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Jhunjhunu News: सेना की वर्दी पहनकर अस्पतालों में घुसा फर्जी ECHS अधिकारी, रिकॉर्ड मांगे, जांच में खुली पोल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, झुंझुनू
Published by: झुंझुनू ब्यूरो
Updated Thu, 25 Jun 2026 06:08 PM IST
सार
सेना की वर्दी पहनकर खुद को ईसीएचएस का विजिलेंस अधिकारी बताने वाला एक युवक चिड़ावा के निजी अस्पतालों में बेखौफ घूमता रहा। मरीजों के रिकॉर्ड मांगने पर संदेह हुआ तो जांच में उसकी असलियत सामने आ गई और पूरे इलाके में हड़कंप मच गया।
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सेना की वर्दी पहन अस्पताल में जांच करने पहुंचा फर्जी युवक मौका पाकर हुआ फरार
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विस्तार
जिले के चिड़ावा शहर में सेना की वर्दी पहनकर खुद को ईसीएचएस का विजिलेंस अधिकारी बताने वाले एक युवक की करतूत सामने आने के बाद अस्पतालों और प्रशासन में हड़कंप मच गया। युवक निजी अस्पतालों में पहुंचकर खुद को दिल्ली से आया ईसीएचएस विजिलेंस अधिकारी बताता था और रिकॉर्ड की जांच के नाम पर मरीजों से जुड़ी संवेदनशील जानकारी और दस्तावेज मांग रहा था। मामला तब उजागर हुआ जब अस्पताल प्रबंधन को उसकी गतिविधियों पर संदेह हुआ।
जानकारी के अनुसार करीब 30 से 35 वर्ष का युवक सबसे पहले शहर के एक निजी अस्पताल में पहुंचा। उसने सेना की लेफ्टिनेंट कर्नल स्तर की वर्दी पहन रखी थी, जिससे पहली नजर में अस्पताल कर्मियों को उस पर शक नहीं हुआ। उसने खुद को ईसीएचएस का विजिलेंस अधिकारी बताते हुए अस्पताल में ईसीएचएस से जुड़े मरीजों की ओपीडी, भर्ती, उपचार, बिलिंग और अन्य रिकॉर्ड की जांच शुरू कर दी। इसके बाद वह अन्य निजी अस्पतालों में भी पहुंचा और इसी तरह निरीक्षण करने का प्रयास किया।
अस्पताल प्रबंधन ने बताया कि युवक सेना और ईसीएचएस की कार्यप्रणाली से जुड़ी कई जानकारियां रखता था। वह अधिकारियों की तरह बातचीत कर रहा था और आत्मविश्वास के साथ दस्तावेज मांग रहा था। इसी कारण शुरुआती दौर में अस्पताल संचालक और कर्मचारी उसके झांसे में आ गए। हालांकि पूछताछ के दौरान उसके व्यवहार और पहचान को लेकर संदेह पैदा हुआ।
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ये भी पढ़ें: Rajasthan News: राजस्थान में खाद की कालाबाजारी रोकने के लिए ये व्यवस्था होगी लागू, राजसमंद और सिरोही से होगी शुरुआत
मामले की सूचना मिलते ही ईसीएचएस पॉलीक्लिनिक की टीम सक्रिय हुई और तत्काल जांच शुरू की गई। जांच में सामने आया कि सेना या ईसीएचएस मुख्यालय की ओर से चिड़ावा के किसी भी अस्पताल में इस प्रकार का कोई अधिकृत विजिलेंस निरीक्षण निर्धारित नहीं था। इसके बाद संबंधित अस्पतालों से जानकारी जुटाई गई लेकिन तब तक युवक वहां से फरार हो चुका था।
प्राथमिक जांच के बाद ईसीएचएस अधिकारियों ने पूरे मामले की सूचना सेना मुख्यालय तथा संबंधित एजेंसियों को भेज दी है। साथ ही सभी निजी अस्पतालों और ईसीएचएस से संबद्ध संस्थानों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में यदि कोई व्यक्ति किसी विभाग या सेना का अधिकारी बनकर रिकॉर्ड की मांग करे तो पहले उसकी पहचान, अधिकृत आदेश और नियुक्ति पत्र का सत्यापन अवश्य किया जाए।
फिलहाल फर्जी अधिकारी की पहचान करने और उसे पकड़ने के प्रयास जारी हैं। मामले को गंभीरता से लेते हुए उसके खिलाफ आवश्यक कानूनी कार्रवाई की तैयारी की जा रही है। शुरुआती जांच में यह भी पता लगाया जा रहा है कि युवक का उद्देश्य केवल रिकॉर्ड देखना था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश भी हो सकती है।
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जानकारी के अनुसार करीब 30 से 35 वर्ष का युवक सबसे पहले शहर के एक निजी अस्पताल में पहुंचा। उसने सेना की लेफ्टिनेंट कर्नल स्तर की वर्दी पहन रखी थी, जिससे पहली नजर में अस्पताल कर्मियों को उस पर शक नहीं हुआ। उसने खुद को ईसीएचएस का विजिलेंस अधिकारी बताते हुए अस्पताल में ईसीएचएस से जुड़े मरीजों की ओपीडी, भर्ती, उपचार, बिलिंग और अन्य रिकॉर्ड की जांच शुरू कर दी। इसके बाद वह अन्य निजी अस्पतालों में भी पहुंचा और इसी तरह निरीक्षण करने का प्रयास किया।
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अस्पताल प्रबंधन ने बताया कि युवक सेना और ईसीएचएस की कार्यप्रणाली से जुड़ी कई जानकारियां रखता था। वह अधिकारियों की तरह बातचीत कर रहा था और आत्मविश्वास के साथ दस्तावेज मांग रहा था। इसी कारण शुरुआती दौर में अस्पताल संचालक और कर्मचारी उसके झांसे में आ गए। हालांकि पूछताछ के दौरान उसके व्यवहार और पहचान को लेकर संदेह पैदा हुआ।
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मामले की सूचना मिलते ही ईसीएचएस पॉलीक्लिनिक की टीम सक्रिय हुई और तत्काल जांच शुरू की गई। जांच में सामने आया कि सेना या ईसीएचएस मुख्यालय की ओर से चिड़ावा के किसी भी अस्पताल में इस प्रकार का कोई अधिकृत विजिलेंस निरीक्षण निर्धारित नहीं था। इसके बाद संबंधित अस्पतालों से जानकारी जुटाई गई लेकिन तब तक युवक वहां से फरार हो चुका था।
प्राथमिक जांच के बाद ईसीएचएस अधिकारियों ने पूरे मामले की सूचना सेना मुख्यालय तथा संबंधित एजेंसियों को भेज दी है। साथ ही सभी निजी अस्पतालों और ईसीएचएस से संबद्ध संस्थानों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में यदि कोई व्यक्ति किसी विभाग या सेना का अधिकारी बनकर रिकॉर्ड की मांग करे तो पहले उसकी पहचान, अधिकृत आदेश और नियुक्ति पत्र का सत्यापन अवश्य किया जाए।
फिलहाल फर्जी अधिकारी की पहचान करने और उसे पकड़ने के प्रयास जारी हैं। मामले को गंभीरता से लेते हुए उसके खिलाफ आवश्यक कानूनी कार्रवाई की तैयारी की जा रही है। शुरुआती जांच में यह भी पता लगाया जा रहा है कि युवक का उद्देश्य केवल रिकॉर्ड देखना था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश भी हो सकती है।