फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Rajasthan ›   Jaipur News ›   Rajasthan Struggles to Boost Organ Donation Despite Rising Demand

Rajasthan Organ Donation: राजस्थान में 10 साल में सिर्फ 84 अंगदान, इंतजार में 1000 से ज्यादा मरीज

Sat, 04 Jul 2026 04:43 PM IST
Sourabh Bhatt न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर Published by: Sourabh Bhatt Updated Sat, 04 Jul 2026 04:43 PM IST
सार

राजस्थान में 2015 से अब तक केवल 84 मृतक अंगदान हुए हैं, जबकि 1,022 मरीज प्रत्यारोपण का इंतजार कर रहे हैं। जागरूकता की कमी और भ्रांतियां अंगदान बढ़ाने में सबसे बड़ी बाधा बनी हुई हैं।

विज्ञापन
Rajasthan Struggles to Boost Organ Donation Despite Rising Demand
अंगदान की भावुक कर देने वाली कहानी। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

एक सात साल के बच्चे ने मौत के बाद भी दो लोगों को जिंदगी दे दी। लेकिन उसके बाद बीते एक दशक में राजस्थान में ऐसी मिसालें उंगलियों पर गिनी जा सकीं। यह सिर्फ आंकड़ों की कहानी नहीं, बल्कि उन हजारों परिवारों की उम्मीद और इंतजार की भी कहानी है, जो हर दिन किसी अनजान व्यक्ति के "हां" कहने का इंतजार करते हैं।

विज्ञापन

साल 2015 में अलवर के सात वर्षीय मोहित कुमार सड़क दुर्घटना के बाद ब्रेन डेड घोषित हुए। परिवार के सामने सबसे कठिन फैसला था, लेकिन उन्होंने अंगदान का विकल्प चुना।  6 फरवरी 2015 को मोहित राजस्थान के पहले मृतक (कैडेवर) अंगदाता बने और उनके अंगों ने दो लोगों को नया जीवन दिया। उस घटना ने प्रदेश में अंगदान की एक नई शुरुआत की उम्मीद जगाई थी। मगर दस साल बाद तस्वीर बताती है कि यह उम्मीद अब भी व्यापक जनआंदोलन का रूप नहीं ले सकी।

विज्ञापन

राज्य अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण संगठन (SOTTO) के आंकड़े बताते हैं कि 2015 से अब तक राजस्थान में केवल 84 मृतक अंगदान हुए हैं। दूसरी ओर 1,022 मरीज किडनी, लिवर, हृदय और फेफड़ों के प्रत्यारोपण की प्रतीक्षा सूची में हैं। प्रदेश की कैडेवर ऑर्गन डोनेशन रेट प्रति दस लाख आबादी पर एक से भी कम है, जो राष्ट्रीय औसत के बराबर तो है, लेकिन जरूरत के मुकाबले बेहद कम है।

विज्ञापन
विज्ञापन

जब 'ब्रेन डेड' का मतलब लोग समझ नहीं पाते

राजस्थान में अंगदान की सबसे बड़ी चुनौती चिकित्सा व्यवस्था नहीं, बल्कि सामाजिक सोच है। अधिकांश परिवारों के लिए "ब्रेन डेड" और "मृत्यु" के बीच का अंतर समझना आसान नहीं होता। कई बार वेंटिलेटर पर चलती सांसें उम्मीद जगा देती हैं, जबकि चिकित्सकीय रूप से मरीज की वापसी संभव नहीं रहती।

मानव अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण अधिनियम-1994 के तहत राज्य की उपयुक्त प्राधिकारी डॉ. रश्मि गुप्ता कहती हैं कि जागरूकता की कमी, धार्मिक और सांस्कृतिक मान्यताएं, शरीर के विकृत होने का डर, परिवार की असहमति और अंगों के दुरुपयोग या अवैध व्यापार को लेकर फैली भ्रांतियां अंगदान की राह में सबसे बड़ी बाधाएं हैं। उनके अनुसार, 18 वर्ष से अधिक आयु का कोई भी व्यक्ति आयुष्मान भारत ऑर्गन डोनेशन रजिस्ट्री ( SOTTO )राजस्थान की राज्य स्तरीय रजिस्ट्री पर अंगदान का संकल्प ले सकता है।

अंगदान की प्रक्रिया उतनी सरल नहीं, जितनी लोग समझते हैं

अक्सर यह धारणा रहती है कि अस्पताल किसी भी मरीज को ब्रेन डेड घोषित कर अंग निकाल लेते हैं। वास्तविकता इससे बिल्कुल अलग है। SOTTO राजस्थान की संयुक्त निदेशक डॉ. चित्रा सिंह बताती हैं कि वेंटिलेटर पर भर्ती मरीज का दो अलग-अलग चरणों में चार विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम विस्तृत क्लीनिकल और न्यूरोलॉजिकल परीक्षण करती है। सभी कानूनी और चिकित्सकीय मानदंड पूरे होने के बाद ही मरीज को ब्रेन डेड घोषित किया जाता है।इसके बाद परिवार को पूरी प्रक्रिया समझाई जाती है। राष्ट्रीय दिशा-निर्देशों के अनुसार परिवार की सहमति के बिना कोई अंग नहीं निकाला जा सकता। इतना ही नहीं, परिवार जिन अंगों के लिए अनुमति देता है, केवल उन्हीं का प्रत्यारोपण किया जाता है। डॉ. सिंह का कहना है कि अंगदान में उम्र मायने नहीं रखती है। कई बार बुजुर्ग दाताओं के अंग भी उनकी कार्यक्षमता के आधार पर सफलतापूर्वक प्रत्यारोपित किए जाते हैं।
एक फैसला, आठ जिंदगियां

चिकित्सकों के मुताबिक, एक मृतक अंगदाता आठ लोगों को नया जीवन दे सकता है। इसके अलावा ऊतक दान के माध्यम से करीब 75 लोगों का उपचार संभव है। अंगों को निकालने से पहले चिकित्सकीय रूप से सुरक्षित रखा जाता है। विशेष संरक्षण तकनीक और मशीनों की मदद से अंगों की कार्यक्षमता बनाए रखी जाती है, ताकि समय पर प्रत्यारोपण किया जा सके।

यह भी पढें- Rajasthan: ब्यूटी पार्लर संचालक ने पानी में ऐसा क्या मिलाया? युवतियां हो गईं आग बबूला; चप्पलों से कर दी पिटाई

राजस्थान में इन जगहों पर ट्रांसप्लांट सेंटर संचालित

राजस्थान में अब अंग प्रत्यारोपण का नेटवर्क पहले की तुलना में बेहतर हुआ है। जयपुर, जोधपुर, कोटा, बीकानेर और एम्स जोधपुर सहित पांच सरकारी संस्थानों में ट्रांसप्लांट की सुविधा उपलब्ध है। इसके अलावा 17 निजी अस्पतालों में भी ट्रांसप्लांट सेंटर संचालित हैं। उदयपुर, अजमेर, झालावाड़ और भीलवाड़ा के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में चार नॉन-ट्रांसप्लांट ऑर्गन रिट्रीवल सेंटर (NTORC) भी स्थापित किए गए हैं, जहां ब्रेन डेड मरीजों से सुरक्षित तरीके से अंग निकाले जा सकते हैं।

बीते 5 वर्षों में अंग दान के आंकड़े

पिछले पांच वर्षों के आंकड़े बताते हैं कि राजस्थान में मृतक अंगदान की रफ्तार लगातार उतार-चढ़ाव वाली रही है। वर्ष 2022 में 7, 2023 में 5, 2024 में 15, 2025 में 10 और 2026 में अब तक 5 मृतक अंगदान दर्ज किए गए हैं। दूसरी ओर अंग प्रत्यारोपण की प्रतीक्षा सूची लगातार लंबी होती जा रही है। वर्तमान में 650 मरीज किडनी, 244 लिवर, 91 हृदय और 37 फेफड़ों के प्रत्यारोपण का इंतजार कर रहे हैं। यानी प्रदेश में कुल 1,022 मरीज ऐसे हैं, जिनकी जिंदगी समय पर उपयुक्त अंग मिलने पर निर्भर है।

 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed