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UP BJP: भाजपा की नई टीम में चौंकाने वाले नाम, दलबदलुओं को इनाम, समझौता और संतुलन से 27 साधने का प्रयास

सुधीर कुमार सिंह, अमर उजाला, लखनऊ Published by: सुधीर कुमार Updated Fri, 26 Jun 2026 08:21 AM IST
सार

भाजपा की नई प्रदेश टीम में नए-पुराने लोगों का मिश्रण है। सूची में चौंकाने वाले नाम शामिल किए गए हैं और दलबदलुओं को इनाम दिया गया है।
 

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BJP's New Team: An Attempt to Balance Interests and Secure the 27 Seats
यूपी भाजपा। - फोटो : amar ujala

विस्तार

लंबी प्रतीक्षा, अनगिनत अटकलों और लखनऊ से दिल्ली तक कई दौर की बैठकों के बाद घोषित टीम पर प्रभावशाली नेताओं के सामंजस्य, समझौते और संतुलन की स्पष्ट छाया दिख रही है। नए-पुराने चेहरों के मिश्रण और कुछ चौंकाने वाले नामों के साथ जातीय और क्षेत्रीय संतुलन साधने का प्रयास तो किया गया है, लेकिन यह पूरी तरह संभव नहीं हो पाया है। दूसरे दलों से आने वालों को भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई है।

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विधानसभा चुनाव के शंखनाद में बमुश्किल छह माह का समय बचा है। प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने करीब छह महीने की मशक्कत के बाद वर्षों से पार्टी में महत्वपूर्ण पदों पर बैठे लोगों को हटाकर नए लोगों को मौका देकर नयापन लाने की कोशिश की है। कुछ पदाधिकारियों को पदोन्नति देकर भी टीम में उत्साह और कार्यकर्ताओं की आकांक्षाओं को उड़ान देने का प्रयास है। उन्होंने जिस टीम के सहारे 2027 विधानसभा चुनाव साधने की तैयारी की है उसमें कुछ ऐसे चेहरों को वे जगह देने से रोक नहीं पाए हैं जो उनकी इस टीम के लिए तीखी आलोचना का आधार तैयार करते हैं।
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विधान परिषद सदस्य विजय बहादुर पाठक तथा रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के पुत्र व नोएडा से विधायक पंकज सिंह सहित कई प्रमुख चेहरों को नई टीम में जगह नहीं मिली है। पंकज की जगह उनके छोटे भाई नीरज सिंह को प्रदेश उपाध्यक्ष बनाना साबित करता है कि पार्टी के बड़े नेताओं का टीम चयन पर किस स्तर तक प्रभाव रहा। प्रयोग और नया नेतृत्व उभारने का संदेश देने के लिए प्रदेश अध्यक्ष व अन्य निर्णयकर्ताओं ने पुरानी टीम के आधे से ज्यादा चेहरों को बाहर कर दिया है, लेकिन जातियों की आबादी के लिहाज से पदाधिकारियों को दी गई भागीदारी में समानुपातिक असंतुलन स्पष्ट दिख रहा है। यह सही है कि नई टीम के गठन में पार्टी नेतृत्व ने अपने कोर वोट बैंक पिछड़ी व अति पिछड़ी एवं दलित जातियों को भरपूर हिस्सेदारी दी है। अगड़ों एवं पिछड़ों के बीच भी संतुलन साधने का संदेश देने की कोशिश की है, लेकिन इस प्रयास में टीम में असंतुलन आ गया है।

आबादी के हिसाब से ब्राह्मणों को कम प्रतिनिधित्व
प्रदेश में ब्राह्मणों की आबादी 12 से 14 फीसदी तक मानी जाती है जबकि भूमिहार या त्यागी 1 फीसदी हैं। नई टीम में आबादी के लिहाज से ब्राह्मणों को कम और भूमिहारों को ज्यादा महत्व दिया गया है। नए घोषित पदाधिकारियों को मिलाकर 48 सदस्यीय टीम में चार भूमिहार पदाधिकारी बनाए गए हैं। ब्राह्मणों को आबादी के लिहाज से कम प्रतिनिधित्व मिला है।

इन्हें मिला काम का इनाम

2022 के विधानसभा चुनाव में सपा के टिकट पर जीती प्रयागराज की पूजा पाल को भी पार्टी में उपाध्यक्ष बनाकर राज्यसभा चुनाव के दौरान भाजपा के पक्ष में मतदान करने का इनाम दिया गया है। पार्टी के हिंदुत्व चेहरे के तौर पर चर्चित और प्रदेश संगठन में उपाध्यक्ष समेत कई महत्वपूर्ण पद पर रहे पूर्व कैबिनेट मंत्री सुरेश राणा को लंबे अंतराल बाद प्रदेश उपाध्यक्ष बनाकर फिर से मुख्यधारा में वापस लाया गया गया है। माना जा रहा है राणा को पश्चिम बंगाल के चुनाव में काम का इनाम दिया गया है।

33 प्रतिशत हिस्सेदारी से वंचित रहीं महिलाएं : भाजपा के महिलाओं को 33 प्रतिशत हिस्सेदारी देने के संकल्प को देखते हुए पंकज चौधरी की नई टीम में महिलाएं भी अपेक्षा के अनुसार हिस्सेदारी पाने में पीछे रह गईं। टीम में सिर्फ 12 महिलाओं को ही जगह मिल सकी है जबकि 33 प्रतिशत की कसौटी पर इन्हें 16 स्थान मिलने चाहिए थे।

लखनऊ-बाराबंकी को मिली तरजीह
लखनऊ और बाराबंकी जैसे कुछ जिलों से एक से ज्यादा पदाधिकारी बनाए गए हैं। कुछ जिले प्रतिनिधित्व पाने से वंचित रहे हैं। यही नहीं, बाराबंकी से एक ही जाति रावत (पासी) से प्रियंका रावत को उपाध्यक्ष तथा उपेंद्र रावत को महामंत्री बनाना बताता है कि पदाधिकारियों के चयन में संतुलन से ज्यादा पार्टी के प्रभावशाली नेताओं के बीच सामंजस्य और समन्वय तथा समझौते की चली है। बाराबंकी से ही अवधेश श्रीवास्तव को प्रदेश मंत्री बनाकर इस जिले को तीन पदाधिकारी दिए गए हैं।

उपेंद्र रावत लोकसभा के सदस्य रह चुके हैं। एक महिला के साथ विवादित वीडियो वायरल होने के बाद लोकसभा के 2024 के चुनाव में इनका टिकट काट दिया गया था। हालांकि फोरेंसिक जांच में वीडियो में उपेंद्र की आवाज की पुष्टि नहीं हो पाई। इन्हें प्रदेश महामंत्री बनाना चौंकाने वाला रहा।

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