Rajasthan: जैसलमेर के संदिग्ध जमीन सौदों पर आयकर का शिकंजा, अब बैंक खातों और करोड़ों के लेनदेन की होगी पड़ताल
जैसलमेर में संदिग्ध भूमि सौदों की जांच अब बैंकिंग लेनदेन तक पहुंच गई है। 170 से अधिक संदिग्ध रजिस्ट्रियों की जांच के बाद आयकर विभाग ने जैसलमेर सेंट्रल को-ऑपरेटिव बैंक की मुख्य शाखा में खातों और दो लाख रुपये से अधिक के लेनदेन की जांच शुरू की है।
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जैसलमेर में संदिग्ध भूमि सौदों की जांच अब नए चरण में पहुंच गई है। उप-पंजीयक (रजिस्ट्रार) कार्यालय से 170 से अधिक संदिग्ध रजिस्ट्रियों की जांच के बाद आयकर विभाग ने अब जैसलमेर सेंट्रल को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड की मुख्य शाखा में जांच शुरू कर दी है। विभाग की पांच सदस्यीय टीम संदिग्ध बैंक खातों और दो लाख रुपये से अधिक के वित्तीय लेनदेन की पड़ताल कर रही है। जांच सुबह से शुरू होकर देर रात तक जारी रही।
बैंक रिकॉर्ड और रजिस्ट्री दस्तावेजों का किया जा रहा मिलान
जांच एजेंसियों का मानना है कि रजिस्ट्री दस्तावेजों में दर्ज नकद भुगतान और बैंकिंग रिकॉर्ड का मिलान करने से यह स्पष्ट हो सकेगा कि जमीन खरीद में वास्तविक भुगतान कितना हुआ और धन का स्रोत क्या था। इसी उद्देश्य से बैंक खातों, लेनदेन और संबंधित वित्तीय दस्तावेजों की गहन जांच की जा रही है।
तीन लाख से अधिक खातों वाले बैंक की होगी जांच
जैसलमेर सेंट्रल को-ऑपरेटिव बैंक जिले की प्रमुख वित्तीय संस्था है। बैंक में तीन लाख से अधिक खाते, करीब 64 हजार ऋण खाते और लगभग 735 करोड़ रुपये का वार्षिक कारोबार है। बैंक सहकारी समितियों के माध्यम से करीब 58 हजार किसानों को शून्य ब्याज पर फसली ऋण भी उपलब्ध कराता है। जिले में इसकी कुल 10 शाखाएं संचालित हैं। ऐसे में जांच एजेंसियां बैंक के रिकॉर्ड की बारीकी से पड़ताल कर रही हैं।
रजिस्ट्रार कार्यालय की जांच में सामने आई थीं कई अनियमितताएं
कुछ दिन पहले आयकर विभाग ने उप-पंजीयक कार्यालय से 170 से अधिक संदिग्ध रजिस्ट्रियों से जुड़े दस्तावेज जब्त किए थे। प्रारंभिक जांच में कई ऐसे मामले सामने आए, जिनमें करोड़ों और लाखों रुपये मूल्य की जमीनों की रजिस्ट्री महज पांच लाख रुपये नकद में दर्ज की गई थी। इसके अलावा कई दस्तावेजों में खरीदार और विक्रेता के पैन नंबर या तो गलत पाए गए या दर्ज ही नहीं थे। वहीं भुगतान पूरी तरह नकद दिखाया गया था, जिससे जांच एजेंसियों का संदेह और गहरा गया।
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ब्लैक मनी और बेनामी निवेश के एंगल से जांच
आयकर विभाग अब पूरे मामले की जांच ब्लैक मनी, बेनामी निवेश और आयकर नियमों के उल्लंघन के नजरिए से कर रहा है। बैंक रिकॉर्ड की मदद से यह पता लगाया जा रहा है कि रजिस्ट्री में दर्ज भुगतान और वास्तविक बैंकिंग लेनदेन में कोई अंतर तो नहीं है।
सीमावर्ती जिलों में बढ़ाई गई निगरानी
सूत्रों के अनुसार सीमावर्ती जिलों में जमीन की खरीद-फरोख्त, सरकारी भूमि पर कब्जे और संदिग्ध निवेश की गतिविधियों पर केंद्र सरकार की एजेंसियों की विशेष नजर है।
बताया जा रहा है कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा सीमावर्ती क्षेत्रों में अवैध वित्तीय गतिविधियों पर सख्ती के निर्देश दिए जाने के बाद विभिन्न केंद्रीय एजेंसियों ने अपनी निगरानी और जांच तेज कर दी है।
नियमों के उल्लंघन पर हो सकती है कड़ी कार्रवाई
चार्टर्ड अकाउंटेंट अनूप भाटिया के अनुसार आयकर अधिनियम की धारा 269ST के तहत दो लाख रुपये या उससे अधिक का नकद भुगतान प्रतिबंधित है।
यदि जांच में नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है तो विक्रेता पर प्राप्त नकद राशि के बराबर जुर्माना लगाया जा सकता है। वहीं खरीदार से धन के स्रोत की जांच कर कर निर्धारण के साथ दंडात्मक कार्रवाई भी की जा सकती है।
जांच अभी जारी, रिपोर्ट के बाद होगा अगला फैसला
जैसलमेर तहसीलदार राजेंद्र करण ने कहा कि यह जांच पुराने मामलों से जुड़ी है और फिलहाल इस पर विस्तृत टिप्पणी करना उचित नहीं होगा। वहीं आयकर विभाग ने संकेत दिए हैं कि जब्त दस्तावेजों और बैंक रिकॉर्ड के विस्तृत विश्लेषण के बाद आगे की कार्रवाई वरिष्ठ अधिकारियों के स्तर पर तय की जाएगी।