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जैसलमेर से ISI का एजेंट गिरफ्तार, बॉर्डर पर दुकान खोलकर कर रहा था जासूसी; पांच दिन की पुलिस रिमांड पर भेजा

Wed, 17 Jun 2026 07:45 AM IST
जैसलमेर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जैसलमेर/जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जैसलमेर/जयपुर Published by: जैसलमेर ब्यूरो Updated Wed, 17 Jun 2026 07:45 AM IST
सार

जैसलमेर में राजस्थान सीआईडी इंटेलिजेंस ने एक युवक को आईएसआई के लिए कथित जासूसी करने के आरोप में गिरफ्तार किया है। आरोपी पर सेना और बीएसएफ की गतिविधियों की जानकारी तथा वीडियो पाकिस्तान भेजने का आरोप है। मामले में ऑफिशियल सीक्रेट्स एक्ट के तहत कार्रवाई की गई है।

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Rajasthan Suspected ISI Agent Running Shop Near Border Arrested In Jaisalmer Sent To 5-Day Police Remand
जासूसी के आरोप में जैसलमेर का युवक गिरफ्तार - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे राजस्थान के जैसलमेर जिले में राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आया है। राजस्थान सीआईडी इंटेलिजेंस ने एक विशेष अभियान के तहत नाचना क्षेत्र के एक युवक को पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई के लिए कथित रूप से जासूसी करने के आरोप में गिरफ्तार किया है। इस कार्रवाई के बाद सीमावर्ती क्षेत्रों में सक्रिय संदिग्ध नेटवर्कों पर सुरक्षा एजेंसियों की निगरानी और सख्त कर दी गई है। हालांकि, कोर्ट ने 22 जून तक पुलिस हिरासत में भेज दिया है।
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गिरफ्तार आरोपी की पहचान नाचना थाना क्षेत्र के खारिया गांव स्थित हिगोला की ढाणी निवासी मुस्ताक अली पुत्र नबी बख्श के रूप में हुई है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि वह पिछले करीब दो वर्षों से पाकिस्तान स्थित हैंडलर्स के संपर्क में था और संवेदनशील जानकारियां साझा कर रहा था।
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कोर्ट ने 22 जून तक पुलिस हिरासत में भेजा
सीआईडी (इंटेलिजेंस) ने आरोपी से गहन पूछताछ के लिए सात दिन की रिमांड मांगी थी। हालांकि, कोर्ट ने उसे 22 जून तक पांच दिन की पुलिस हिरासत में भेजने के आदेश दिए हैं। अभियोजन पक्ष के अनुसार सुरक्षा एजेंसियां लंबे समय से सीमावर्ती क्षेत्रों में संचालित संदिग्ध जासूसी गतिविधियों पर नजर रखे हुए थीं। इसी दौरान मुस्ताक अली की गतिविधियां जांच एजेंसियों के रडार पर आईं।
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लंबे समय से एजेंसियों के रडार पर था आरोपी
सूत्रों के मुताबिक, राजस्थान इंटेलिजेंस राज्यभर में पाकिस्तान समर्थित गतिविधियों और संदिग्ध संपर्कों पर लगातार नजर रख रही थी। इसी दौरान मुस्ताक अली की गतिविधियां जांच एजेंसियों के संदेह के घेरे में आईं। तकनीकी निगरानी, सोशल मीडिया गतिविधियों और खुफिया सूचनाओं के आधार पर उसकी भूमिका संदिग्ध पाई गई।

इसके बाद उसे हिरासत में लेकर जयपुर स्थित पूछताछ केंद्र में लाया गया, जहां केंद्रीय और राज्य स्तरीय सुरक्षा एजेंसियों ने संयुक्त रूप से उससे पूछताछ की। जांच के दौरान उसके मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल उपकरणों से मिले साक्ष्यों ने मामले को और गंभीर बना दिया।

सोशल मीडिया के जरिए बना संपर्क
जांच एजेंसियों के अनुसार आरोपी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से पाकिस्तानी हैंडलर्स के संपर्क में आया था। प्रारंभिक पूछताछ में सामने आया है कि उसे विशेष जिम्मेदारियां सौंपी गई थीं और वह नियमित रूप से सूचनाओं का आदान-प्रदान करता था। अधिकारियों का कहना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म और सोशल मीडिया आज जासूसी गतिविधियों के प्रमुख माध्यम बनते जा रहे हैं, जिनका उपयोग विदेशी एजेंसियां अपने नेटवर्क विस्तार के लिए कर रही हैं।

सीमा मार्ग पर दुकान खोलने का मिला था निर्देश
जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी को सीमा क्षेत्र की ओर जाने वाले प्रमुख मार्ग पर दुकान संचालित करने के लिए प्रेरित किया गया था। सुरक्षा एजेंसियों का दावा है कि दुकान का उपयोग केवल व्यवसाय के लिए नहीं, बल्कि गतिविधियों पर नजर रखने के उद्देश्य से भी किया जा रहा था। आरोप है कि वह दुकान की आड़ में सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) और भारतीय सेना की गतिविधियों पर नजर रखता था। जवानों की आवाजाही, सैन्य वाहनों की गतिविधियां और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ी सूचनाएं एकत्र कर आगे भेजी जाती थीं।

सेना और बीएसएफ से जुड़ी जानकारी भेजने का आरोप
पूछताछ में यह भी सामने आया है कि आरोपी सीमा क्षेत्र में होने वाली सैन्य गतिविधियों के वीडियो और तस्वीरें बनाकर पाकिस्तानी हैंडलर्स तक पहुंचाता था। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि अब तक कितनी सूचनाएं साझा की गईं और उनका इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया गया।

पैसों के लालच में जासूसी का आरोप
खुफिया अधिकारियों का दावा है कि आरोपी आर्थिक लाभ के लिए संवेदनशील जानकारियां साझा कर रहा था। जांच में धन के लेन-देन से जुड़े कुछ संकेत मिले हैं, हालांकि पूरे नेटवर्क की पड़ताल अभी जारी है।अधिकारियों का मानना है कि सीमावर्ती इलाकों में कुछ लोगों को आर्थिक प्रलोभन देकर विदेशी एजेंसियां अपने नेटवर्क में शामिल करने का प्रयास करती हैं। इस मामले में भी इसी तरह की आशंका जताई जा रही है।

ऑफिशियल सीक्रेट्स एक्ट के तहत मामला दर्ज
राजस्थान सीआईडी इंटेलिजेंस ने आरोपी के खिलाफ शासकीय गुप्त बात अधिनियम, 1923 (ऑफिशियल सीक्रेट्स एक्ट) के तहत मामला दर्ज किया है। गिरफ्तारी के बाद उससे लगातार पूछताछ की जा रही है और उसके डिजिटल उपकरणों की फोरेंसिक जांच भी शुरू कर दी गई है।

नेटवर्क में और कौन-कौन शामिल?
अब सुरक्षा एजेंसियों का ध्यान इस बात पर केंद्रित है कि आरोपी अकेले काम कर रहा था या उसके साथ अन्य लोग भी जुड़े हुए थे। उसके मोबाइल संपर्कों, सोशल मीडिया चैट, बैंकिंग लेन-देन और कॉल रिकॉर्ड की गहन जांच की जा रही है। अधिकारियों को आशंका है कि इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क भी सक्रिय हो सकता है। इसी वजह से विभिन्न एजेंसियां समन्वय के साथ मामले की जांच आगे बढ़ा रही हैं।

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सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी सफलता
राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े विशेषज्ञ इस गिरफ्तारी को महत्वपूर्ण सफलता मान रहे हैं। जैसलमेर, बाड़मेर और अन्य सीमावर्ती क्षेत्रों में समय-समय पर जासूसी गतिविधियों के मामले सामने आते रहे हैं। ऐसे में इस कार्रवाई को सीमा सुरक्षा और खुफिया तंत्र की सतर्कता का बड़ा उदाहरण माना जा रहा है।

फिलहाल सुरक्षा एजेंसियां मामले के हर पहलू की गहन जांच कर रही हैं। पूछताछ और डिजिटल जांच के आगामी चरणों में कई और अहम खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।
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