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पाली एसीबी की बड़ी कार्रवाई: रिश्वत लेते संविदा लेखा सहायक गिरफ्तार, बीसीएमओ की भूमिका संदिग्ध
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पाली
Published by: जोधपुर ब्यूरो
Updated Sun, 21 Jun 2026 04:45 PM IST
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सार
पाली जिले के रोहट स्थित ब्लॉक मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए संविदा लेखा सहायक को 20 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। जांच के दौरान ब्लॉक मुख्य चिकित्सा अधिकारी की कथित संलिप्तता भी सामने आई है।
रिश्वत लेते संविदा लेखा सहायक गिरफ्तार
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
पाली भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की द्वितीय इकाई ने एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम देते हुए ब्लॉक मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय, रोहट में तैनात संविदा लेखा सहायक देवकीनंदन शर्मा को 20 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया है।
गाड़ी के बिल पास करने के बदले मांगी रिश्वत
एसीबी को प्राप्त शिकायत के अनुसार, परिवादी की गाड़ी कार्यालय में टेंडर के माध्यम से लगी हुई थी। देवकीनंदन शर्मा ने गाड़ी को निरंतर संचालित रखने और अप्रैल से जून माह तक के बिल पास करने की एवज में 20 हजार रुपये रिश्वत की मांग की थी।
सत्यापन के बाद बिछाया गया जाल
एसीबी पाली द्वितीय के प्रभारी एवं अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक देरावर सिंह के नेतृत्व में गठित टीम ने शिकायत का सत्यापन किया। शिकायत सही पाए जाने पर एसीबी ने जाल बिछाकर आरोपी को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया।
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दराज में छिपाई रिश्वत की रकम
जांच में सामने आया कि आरोपी ने रिश्वत की राशि प्राप्त करने के बाद कार्यालय की नई इमारत के प्रथम तल पर स्थित लकड़ी की दराज में छिपा दी थी। एसीबी टीम ने मौके से राशि बरामद कर ली और उसे जब्त कर लिया। इस पूरे घटनाक्रम में ब्लॉक मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. हार्दिक राजपुरोहित की कथित संलिप्तता भी सामने आई है। इसके बाद एसीबी जोधपुर शहर के उप अधीक्षक किशन सिंह के नेतृत्व में टीम ने उनके आवास पर तलाशी अभियान चलाया।
यह भी पढ़ें: NEET री-एग्जाम: कोटपूतली में परीक्षा शुरू, इंटरनेट बंद; 19 केंद्रों पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम
कार्रवाई की भनक लगते ही फरार हुआ अधिकारी
एसीबी की कार्रवाई की सूचना मिलते ही डॉ. हार्दिक राजपुरोहित मौके से फरार हो गए। फिलहाल पुलिस और एसीबी की टीमें उनकी तलाश में जुटी हुई हैं। अधिकारियों का कहना है कि मामले से जुड़े सभी पहलुओं की गहन जांच की जा रही है। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो जोधपुर रेंज के उप महानिरीक्षक नारायण टोगस के सुपरविजन में पूरी कार्रवाई को अंजाम दिया गया। एसीबी अब मामले में अन्य संभावित आरोपियों और भ्रष्टाचार के नेटवर्क की भी जांच कर रही है।
गाड़ी के बिल पास करने के बदले मांगी रिश्वत
एसीबी को प्राप्त शिकायत के अनुसार, परिवादी की गाड़ी कार्यालय में टेंडर के माध्यम से लगी हुई थी। देवकीनंदन शर्मा ने गाड़ी को निरंतर संचालित रखने और अप्रैल से जून माह तक के बिल पास करने की एवज में 20 हजार रुपये रिश्वत की मांग की थी।
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सत्यापन के बाद बिछाया गया जाल
एसीबी पाली द्वितीय के प्रभारी एवं अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक देरावर सिंह के नेतृत्व में गठित टीम ने शिकायत का सत्यापन किया। शिकायत सही पाए जाने पर एसीबी ने जाल बिछाकर आरोपी को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया।
दराज में छिपाई रिश्वत की रकम
जांच में सामने आया कि आरोपी ने रिश्वत की राशि प्राप्त करने के बाद कार्यालय की नई इमारत के प्रथम तल पर स्थित लकड़ी की दराज में छिपा दी थी। एसीबी टीम ने मौके से राशि बरामद कर ली और उसे जब्त कर लिया। इस पूरे घटनाक्रम में ब्लॉक मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. हार्दिक राजपुरोहित की कथित संलिप्तता भी सामने आई है। इसके बाद एसीबी जोधपुर शहर के उप अधीक्षक किशन सिंह के नेतृत्व में टीम ने उनके आवास पर तलाशी अभियान चलाया।
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कार्रवाई की भनक लगते ही फरार हुआ अधिकारी
एसीबी की कार्रवाई की सूचना मिलते ही डॉ. हार्दिक राजपुरोहित मौके से फरार हो गए। फिलहाल पुलिस और एसीबी की टीमें उनकी तलाश में जुटी हुई हैं। अधिकारियों का कहना है कि मामले से जुड़े सभी पहलुओं की गहन जांच की जा रही है। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो जोधपुर रेंज के उप महानिरीक्षक नारायण टोगस के सुपरविजन में पूरी कार्रवाई को अंजाम दिया गया। एसीबी अब मामले में अन्य संभावित आरोपियों और भ्रष्टाचार के नेटवर्क की भी जांच कर रही है।