प्रयोगशाला सहायक भर्ती घोटाला: 4 नंबर वाले अभ्यर्थी को बना दिया 191 नंबर का टॉपर, एसओजी ने किया गिरफ्तार
राजस्थान एसओजी ने प्रयोगशाला सहायक भर्ती परीक्षा-2018 की ओएमआर शीट में कथित हेरफेर कर चयन पाने वाले बांदीकुई निवासी पंकज कुमार सैनी को गिरफ्तार किया। जांच में उसके वास्तविक 4 अंक को 191 दर्शाने का खुलासा हुआ। मामले में कई आरोपी पहले ही गिरफ्तार हो चुके हैं।
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राजस्थान पुलिस की स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) ने प्रयोगशाला सहायक सीधी भर्ती परीक्षा-2018 की ओएमआर शीट में कथित हेरफेर कर अनंतिम चयन हासिल करने वाले एक और अभ्यर्थी को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपी की पहचान पंकज कुमार सैनी (30) पुत्र रामअवतार सैनी, निवासी धांधोलाई, हाल राजेश पायलट कॉलेज के पास, बांदीकुई (दौसा) के रूप में हुई है।
अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस (एसओजी) विशाल बंसल ने बताया कि पुलिस थाना एसओजी में दर्ज प्रकरण संख्या 8/2025 की जांच के दौरान सामने आया कि परीक्षा की ओएमआर शीट स्कैन करने वाली एजेंसी राभव लिमिटेड के कर्मचारियों ने अभ्यर्थियों के साथ मिलीभगत कर परिणाम में गंभीर अनियमितताएं की थीं।
जांच में पता चला कि एजेंसी के कर्मचारियों विनोद कुमार गौड़ और शादान खान ने कथित तौर पर 27 अभ्यर्थियों की ओएमआर शीट में कांट-छांट कर उन्हें अनुचित लाभ पहुंचाया और उनका अनंतिम चयन कराया। एसओजी के अनुसार, इस मामले में राभव लिमिटेड के कर्मचारी विनोद कुमार गौड़, शादान खान, कंपनी के कार्यकारी निदेशक रामप्रवेश सिंह तथा लाभान्वित अभ्यर्थी महेंद्र कुमार मीना, देवेंद्र सिंह गुर्जर, विजय सिंह मीना, पिंटू कुमार मीना और संजय कुमार सैनी को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है।
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जांच के दौरान पंकज कुमार सैनी की ओएमआर शीट में सबसे बड़ा खुलासा हुआ। स्कैनिंग के दौरान उसके 191 अंक दर्शाए गए थे, जबकि कर्मचारी चयन बोर्ड द्वारा दोबारा कराई गई ओएमआर स्कैनिंग में उसके वास्तविक अंक केवल 4 पाए गए। एसओजी का आरोप है कि एजेंसी के कर्मचारियों, कंपनी के अधिकारियों और अभ्यर्थी की मिलीभगत से यह हेरफेर किया गया।
महानिरीक्षक पुलिस अजयपाल लाम्बा के निर्देशन, उप महानिरीक्षक भुवन भूषण यादव के सुपरविजन तथा पुलिस अधीक्षक कुन्दन कंवरिया के नेतृत्व में अनुसंधान अधिकारी पुलिस निरीक्षक यशवंत सिंह की टीम ने आरोपी को गिरफ्तार किया। एसओजी अब यह जांच कर रही है कि इस फर्जीवाड़े में और कौन-कौन शामिल थे तथा अन्य अभ्यर्थियों को किस प्रकार अनुचित लाभ पहुंचाया गया। मामले की जांच जारी है।