Rajasthan: 45 रुपये का टिकट, चार बार यात्रा, AI से एडिट कर करते रहे सफर; स्टेशन पर पकड़े गए
Rajasthan: मरुधर एक्सप्रेस में AI की मदद से एक ही टिकट नंबर को एडिट कर चार अलग-अलग यात्राएं करने का फर्जीवाड़ा सामने आया, जिसे टीटीई की सतर्कता से पकड़ा गया। दोनों आरोपियों को पकड़कर जीआरपी के हवाले किया गया और रेलवे ने ऐसे मामलों पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी है।
विस्तार
एक टिकट… और उससे चार बार सफर! सुनने में भले अजीब लगे, लेकिन मरुधर एक्सप्रेस में ऐसा ही चौंकाने वाला मामला सामने आया है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से फर्जी टिकट बनाकर यात्रा कर रहे दो यात्री टीटीई की सतर्कता से पकड़े गए। उत्तर पश्चिम रेलवे के जोधपुर मंडल के सीनियर डीसीएम हितेश यादव के अनुसार, सोमवार को ट्रेन संख्या 14863 वाराणसी सिटी-जोधपुर मरुधर एक्सप्रेस के जोधपुर पहुंचने पर प्लेटफॉर्म पर सघन टिकट जांच की जा रही थी। इसी दौरान ड्यूटी पर तैनात सीटीटीसी अनिकेत रामदेव को दो यात्रियों के मोबाइल टिकट पर संदेह हुआ। पहली नजर में टिकट सामान्य दिख रहा था, लेकिन शक होने पर जब हैंडहेल्ड टर्मिनल मशीन में यूटीएस नंबर डाला गया तो पूरा मामला खुल गया।
45 रुपए का टिकट, चार बार इस्तेमाल
जांच में सामने आया कि जो टिकट जोधपुर तक का दिखाया जा रहा था, वह असल में 22 मार्च को कर्नाटक के कुनिगल से चन्नारायपटना के बीच एक यात्री के लिए मात्र 45 रुपए में जारी हुआ था और उस पर यात्रा भी की जा चुकी थी। इसके बाद उसी यूटीएस नंबर (XT6PEBG006) को AI टूल्स की मदद से एडिट कर अलग-अलग तारीख और रूट के फर्जी टिकट तैयार किए गए। इनमें जयपुर-आगरा (1 मार्च), आसरवा-उदयपुर (28 मार्च) और आगरा फोर्ट-जोधपुर (20 अप्रैल) की यात्राएं शामिल हैं।
एक नंबर बना सबसे बड़ा सुराग
सीनियर डीसीएम के मुताबिक, हर टिकट का नंबर अलग होता है, लेकिन यहां एक ही नंबर बार-बार इस्तेमाल हुआ। यही गड़बड़ी पकड़ में आने का सबसे बड़ा कारण बनी।
स्टेशन पर ही कार्रवाई
फर्जीवाड़ा सामने आते ही दोनों यात्रियों को बिना टिकट चार्ज करने के बाद वाणिज्य निरीक्षक रतनसिंह गुर्जर की रिपोर्ट के साथ जीआरपी के हवाले कर दिया गया। दोनों की उम्र करीब 25 वर्ष बताई जा रही है और वे कर्नाटक के निवासी हैं।
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AI का बढ़ता दुरुपयोग, रेलवे की चेतावनी
डीआरएम अनुराग त्रिपाठी के निर्देश पर जोधपुर मंडल में सघन टिकट जांच अभियान चलाया जा रहा है। रेलवे ने चेतावनी दी है कि इस तरह की धोखाधड़ी से रेलवे को आर्थिक नुकसान होता है और टिकटिंग प्रणाली की विश्वसनीयता प्रभावित होती है। यह मामला केवल टिकट फर्जीवाड़ा नहीं, बल्कि तकनीक के खतरनाक दुरुपयोग का संकेत भी है। रेलवे ने स्पष्ट किया है कि ऐसे मामलों में कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी, जिसमें जुर्माना और जेल दोनों का प्रावधान है।
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