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Jhalawar: दिव्यांग कोटे में बड़ा फर्जीवाड़ा, फर्जी प्रमाण-पत्र से ली सरकारी नौकरी, 12 साल बाद शिक्षक गिरफ्तार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, झालावाड़
Published by: झालावाड़ ब्यूरो
Updated Thu, 04 Jun 2026 04:46 PM IST
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सार
दिव्यांग आरक्षण का लाभ लेकर सरकारी नौकरी पाने वाले शिक्षक पर आखिरकार पुलिस का शिकंजा कस गया। जांच में दिव्यांगता संबंधी दस्तावेज संदिग्ध पाए जाने के बाद आरोपी शिक्षक को गिरफ्तार कर पुलिस रिमांड पर लिया गया है।
गिरफ्तार आरोपी शिक्षक
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
फर्जी दिव्यांगता प्रमाण-पत्र के आधार पर सरकारी नौकरी हासिल कर पिछले 12 वर्षों से राजकीय सेवा में कार्यरत एक शिक्षक को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। इस कार्रवाई को झालावाड़ पुलिस और स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप जयपुर की संयुक्त जांच की बड़ी सफलता माना जा रहा है। गिरफ्तार आरोपी को अदालत में पेश कर तीन दिन के पुलिस रिमांड पर लिया गया है, जबकि मामले में एक अन्य आरोपी शिक्षक की तलाश जारी है।
एसपी अमित कुमार बुडानिया ने बताया कि विभिन्न विभागों में फर्जी दिव्यांगता प्रमाण-पत्र के आधार पर नौकरी प्राप्त करने वाले कार्मिकों के संबंध में पुलिस को गोपनीय शिकायतें मिली थीं। इन शिकायतों की जांच आरपीएस प्रोबेशनर कृष्ण गोपाल के नेतृत्व में शुरू की गई। इसी दौरान एसओजी जयपुर से भी इसी प्रकार की सूचनाएं प्राप्त हुईं, जिसके बाद संयुक्त रूप से जांच आगे बढ़ाई गई।
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जांच के दौरान संबंधित कार्मिकों का बायोमीट्रिक सत्यापन कराया गया और संभाग स्तरीय विशेष मेडिकल बोर्ड का गठन कर मेडिकल कॉलेज कोटा में पुनः चिकित्सकीय परीक्षण करवाया गया। जांच में सामने आया कि दिव्यांग कोटे का लाभ लेने के लिए न्यूनतम 40 प्रतिशत दिव्यांगता आवश्यक होती है, जबकि आरोपी बनेसिंह की दिव्यांगता केवल 6 प्रतिशत और आरोपी योगेश कुमार की दिव्यांगता शून्य प्रतिशत पाई गई। इस आधार पर दोनों को दिव्यांगजन आरक्षण का लाभ लेने के लिए अयोग्य माना गया।
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जांच रिपोर्ट के आधार पर कोतवाली थाने में मामला दर्ज कर जांच आरपीएस प्रशिक्षु कमल कुमार मीणा को सौंपी गई। जांच के दौरान चिकित्सा विभाग से जारी मूल दिव्यांगता प्रमाण-पत्र, भर्ती परीक्षाओं के आवेदन, परीक्षा परिणाम, नियुक्ति संबंधी दस्तावेज और मेडिकल परीक्षण से जुड़े अभिलेखों का गहन परीक्षण किया गया।
पुलिस ने 3 जून को आरोपी बनेसिंह (35) पुत्र प्रभुलाल निवासी राकड़ा, तहसील अकलेरा को गिरफ्तार कर लिया। वह वर्तमान में बकानी स्थित स्वामी विवेकानंद राजकीय मॉडल स्कूल में वरिष्ठ अध्यापक (गणित) के पद पर कार्यरत था और वर्ष 2013 की वरिष्ठ अध्यापक भर्ती के माध्यम से नियुक्त हुआ था।
मामले में दूसरा आरोपी योगेश कुमार पुत्र होरीलाल गुर्जर निवासी बयाना (भरतपुर) है, जो वर्तमान में भवानीमंडी ब्लॉक के बजरपुरा राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय में तृतीय श्रेणी अध्यापक के पद पर कार्यरत है। उसकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस टीम रवाना कर दी गई है। पुलिस पूरे मामले में फर्जी दस्तावेज तैयार करने और दिव्यांगता प्रमाण-पत्र जारी करने से जुड़े अन्य पहलुओं की भी जांच कर रही है।