Kota: किडनी ट्रांसप्लांट के आश्वासन पर खत्म हुआ गतिरोध, पीड़ित महिलाओं ने फिर शुरू कराया इलाज
कोटा में सिजेरियन के बाद किडनी फेल्योर से पीड़ित पांचों प्रसूताएं प्रशासन और चिकित्सा विभाग के लिखित आश्वासन के बाद डायलिसिस कराने को तैयार हो गईं। उन्हें 20 दिन डॉक्टरों की निगरानी में रखा जाएगा, जबकि जरूरत पड़ने पर नि:शुल्क किडनी ट्रांसप्लांट का भी भरोसा दिया गया।
कोटा में सिजेरियन के बाद किडनी फेल्योर से पीड़ित पांचों प्रसूताएं प्रशासन और चिकित्सा विभाग के लिखित आश्वासन के बाद डायलिसिस कराने को तैयार हो गईं। उन्हें 20 दिन डॉक्टरों की निगरानी में रखा जाएगा, जबकि जरूरत पड़ने पर नि:शुल्क किडनी ट्रांसप्लांट का भी भरोसा दिया गया।
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राजस्थान के कोटा जिले में सिजेरियन ऑपरेशन के बाद प्रसूताओं के किडनी फेल होने के मामले में नया घटनाक्रम सामने आया है। डायलिसिस कराने से इनकार करने वाली पांचों प्रसूताएं अब प्रशासन और चिकित्सा विभाग के आश्वासन के बाद इलाज के लिए तैयार हो गई हैं। गुरुवार को जिला प्रशासन, मेडिकल कॉलेज और पीड़ित परिवारों के बीच हुई बैठक में कई मांगों पर सहमति बनी। लिखित आश्वासन मिलने के बाद पांचों महिलाओं ने डायलिसिस कराने की सहमति दे दी। अब उन्हें करीब 20 दिन तक चिकित्सकों की निगरानी में रखा जाएगा, जिसके बाद उनकी स्थिति के आधार पर आगे की उपचार प्रक्रिया तय की जाएगी।
दरअसल, बुधवार से ही पांचों महिलाओं ने डायलिसिस कराने से इनकार कर दिया था। इससे पहले पीड़ित परिवारों ने जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर किडनी ट्रांसप्लांट की मांग की थी और प्रशासन को 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया था। तय समय में सकारात्मक जवाब नहीं मिलने पर प्रसूताओं ने डायलिसिस कराने से मना कर दिया और इच्छा मृत्यु की मांग भी उठाई थी।
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स्थिति को देखते हुए गुरुवार को अतिरिक्त जिला कलेक्टर और मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. नीलेश जैन ने प्रसूताओं और उनके परिजनों के साथ बैठक की। बैठक में प्रशासन ने लिखित रूप से भरोसा दिलाया कि पांचों महिलाओं के डायलिसिस में किसी भी प्रकार की परेशानी नहीं आने दी जाएगी। यदि वे अस्पताल से छुट्टी लेकर घर भी चली जाती हैं, तब भी डायलिसिस के लिए आने पर उन्हें प्राथमिकता दी जाएगी।
मेडिकल कॉलेज प्राचार्य डॉ. नीलेश जैन ने बताया कि यदि उपयुक्त डोनर उपलब्ध होता है तो नियमानुसार पांचों महिलाओं का निशुल्क किडनी ट्रांसप्लांट भी कराया जाएगा। फिलहाल सभी महिलाओं की स्थिति पहले की तुलना में बेहतर है। चिकित्सकों के अनुसार उपचार की पूरी प्रक्रिया में करीब तीन महीने का समय लग सकता है। तब तक नियमित डायलिसिस आवश्यक रहेगा। साथ ही संभावना है कि लगातार डायलिसिस से उनकी किडनी की कार्यक्षमता में भी सुधार हो सकता है।