होते होते यह घाटा और बढ़ेगा।
राजकोषीय घाटा: 53,303 करोड़ रुपए
बजट में राजकोषीय घाटा 85,631 करोड़ रुपए अनुमानित रखा गया था। इसमें से दिसंबर तक राजकोषीय घाटा 33, 939 करोड़ रुपए पहुंच गया।
ये आंकड़े दर्शाते हैं कि राज्य की आय नियमित खर्चों को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं है और सरकार को लगातार उधारी का सहारा लेना पड़ रहा है।
एक्सपर्ट की राय
बजट एनालिसिस एंड रिसर्च सेंटर, जयपुर के निदेशक निसार अहमद का कहना है कि दिसंबर तक के आंकड़े मिश्रित संकेत दे रहे हैं। राजस्व प्राप्तियां पिछले वर्ष के उसी अवधि से कम हुई हैं । केंद्र से आने वाला ग्रांट इन ऐड भी लक्ष्य का मात्र एक चौथाई ही आ पाया है। ज़ाहिर है कि इससे राज्य में लागू होने वाले केंद्र प्रायोजित कार्यक्रमों की क्रियान्वयन को गति धीमी हुई होगी। पूंजीगत खर्च की धीमी रफ्तार भी चिंताजनक है। विधान सभा में पेश किए गए आंकड़ों के अनुसार राज्य में 58% विद्यालयों के भवन जर्जर हैं। ऐसे में सरकार को स्कूलों के साथ ही स्वास्थ्य केंद्रों आंगनबाड़ी केन्दों आदि सरकारी भवनों के निर्माण और रख रखाव के लिए पूंजीगत खर्च बढ़ाने की भी आवश्यकता होगी।
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