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Jodhpur News: 200 साल पुरानी विरासत को मिली नई पहचान, जोधपुरी मोजरी को GI टैग, नकली उत्पादों पर लगेगी रोक

Fri, 10 Jul 2026 07:51 PM IST
जोधपुर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जोधपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जोधपुर Published by: जोधपुर ब्यूरो Updated Fri, 10 Jul 2026 07:51 PM IST
सार

करीब दो शताब्दियों से अपनी विशिष्ट पहचान रखने वाली जोधपुरी मोजरी को आखिरकार GI टैग मिल गया है। इस उपलब्धि से स्थानीय हस्तशिल्प को अंतरराष्ट्रीय बाजार में नई पहचान और संरक्षण मिलेगा।
 

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Jodhpur News: GI Tag Granted to 200-Year-Old Jodhpuri Mojari, Boost for Artisans and Brand Protection
जोधपुरी बंधेज के बाद अब जोधपुरी मोजरी को मिला जीआई टैग - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

जोधपुर की करीब 200 वर्ष पुरानी पारंपरिक जोधपुरी मोजरी (जूती) को GI टैग मिल गया है। इस टैग के मिलने के साथ ही अब जोधपुरी मोजरी को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विशिष्ट पहचान मिलेगी। GI टैग मिलने से नकली उत्पादों पर अंकुश लगेगा, स्थानीय कारीगरों को बेहतर मूल्य मिलेगा और निर्यात को भी नई गति मिलने की उम्मीद है।

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जोधपुर हैंडीक्राफ्ट एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन (JHEA) और ग्राम विकास सेवा संस्थान को GI रजिस्ट्री की ओर से प्रमाण पत्र जारी किया गया है। इसके लिए वर्ष 2021 में केंद्रीय वस्त्र मंत्रालय और विकास आयुक्त (हस्तशिल्प) के सहयोग से आवेदन किया गया था।
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वर्तमान में जोधपुरी मोजरी का घरेलू बाजार करीब 100 करोड़ रुपये का है, जबकि इसका वार्षिक निर्यात लगभग 10 करोड़ रुपये का है। विशेषज्ञों का मानना है कि GI टैग मिलने के बाद अगले दो वर्षों में इस उद्योग का कारोबार दोगुना हो सकता है। इससे जोधपुर और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से जुड़े हजारों कारीगरों और उनके परिवारों को सीधा लाभ मिलेगा। GI टैग मिलने की खुशी में मोजरी कलाकारों और समाज के प्रतिनिधियों ने पूर्व सांसद मानवेंद्र सिंह जसोल से मुलाकात कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के प्रति आभार व्यक्त किया।
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इस अवसर पर मानवेंद्र सिंह जसोल ने कहा कि यह जोधपुर के लिए गर्व का क्षण है। जोधपुरी मोजरी पहले से ही अपनी पारंपरिक कारीगरी के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है और अब GI टैग मिलने से इसकी अंतरराष्ट्रीय पहचान और मजबूत होगी। इससे निर्यात बढ़ेगा, कारीगरों की आय में वृद्धि होगी और रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।


समाजसेवी नेमीचंद जीनगर ने बताया कि GI टैग के बाद जोधपुरी मोजरी की ब्रांडिंग, ई-कॉमर्स विस्तार, आधुनिक डिजाइन, गुणवत्ता सुधार, अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनियों में भागीदारी, निर्यात संवर्धन और विपणन सहायता जैसे कार्यक्रमों को बढ़ावा दिया जाएगा। साथ ही नकली और मशीनों से तैयार होने वाली मोजरियों पर भी प्रभावी नियंत्रण लगाया जा सकेगा।

उल्लेखनीय है कि इससे पहले जोधपुरी बंधेज को भी GI टैग मिल चुका है। वहीं जोधपुरी साफा, वुडन पंड ओएसिस क्राफ्ट, मारवाड़ का जीरा, जोधपुरी पत्थर की कलाकृतियां और पारंपरिक तलवों को भी GI टैग दिलाने की प्रक्रिया जारी है।

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