Rajasthan: नाक से अंदर गई खुली सेफ्टी पिन, गले और दिमाग के बीच अटकी; एंडोस्कोपी से डॉक्टरों ने किया चमत्कार
राजस्थान के कोटा में ढाई साल के एक मासूम की जान डॉक्टरों ने जटिल ऑपरेशन कर बचा ली। खेलते समय नाक में गई खुली सेफ्टी पिन सांस के साथ गले और दिमाग के बीच स्थित एडीनाइट क्षेत्र में फंस गई थी।
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राजस्थान के कोटा जिले में डॉक्टरों ने एक बेहद जटिल और चुनौतीपूर्ण ऑपरेशन कर ढाई साल के मासूम की जान बचा ली। खेलते समय बच्चे की नाक से अंदर गई खुली सेफ्टी पिन गले और दिमाग के बीच के हिस्से में जाकर फंस गई थी। पिन खुली होने के कारण अंदरूनी हिस्से में चोट लग गई और खून भी जम गया था। एमबीएस अस्पताल के ईएनटी विभाग की टीम ने एंडोस्कोपी (दूरबीन तकनीक) की मदद से काफी मशक्कत के बाद सेफ्टी पिन को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। अब बच्चा पूरी तरह स्वस्थ है और सामान्य रूप से खाना-पीना भी शुरू कर चुका है।
नाक से अंदर गई सेफ्टी पिन, गले और सिर के बीच जाकर फंसी
एमबीएस अस्पताल के ईएनटी विभाग के डॉक्टर शैलेंद्र कुमार मीणा ने बताया कि 21 जुलाई को ढाई साल के बच्चे को अस्पताल की इमरजेंसी में लाया गया था। जांच के दौरान पता चला कि खेलते समय नाक में गई सेफ्टी पिन सांस के साथ अंदर चली गई और गले तथा सिर के बीच स्थित एडीनाइट (Adenoid) क्षेत्र में जाकर फंस गई।
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खुली पिन से अंदर लगी चोट, जमा हो गया था खून
डॉक्टरों के अनुसार सेफ्टी पिन खुली हुई थी, जिससे अंदरूनी हिस्से में गंभीर चोट लग गई थी और वहां खून भी जम गया था। ऐसे में सबसे पहले बच्चे को बेहोश कर इमरजेंसी ऑपरेशन थिएटर में एंडोस्कोपी की प्रक्रिया शुरू की गई। सक्शन मशीन की मदद से जमा हुआ खून हटाकर रास्ता साफ किया गया, जिसके बाद फंसी हुई खुली सेफ्टी पिन दिखाई दी।
एंडोस्कोपी से सफल ऑपरेशन, मासूम सुरक्षित
ईएनटी विशेषज्ञों ने काफी सावधानी और मशक्कत के बाद एंडोस्कोपी की सहायता से सेफ्टी पिन को बाहर निकाल लिया। डॉक्टरों का कहना है कि ऑपरेशन पूरी तरह सफल रहा और बच्चा अब स्वस्थ है। वह सामान्य रूप से खाना-पीना भी शुरू कर चुका है।
बूंदी से किया गया था कोटा रेफर
जानकारी के अनुसार बच्चा बूंदी जिले के नैनवा क्षेत्र का रहने वाला है। 20 जुलाई को घर में खेलते समय उसने सेफ्टी पिन नाक में डाल ली थी। सांस लेने के दौरान पिन अंदर चली गई। पहले उसे बूंदी अस्पताल ले जाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद गंभीर स्थिति को देखते हुए कोटा के एमबीएस अस्पताल रेफर कर दिया गया। वहां डॉक्टरों ने समय रहते ऑपरेशन कर उसकी जान बचा ली।