अयोध्या में घोटाला: जमीन विवाद की तफ्तीश के लिए गठित राधेश्याम मिश्र कमेटी की जांच रिपोर्ट लापता
अयोध्या में जमीन घोटाले की जांच के लिए राधे श्याम मिश्रा कमेटी बनाई गई थी। जांच के लिए कमेटी को दो सप्ताह का समय दिया गया था लेकिन पांच साल बाद भी रिपोर्ट नहीं आई।
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राम मंदिर में चढ़ावा चोरी का मामला सामने आने के बाद पुराने विवाद फिर चर्चा में हैं। जमीन विवाद संबंधी आरोपों की जांच के लिए गठित राधेश्याम मिश्रा कमेटी की रिपोर्ट आज तक सामने नहीं आई है। यह कमेटी पांच साल पहले बनाई गई थी।
ट्रस्ट ने वर्ष 2020 में कई जमीनें खरीदी थीं। इनमें से कुछ खरीद-फरोख्त पर गंभीर आरोप लगे थे। एक मामले में दो करोड़ रुपये की जमीन 18 करोड़ रुपये में खरीदने का आरोप था। यह जमीन पहले एक किसान से खरीदी गई, फिर पांच मिनट में ट्रस्ट को बेची गई।
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दूसरे मामले में 20 लाख रुपये की जमीन ढाई करोड़ रुपये में खरीदने का आरोप था। विवाद बढ़ने पर शासन ने राधेश्याम मिश्रा जांच कमेटी बनाई थी। इसका उद्देश्य सभी तथ्यों को सामने लाना था, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। सूत्रों के अनुसार, एसआईटी ने अब इन मामलों को भी अपनी जांच में शामिल किया है।
जनहित याचिका खारिज और जांच का दबाव
इन आरोपों को लेकर एक जनहित याचिका भी दाखिल हुई थी। सरकार के पक्ष के बाद इसे खारिज कर दिया गया था। सरकार ने तब बताया था कि राधेश्याम मिश्रा कमेटी मामले की जांच कर रही है। कमेटी को जांच के लिए एक-दो हफ्ते का समय दिया गया था। हालांकि, यह जांच आज तक पूरी नहीं हुई और मामला दबा दिया गया।
जमीन खरीद में करोड़ों के घोटाले का आरोप
राम मंदिर में चढ़ावा चोरी मामले के बाद अब जमीन खरीद-फरोख्त का मामला गरमा गया है। आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने बृहस्पतिवार को एसआईटी को 11 दस्तावेज सौंपे। उन्होंने दावा किया कि इन जमीनों की खरीद-बिक्री में करोड़ों रुपये का घोटाला हुआ है।
सांसद ने आरोप लगाया कि मंदिर के लिए जमीनें बाजार मूल्य से कई गुना अधिक कीमत पर खरीदी गईं। इससे चंदे की रकम को भारी नुकसान पहुंचाया गया। संजय सिंह ने एसआईटी अध्यक्ष विजय विश्वास पंत और सदस्य नील रतन से मुलाकात की। उन्होंने कहा कि चढ़ावे में अनियमितताओं से जुड़े लोगों की भूमिका जमीन सौदों में भी है। संजय सिंह ने गहन जांच और कार्रवाई की मांग की है।
एसआईटी ने अब इन दस्तावेज के आधार पर विस्तृत जांच शुरू कर दी है। एक सौदे में दो करोड़ रुपये की जमीन 18 मार्च 2021 को 18.5 करोड़ रुपये में ट्रस्ट को बेची गई। इस एक सौदे में करीब 16.5 करोड़ रुपये का अंतर बताया गया है। तत्कालीन मेयर ऋषिकेश उपाध्याय और ट्रस्ट सदस्य अनिल मिश्रा इस बैनामे के गवाह थे।
मेयर के रिश्तेदार को लाभ
दस्तावेज के अनुसार, मेयर ऋषिकेश उपाध्याय के भतीजे दीप नारायण ने फरवरी 2021 में 20 लाख रुपये में जमीन खरीदी। कुछ महीने बाद मई 2021 में उन्होंने वही जमीन ट्रस्ट को 2.5 करोड़ रुपये में बेच दी। सांसद का आरोप है कि इस सौदे में 2.30 करोड़ रुपये का लाभ हुआ। दान में मिली एक अन्य जमीन भी एक करोड़ रुपये में ट्रस्ट को बेची गई।
नजूल भूमि और अन्य सौदे
संजय सिंह ने गाटा संख्या 247 की जमीन पर भी सवाल उठाए हैं। यह जमीन अप्रैल 2024 में 2.93 करोड़ रुपये के बजाय 23.61 करोड़ रुपये में खरीदी गई। आरोप है कि यह भूमि राजस्व अभिलेखों में नजूल (सरकारी) के रूप में चिह्नित थी। नवंबर 2023 में नौ करोड़ रुपये की जमीन 55.47 करोड़ रुपये में खरीदी गई। सांसद ने महंत रघुवर शरण और यशोदा नंदन त्रिपाठी से जुड़े सौदों की भी जांच मांगी है।