Jalore News: डमी अभ्यर्थी बनकर दूसरों का भला करने चला था, अपनी ही नौकरी से हाथ धो बैठा व्याख्याता
शिक्षा विभाग के चर्चित फर्जी परीक्षा प्रकरण में जूनी बाली विद्यालय के व्याख्याता हरसनराम देवासी को राजकीय सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है। भर्ती परीक्षाओं में डमी अभ्यर्थी बनकर बैठने, पहचान दस्तावेजों में हेरफेर करने और परीक्षा अधिनियम के उल्लंघन जैसे आरोपों में उसके खिलाफ नौ आपराधिक मामले दर्ज हैं।
विस्तार
शिक्षा विभाग में लंबे समय से चर्चित रहे फर्जी परीक्षा प्रकरण में बड़ी कार्रवाई करते हुए निदेशालय ने जूनी बाली विद्यालय में पदस्थापित रहे व्याख्याता हरसनराम देवासी को राजकीय सेवा से बर्खास्त कर दिया है। हरसनराम पर भर्ती परीक्षाओं में डमी अभ्यर्थी बनकर परीक्षा देने, पहचान दस्तावेजों में हेरफेर करने और परीक्षा अधिनियम के उल्लंघन सहित गंभीर आरोप सिद्ध हुए हैं। विभागीय आदेश के अनुसार उसके खिलाफ कुल 9 धाराओं में आपराधिक प्रकरण दर्ज हैं। विभागीय जांच में सामने आया कि हरसनराम ने दो अलग-अलग अभ्यर्थियों की जगह फर्जी परीक्षार्थी बनकर परीक्षा दी, वहीं एक अभ्यर्थी को अवैध रूप से नौकरी दिलाने में भी भूमिका निभाई। इस मामले में वह जयपुर के एयरपोर्ट थाना क्षेत्र में दर्ज प्रकरण में जेल भी जा चुका है, जबकि प्रकरण अभी न्यायालय में विचाराधीन है।
जांच रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट हुआ कि प्रोबेशन अवधि के दौरान हरसनराम का आचरण, कार्य-व्यवहार और सत्यनिष्ठा शिक्षक पद की गरिमा के अनुरूप नहीं पाए गए। उस पर विभागीय नियमों के उल्लंघन, अनधिकृत अनुपस्थिति और जेल जाने जैसे महत्वपूर्ण तथ्यों को छिपाने के आरोप भी सिद्ध हुए, जिसके आधार पर उसे सेवा से पृथक करने का निर्णय लिया गया।
सांचौर के जोधावास निवासी हरसनराम उर्फ हरीश उर्फ हरचंद पुत्र आईदानाराम देवासी ने तीन बार NET-JRF क्वालिफाई किया और कुल पांच भर्ती परीक्षाओं में चयन हासिल किया। वर्ष 2016 में तृतीय श्रेणी शिक्षक के रूप में पहली नौकरी मिली, उसी वर्ष सेकंड ग्रेड भर्ती परीक्षा में प्रदेश में तीसरी रैंक हासिल की। 2018 में संस्कृत व्याख्याता और फिर हिंदी व्याख्याता के रूप में भी प्रदेश स्तर पर तीसरी रैंक के साथ चयन हुआ और जूनी बाली विद्यालय में नियुक्ति मिली।
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इसी दौरान 13 सितंबर 2021 को उसने दौसा जिले के महुवा निवासी डालूराम मीणा की जगह एसआई भर्ती परीक्षा दी। इसके बदले 20 लाख रुपये की डील तय हुई थी। अगले दिन अपने ही गांव के दोस्त की जगह दूसरी पारी की परीक्षा देने पहुंचा, जहां वह पकड़ा गया और जेल भेज दिया गया। इसके बाद विभाग ने उसे निलंबित कर दिया था।
बाद में दस्तावेजों और फोटो मिलान में डमी अभ्यर्थी की पुष्टि होने पर एसओजी ने फरवरी 2024 में हरसनराम और डालूराम मीणा को गिरफ्तार किया। अब विभागीय जांच पूरी होने के बाद शिक्षा विभाग ने उसे बर्खास्त कर दिया है। यह कार्रवाई राज्य में भर्ती परीक्षाओं की शुचिता को लेकर एक अहम उदाहरण मानी जा रही है।
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